Anant Chaturdashi 2025 Visarjan Muhurat: अनंत चतुर्दशी पर भारी मन से भक्त देंगे बाप्पा को विदाई, देखें शुभ मुहूर्त
गणपति विसर्जन (Photo: Wikimedia commons)

Anant Chaturdashi 2025 Visarjan Muhurat: गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) एक ऐसा त्योहार है जो बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. यह भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष में हुआ था. यह त्योहार आमतौर पर अगस्त या सितंबर के महीने में मनाया जाता है. गणेश उत्सव के ग्यारहवें दिन अनंत चतुर्दशी के दिन बाप्पा का विसर्जन किया जाता है. गणेश विसर्जन (Ganesh Immersion), या भगवान गणेश की मूर्ति का जल में विसर्जन, गणेश उत्सव त्योहार के सबसे भावनात्मक और महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है. यह गणेश जी को विदाई देने का प्रतीक है क्योंकि वे अपने भक्तों को सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देते हुए अपने घर कैलाश पर्वत लौटते हैं. विसर्जन की प्रक्रिया अंतिम पूजा से शुरू होती है, जहां नारियल, फूल और मिठाइयां चढ़ाई जाती हैं. इसके बाद भक्त संगीत, "गणपति बप्पा मोरया" के जयकारों और डांस के साथ मूर्ति को एक जुलूस में ले जाते हैं. बड़ी मूर्तियों को नदियों या समुद्र में ले जाया जाता है, जबकि छोटी मूर्तियों को पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए घर पर ही टब में विसर्जित किया जा सकता है. यह भी पढ़ें: Five Day Ganesh Visarjan 2025 Schedule: पांच दिन की गणपति का इस दिन होगा विसर्जन, यहां देखें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

सबसे महत्वपूर्ण विसर्जन ग्यारहवें दिन अनंत चतुर्दशी को होता है, जो इस वर्ष शनिवार, 6 सितंबर को पड़ रही है (चतुर्दशी तिथि: 6 सितंबर को सुबह 3:12 बजे से 7 सितंबर को प्रातः 1:41 बजे तक) है.

गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त

प्रातःकाल का मुहूर्त (शुभ): प्रातः 07:36 बजे से प्रातः 09:10 बजे तक

दोपहर का मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): दोपहर 12:19 बजे से शाम 05:02 बजे तक

सायंकाल मुहूर्त (लाभ): सायं 06:37 बजे से रात्रि 08:02 बजे तक

रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृता, चर): 09:28 अपराह्न से 01:45 पूर्वाह्न, 7 सितंबर

प्रातः काल मुहूर्त (लाभ): प्रातः 04:36 से प्रातः 06:02 तक, 7 सितंबर

अनंत चतुर्दशी का दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को भी समर्पित है. अनंत चतुर्दशी विसर्जन की भव्यता, भक्ति और सामुदायिक उत्सवों के आनंद, दोनों को दर्शाती है, अगल बरस जल्दी आना की आशा के साथ भक्त बाप्पा को नाम आंखों से विदाई देते हैं.