नई दिल्ली, 30 जुलाई : अदालत द्वारा दोषी करार दिए गए कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक (Yasin Malik) को चार दिन यहां के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती रहने के बाद छुट्टी दे दी गई और वह तिहाड़ जेल लौट आया है. महानिदेशक (कारागार) संदीप गोयल ने आईएएनएस को बताया, "वह (मलिक) शुक्रवार को तिहाड़ वापस आए." मलिक की 26 जुलाई को जारी भूख हड़ताल के बाद तबीयत बिगड़ने के बाद जेल अधिकारियों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था. अपने सेल में लौटने के बाद मलिक ने अपनी भूख हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है और अभी भी खाना नहीं खा रहा है.
जेल में बंद अलगाववादी नेता, जो वर्तमान में तिहाड़ जेल की जेल नंबर 7 में बंद है, 22 जुलाई को भूख हड़ताल पर चला गया था. जब उनसे भूख हड़ताल का कारण पूछा गया तो अधिकारी ने कुछ भी बताने से परहेज किया. हालांकि, जेल सूत्रों ने कहा कि कश्मीरी अलगाववादी उन एजेंसियों के खिलाफ विरोध कर रहे हैं जो उनके मामलों की जांच कर रही हैं. मलिक को फरवरी 2019 में जैश-ए-मोहम्मद द्वारा किए गए आतंकी हमले के तुरंत बाद गिरफ्तार किया गया था और वह दो साल से अधिक समय से दिल्ली की तिहाड़ जेल में है. यह भी पढ़ें : केरल सरकार बुजुर्गों के लिए आयोग गठित करने पर विचार कर रही है: मंत्री बिंदू
लोकसभा चुनाव से पहले 14 फरवरी, 2019 को एक बम विस्फोट में सीआरपीएफ के 40 जवानों की मौत एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में आई. कुछ ही दिनों में मलिक को उनके श्रीनगर स्थित आवास से उठा लिया गया. जमात-ए-इस्लामी के साथ उसके जेकेएलएफ पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था. मलिक को 2017 के टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराया गया था और 25 मई को दिल्ली में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विशेष अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसमें उसने सभी आरोपों को स्वीकार किया था. हाल ही में 15 जुलाई को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बहन रुबैया सईद ने तीन दशक पहले मलिक को अपने अपहर्ता के रूप में पहचाना था. जेल में बंद चार आतंकवादी कमांडरों की अदला-बदली करके उनकी रिहाई का प्रबंधन किया गया था, जब उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद वी.पी. सिंह सरकार में तत्कालीन गृहमंत्री थे. अभियोजन पक्ष की गवाह के रूप में सूचीबद्ध रुबैया सईद जम्मू में सीबीआई अदालत में पेश हुईं और मलिक और तीन अन्य आरोपियों की पहचान अपहर्ताओं के रूप में की.
मलिक फिलहाल तिहाड़ जेल की जेल नंबर 7 में बंद है. एनआईए कोर्ट ने अपने आदेश में दोषी को दो आजीवन कारावास और 10-10 साल की पांच-पांच सजा सुनाई थी. कठोर कारावास का अर्थ है अपराधी को इस तरह से कैद करना जो अपराधी को जेल में विशेष व्यवस्था के अधीन करके अपराध की प्रकृति के आधार पर जेल की अवधि की कठिनाई को बढ़ाता है. हालांकि कोर्ट के आदेश के बावजूद मलिक को सुरक्षा कारणों से जेल के अंदर कोई काम नहीं दिया गया.













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