क्या प्रतिबंध से रुकेंगे ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी के खेल
भारतीयों ने सालभर में गेमिंग ऐप्स पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये लुटा दिए, जिसके बाद सरकार ने ऐसे गेम्स पर रोक लगा दी.
भारतीयों ने सालभर में गेमिंग ऐप्स पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये लुटा दिए, जिसके बाद सरकार ने ऐसे गेम्स पर रोक लगा दी. हालांकि, अब डर यह है कि खिलाड़ी अपनी कमाई दांव पर लगाने के लिए गैर-कानूनी ऐप्स का रुख कर सकते हैं.भारत के सूचना एवं प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को बताया कि ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 1अक्टूबर, 2025 से लागू हो जाएगा. इस कानून के तहत, देश में ऑनलाइन मनी गेमिंग यानी असली रुपये लगाकर खेले जाने वाले सभी गेमों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसमें ऑनलाइन जुआ, सट्टेबाजी और फैंटसी स्पोर्ट्स सभी शामिल हैं.
हालांकि, इस प्रतिबंध का लागू होना अब बस एक औपचारिकता ही है क्योंकि गेमिंग कंपनियों ने इस कानून के संसद से पास होने के बाद ही अपना धंधा समेटना शुरू कर दिया था. कई कंपनियां दूसरे क्षेत्रों में चली गई हैं, जैसे- धन प्रबंधन और शॉर्ट फॉर्म वीडियो. वहीं, कई कंपनियां अब बिना पैसे वाले खेलों पर अपना ध्यान लगा रही हैं. ऐसी ज्यादातर कंपनियों में कर्मचारियों की छंटनी भी हुई है.
क्या अब भारतीय नहीं खेलेंगे पैसे वाले खेल
गेमिंग क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ऑनलाइन मनी गेमिंग पर प्रतिबंध लगने से इसके शौकीन लोग अनियमित ऐप्स और विदेशी प्लेटफॉर्मों की तरफ जा सकते हैं, जिससे नए वित्तीय और सामाजिक जोखिम पैदा हो सकते हैं. फैंटसी क्रिकेट के विश्लेषक वीरेन हेमरजानी ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "इन गेमों की लत लगने की वजह से कई लोग विदेशी प्लेटफॉर्मों पर चले जाएंगे, वे डोपामाइन हासिल करने के दूसरे साधन ढूंढ़ लेंगे.” डोपामाइन हॉर्मोन हमें खुशी का अहसास करवाता है.
हेमरजानी आगे कहते हैं, "इसकी वजह से धोखाधड़ी और घोटाले भी होते हैं क्योंकि अब सबकुछ अनियमित हो गया है. अगर अब यूजर जीतते भी हैं, तो भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उन्हें उनका पैसा वापस मिल जाएगा.” उन्होंने यह भी बताया कि अब कई ऐप्स खुद को शॉपिंग प्लेटफॉर्म के रूप में पेश करते हैं, लेकिन गेम खेलने के लिए गैरकानूनी तरीके से डिजिटल कॉइन और टोकन देते हैं. फैंटसी स्पोर्ट्स खेलने वाले एक और खिलाड़ी कहते हैं कि एक बार बन चुकी आदत आसानी से नहीं छूटती है.
कई यूजरों का यह भी कहना है कि प्रतिबंध की वजह से जुए-सट्टे के चोरी-छिपे चलने वाले धंधे को बढ़ावा मिलेगा. आठ सालों से फैंटसी स्पोर्ट्स खेल रहे वरुण शर्मा रॉयटर्स से कहते हैं, "अब बड़ी संख्या में लोग गैरकानूनी और विदेशी गेमों में पैसे लगाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का इस्तेमाल करेंगे या ऑफलाइन काम करने वाले बुकियों से संपर्क साधेंगे.” उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिबंध लगने के बाद से टेलीग्राम जैसी ऐप पर ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी के ऑफरों की बाढ़ आ गई है.
सरकार ने क्यों लगाया प्रतिबंध
केंद्र सरकार के लाए ‘द प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट, 2025' ने कई गेमिंग कंपनियों को अर्श से फर्श पर ला पटका है. इन कंपनियों को अपने मनी गेम्स बंद करने पड़े, जिनसे इनकी सबसे ज्यादा कमाई होती थी. अब इन कंपनियों का कहना है कि ये गेम्स कौशल आधारित होते हैं, इसलिए इन्हें जुआ नहीं कहा जा सकता. एक गेमिंग कंपनी इस कानून के खिलाफ अदालत में भी गई है. हालांकि, अभी इस मामले में कोई आदेश नहीं आया है.
इस मामले में सरकार का कहना है कि फैंटसी मनी गेम्स लोगों को बड़े फायदे का लालच देकर उनका शोषण करते हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, सरकारी आंकड़ों में सामने आया है कि इन गेमिंग ऐप्स पर सालाना 45 करोड़ लोगों ने 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं. सरकार के अनुसार, इस तरह के ऐप के चलते वित्तीय संकट, लत और आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ी है और कई परिवार तबाह हुए हैं.
क्या कोई दूसरा उपाय हो सकता था
ऑनलाइन मनी गेमिंग के कई समर्थकों का कहना है कि प्रतिबंध की बजाय कुछ दूसरे नियम लागू कर के भी लत लगने और आर्थिक नुकसान के जोखिम को कम किया जा सकता था. उनका सुझाव है कि गेम खेलने के समय और उस दौरान खर्च किए जाने वाले रुपयों की एक सीमा तय की जा सकती थी. यह भी तय किया जा सकता था कि गेम की एंट्री फीस और इनाम की राशि के बीच क्या अनुपात होगा.
बेंगलुरु में रहने वाले नंदन कामत स्पोर्ट्स और गेमिंग लॉ के विशेषज्ञ हैं. उनका कहना है कि यूजर्स के अधिकारों और वे अपना समय और पैसा किस तरह खर्च करना चाहते हैं, इस पर और चर्चा की जरूरत है. उनके मुताबिक यह तर्क दिया जा सकता है कि कौशल-आधारित गेमों पर पूरी तरह से बैन लगा देना, अभिव्यक्ति और पेशे दोनों पर एक अनुचित रोक है.
कामत ने कहा कि सरकार को स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा देना चाहिए जो शायद गेम खेलने वाले लोगों की इच्छाओं और जरूरतों को पूरा कर सकें. उनके अनुसार, डिजिटल हेल्थ प्रोग्राम भी चलाए जाने चाहिए जो लत के शिकार लोगों की उससे उबरने में मदद कर सकें. उन्होंने सरकार से गेमिंग के अनियमित बाजार का विनियमन बेहतर करने की भी अपील की, ताकि लोगों को नुकसान ना पहुंचे.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 19, 2025 04:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

