Who Is Ashok Kirtania: कौन हैं सुवेंदु अधिकारी सरकार में मंत्री बने अशोक कीर्तनिया? जानें BJP नेता का राजनीतिक सफर
शपथ ग्रहण समारोह के बाद अशोक कीर्तनिया ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना होगा. वह अगले सप्ताह मंत्री बनने के बाद अपने विधानसभा क्षेत्र का पहला आधिकारिक दौरा कर सकते हैं. इस दौरान वे स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लंबित इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा भी करेंगे.
Who Is Ashok Kirtania: अशोक कीर्तनिया ने पश्चिम बंगाल की नई बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ले ली है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में गठित सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में किया गया. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में यह एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. अशोक कीर्तनिया को मंत्रिमंडल में शामिल करना बीजेपी की एक रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है, खासकर मतुआ बहुल सीमावर्ती इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए. West Bengal Oath Ceremony: पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण समारोह में दिखी PM मोदी की अद्भुत तस्वीर, मंच पर जनता के सामने हुए दंडवत; देखें VIDEO
बोंगांव में अशोक कीर्तनिया की मजबूत पकड़
अशोक कीर्तनिया ने उत्तर 24 परगना जिले की बोंगांव उत्तर सीट से अपनी राजनीतिक पहचान बनाई. स्थानीय समुदाय में मजबूत पकड़ रखने वाले कीर्तनिया लंबे समय से मतुआ समुदाय के अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं. पश्चिम बंगाल के कम से कम पांच जिलों में मतुआ समुदाय का बड़ा चुनावी प्रभाव माना जाता है.
कैबिनेट मंत्री बनने से पहले कीर्तनिया उत्तर 24 परगना जिले में बीजेपी के प्रमुख संगठनात्मक नेताओं में शामिल थे. हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान जमीनी स्तर पर समर्थन जुटाने में उनकी बड़ी भूमिका रही, जिसने उन्हें सुवेंदु अधिकारी के करीबी नेताओं में जगह दिलाई.
कैबिनेट में अशोक कीर्तनिया की रणनीतिक भूमिका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अशोक कीर्तनिया की नियुक्ति का उद्देश्य सीमावर्ती जिलों और उत्तर बंगाल में क्षेत्रीय समस्याओं को तेजी से हल करना है. माना जा रहा है कि उन्हें ग्रामीण विकास या शरणार्थी कल्याण से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी दी जा सकती है, हालांकि विभागों का आधिकारिक बंटवारा अभी बाकी है.
कीर्तनिया लंबे समय से भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिकता से जुड़ी नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग करते रहे हैं. उनकी मौजूदगी से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को ऐसे नेता का समर्थन मिलेगा, जो सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को अच्छी तरह समझते हैं.
कौन हैं अशोक कीर्तनिया?
अशोक कीर्तनिया ने बोंगांव उत्तर विधानसभा सीट पर अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए टीएमसी उम्मीदवार बिस्वजीत दास को 40,670 वोटों के बड़े अंतर से हराया. 2021 के मुकाबले यह जीत काफी बड़ी रही, क्योंकि तब उन्होंने 10,488 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. इस बार उनकी जीत का अंतर 30 हजार से ज्यादा बढ़ गया.
बीजेपी की नई सरकार इस समय पश्चिम बंगाल में "डबल इंजन" मॉडल को मजबूत करने पर जोर दे रही है. अशोक कीर्तनिया जैसे नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर सुवेंदु अधिकारी ने यह संकेत दिया है कि सरकार स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं को प्राथमिकता देना चाहती है. जमीनी स्तर के कार्यकर्ता से राज्य मंत्री तक का अशोक कीर्तनिया का सफर बंगाल में बीजेपी की बदलती राजनीतिक रणनीति को भी दर्शाता है, जहां पार्टी अब क्षेत्रीय प्रभाव रखने वाले नेताओं पर ज्यादा भरोसा जता रही है.
नए मंत्री के तौर पर क्या होंगे अगले कदम
शपथ ग्रहण समारोह के बाद अशोक कीर्तनिया ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना होगा. वह अगले सप्ताह मंत्री बनने के बाद अपने विधानसभा क्षेत्र का पहला आधिकारिक दौरा कर सकते हैं. इस दौरान वे स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लंबित इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा भी करेंगे.