West Bengal SIR: टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी का चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप, 'अनप्लांड SIR प्रक्रिया के चलते बंगाल में अब तक 126 मौतें'
टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने निर्वाचन आयोग और भाजपा पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि बंगाल में 'अनियोजित' मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के कारण अब तक 126 लोगों की जान जा चुकी है.
West Bengal SIR: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और भाजपा पर तीखा हमला बोला है. एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस "अनियोजित" प्रक्रिया के कारण राज्य में अब तक 126 लोगों की मौत हो चुकी है. उन्होंने इन मौतों का मुख्य कारण काम का अत्यधिक दबाव और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर पैदा हुआ तनाव बताया है.
CEC ज्ञानेश कुमार के रवैये पर सवाल
अभिषेक बनर्जी ने हाल ही में नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बैठक का जिक्र करते हुए अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने दावा किया कि जब टीएमसी के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने लगभग 1.25 करोड़ मतदाताओं को 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' (तार्किक विसंगतियों) के दायरे में रखने के मानदंड पूछे, तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिले. बनर्जी ने आरोप लगाया कि सीईसी ने पारदर्शिता दिखाने के बजाय असंतोषजनक आचरण किया. यह भी पढ़े: West Bengal: SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सख्ती, निर्वाचन आयोग ने दिए अनुपालन के निर्देश
'बंगाली विरोधी' एजेंडे का आरोप
टीएमसी नेता ने केंद्र सरकार और भाजपा पर 'बंगाली विरोधी' होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बंगाल में माइक्रो-ऑब्जर्वर की तैनाती और मतदाताओं को परेशान करने की रणनीति उसी तरह अपनाई जा रही है जैसे दिल्ली और हरियाणा में की गई थी. बनर्जी ने इसे "सॉफ्टवेयर इंटेंसिव रिगिंग" (सॉफ्टवेयर आधारित धांधली) करार दिया और कहा कि यह प्रक्रिया बंगाल के लोगों को परेशान करने के लिए तैयार की गई है.
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप की बातें
अभिषेक बनर्जी ने इस संघर्ष को पश्चिम बंगाल की एक बड़ी सफलता बताया. उन्होंने कहा कि जहां अन्य राज्य SIR के दबाव के आगे झुक गए, वहीं टीएमसी ने आयोग का डटकर मुकाबला किया. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए आयोग को निर्देश दिया है कि प्रभावित मतदाताओं की सूची पंचायत और ब्लॉक कार्यालयों में सार्वजनिक की जाए ताकि सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे.
क्या है SIR विवाद?
निर्वाचन आयोग ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को अपडेट करने के लिए 2025 के अंत में SIR प्रक्रिया शुरू की थी. हालांकि, टीएमसी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) पर असहनीय बोझ डाला जा रहा है, जिससे कई कर्मचारियों और नागरिकों की तनाव के कारण मौत हुई है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jan 25, 2026 09:41 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

