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UP: योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान, कहा- संस्कारहीन शिक्षा कभी भी राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रद्रोह में अंतर नहीं कर पाएगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने यह तय किया कि एक-एक विद्यालय को जनप्रतिनिधि गोद लें, जिससे बेसिक शिक्षा के छात्रों को स्वच्छ पेयजल समेत अन्य बुनियादी सुविधाएं मिल सकें. इसके तहत अभी तक बेसिक शिक्षा के एक लाख 60 विद्यालयों में से एक लाख 33 हजार विद्यालयों को इस योजना में शामिल किया जा चुका है, जिनमें खेल मैदान, बाउंड्री वाल का निर्माण हो चुका है.

UP: योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान, कहा- संस्कारहीन शिक्षा कभी भी राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रद्रोह में अंतर नहीं कर पाएगी
सीएम योगी (Photo Credits ANI)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का नाम लिए बगैर उनकी शिक्षा-दीक्षा पर प्रश्नचिह्न् लगाते हुए कहा कि "संस्कारहीन और शिष्टाचारविहीन शिक्षा देशद्रोहियों और राष्ट्रवादी में फर्क नहीं कर सकती हैं." उन्होंने अखिलेश द्वारा सरदार पटेल (Sardar Patel) और जिन्ना (Jinnah) का नाम एक साथ लिए जाने पर अखिलेश ही नहीं, बल्कि उनकी शिक्षा दीक्षा पर ही सवाल उठाया. यही नहीं, उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि शिक्षा के प्रारंभिक दौर में अभिभावक अगर बच्चों को उचित संस्कार नहीं दे पाते हैं तो उनके लिए देशप्रेमी और देशद्रोही जैसे फर्क करना मुश्किल होता है. Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में महिला के साथ दुष्कर्म की कोशिश के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

मुख्यमंत्री शनिवार को कालिदास मार्ग स्थित अपने आवास में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग की योजना के तहत बेसिक स्कूल के छात्रों के खाते में डीबीटी व्यवस्था से 19अरब 80 करोड़ रुपये भेजे जाने की शुरुआत की. इससे छात्रों के अभिभावक गुणवत्तापरक स्कूली ड्रेस, जूते-मोजे और बैग खरीद सकेंगे. इस व्यवस्था का लाभ स्कूलों में पढ़ रहे एक करोड़ 80 लाख छात्र-छात्राओं को मिलेगा. बाकी बचे 60 लाख छात्रों को भी जल्द ही रकम भेजी जाएगी. इस व्यवस्था के तहत हर छात्र के अभिभावक को 11 सौ रुपये दिए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने स्कूली बच्चों को यूनिफॉर्म, जूता-मोजा, स्वेटर और बैग आदि के लिए सीधे खाते में रकम भेजना शुरू कर दिया है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचारमुक्त व्यवस्था देने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) तकनीक का प्रयोग करके अभिभावकों के खाते में भेजा जा रहा है. अब शिक्षकों को यह तय करना होगा कि बच्चे इन पैसों से यूनीफार्म, जूते-मोजे और बैग-बुक्स के साथ स्कूल आएं. जो बच्चे इसका पालन न करें उनके अभिभावकों से संपर्क करके व्यवस्था को मजबूत करने का काम करें. बेसिक स्कूलों के छात्रों को सामान्य शिष्टाचार व साफ-सफाई को भी सिखाया जाए, क्योंकि संस्कारहीन शिक्षा कभी भी राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रद्रोह में अंतर नहीं कर पाएगी. प्रदेश में छह लाख से अधिक शिक्षक, अनुदेशक, शिक्षामित्र हैं, अगर यह जिम्मेदारी उठाएंगे तो यह सपना भी संभव हो सकता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने यह तय किया कि एक-एक विद्यालय को जनप्रतिनिधि गोद लें, जिससे बेसिक शिक्षा के छात्रों को स्वच्छ पेयजल समेत अन्य बुनियादी सुविधाएं मिल सकें. इसके तहत अभी तक बेसिक शिक्षा के एक लाख 60 विद्यालयों में से एक लाख 33 हजार विद्यालयों को इस योजना में शामिल किया जा चुका है, जिनमें खेल मैदान, बाउंड्री वाल का निर्माण हो चुका है. अभी तक साढ़े चार वर्षो में हर स्कूली बच्चे को दो यूनीफार्म, बैग-बुक्स सफलतापूर्वक उपलब्ध कराया गया.

बेसिक शिक्षा में अध्ययन करने वाले बच्चों को जूते और मोजे भी दिए गए. बहुत सारे बच्चे भीषण ठंड में बिना स्वेटर के स्कूल आते थे. उन्हें स्वेटर उपलब्ध कराए गए. इस व्यवस्था में कपड़ों की गुणवत्ता और समय पर सवाल खड़े होते थे. ऐसे में सरकार ने यह तय कया कि अभिभावकों को सीधे पैसा दिया जाए, जिससे वह अच्छे कपड़े और जूते मोजे खरीद सकें और शिक्षा विभाग पर जो भ्रष्टाचार का आरोप लगता है, उससे भी बचा जा सके. ऐसे में 11 सौ रुपये एक करोड़ 80 लाख छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खाते में दी जा रही है. अभी लगभग 60 लाख बच्चे जो बचे हुए हैं, उनके अभिभावकों के बैंक खातों की जांच कार्रवाई की जा रही है. जल्द ही उनके भी खाते में पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि जुलाई 2017 में एक करोड़ 30 लाख बच्चे स्कूल आ रहे थे. सरकार के प्रयास से 2020 के प्रारंभ में यानी तीन वर्ष में ही आंकड़ा एक करोड़ 81 लाख तक पहुंच गया.

उन्होंने बताया कि वह गोरखपुर के बनटंगिया गांव गए थे. वहां चार वर्ष पहले कोई भी स्कूल नहीं था. योगी ने कहा, "हम लोग धार्मिक सस्था के साथ मिलकर एक स्कूल चला रहे थे, लेकिन अभी कुछ दिन पहले जब हम वहां गए तो एक अच्छा बेसिक स्कूल चल रहा था. वहां स्मार्ट कक्षाएं चलाई जा रही थीं. वहां के बच्चे कैसे स्मार्ट होने की गवाही दे रहे थे, यह देखने योग्य था. कुछ दिन पहले इसी तरह चित्रकूट जाकर देखा, वहां इंडियन आयल के सहयोग से स्मार्ट कक्षाएं चल रही थीं. इस तरह की कक्षाएं बच्चों के जीवन में अच्छा असर डाल रही हैं. 350 से अधिक कस्तूरबा विद्यालय में आठवीं तक पढ़ रही छात्राओं को उन्ही स्कूलों में 12वीं तक की शिक्षा दी जा रही है."

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 06, 2021 11:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).