वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 1 अगस्त 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी विवादास्पद 'पारस्परिक शुल्क' (Reciprocal Tariff) नीति के तहत एक बड़ा कदम उठाते हुए 31 जुलाई और 1 अगस्त की मध्यरात्रि से ठीक पहले दर्जनों देशों के लिए टैरिफ़ की नई दरों का ऐलान कर दिया. आज से लागू हुई इन नई दरों ने वैश्विक व्यापार में एक नई बहस छेड़ दी है, जहाँ कुछ देशों को अप्रत्याशित रूप से बड़ी राहत मिली है. वहीं स्विट्जरलैंड जैसे विकसित देशों पर बोझ बढ़ा दिया गया है.
भारत को इस बदलाव में मामूली राहत मिली है. जहां टैरिफ़ में एक प्रतिशत की कटौती की गई है. साथ ही इसे एक हफ्ते के लिए टाल दिया गया है.
क्या है पारस्परिक शुल्क नीति?
ट्रंप प्रशासन की यह नीति "जैसे को तैसा" के सिद्धांत पर आधारित है. इसका मुख्य उद्देश्य उन देशों पर व्यापारिक दबाव बनाना है जो अमेरिकी सामानों पर उच्च शुल्क लगाते हैं. प्रशासन का तर्क है कि वह केवल व्यापारिक संतुलन स्थापित करना चाहता है. ताकि अमेरिकी कंपनियों को दूसरे देशों में बराबरी का मौका मिल सके. इसी नीति के तहत यह फेरबदल किया गया है.
किसे मिला फायदा, कौन हुआ नुकसान में?
इस ऐलान का सबसे बड़ा असर विकासशील और एशियाई देशों पर पड़ा है. कई देशों के लिए शुल्क की दरों में भारी कटौती की गई है, जिससे उनके लिए अमेरिकी बाजार में सामान बेचना अब काफी सस्ता हो जाएगा.
- बड़ी राहत वाले देश: कंबोडिया, लेसोथो, वियतनाम, और श्रीलंका जैसे देशों को 25% से 30% तक की बड़ी कटौती का लाभ मिला है.
- प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को भी लाभ: अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया के लिए भी शुल्कों में कमी की गई है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है.
दूसरी ओर, स्विट्जरलैंड जैसे देश के लिए टैरिफ़ 31% से बढ़ाकर 39% कर दिया गया है, जो एक बड़ा झटका माना जा रहा है. इसी तरह ब्रुनेई, फिलीपींस और कुछ अफ्रीकी देशों के लिए भी शुल्क दरें बढ़ाई गई हैं.
भारत के लिए क्या हैं मायने?
इस फेरबदल में भारत के लिए टैरिफ़ 26% से घटाकर 25% किया गया है. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह 1% की कटौती एक "सांकेतिक कदम" है. इससे भारतीय निर्यातकों को निश्चित रूप से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन यह इतनी बड़ी नहीं है कि इससे भारत-अमेरिका व्यापार पर कोई क्रांतिकारी प्रभाव पड़े. हालांकि, इसे दोनों देशों के बीच चल रही व्यापारिक बातचीत में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
प्रमुख देशों के टैरिफ़ में बदलाव: एक नज़र में
आइए इस बदलाव को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझते हैं, जिसमें कुछ प्रमुख देशों के पुराने और नए शुल्कों की तुलना की गई है.
आगे क्या?
अमेरिका के इस एकतरफा कदम से वैश्विक व्यापार परिदृश्य में अनिश्चितता बढ़ गई है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिन देशों पर बोझ बढ़ाया गया है, वे क्या प्रतिक्रिया देते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अन्य देशों को अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के लिए बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर कर सकता है. इस बदलाव का पूरा असर आने वाले महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और विभिन्न देशों के आपसी व्यापारिक संबंधों पर दिखाई देगा.










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