Crude Oil Prices Hike: मिडल ईस्ट में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा, $100 के पार पहुंचा भाव; क्या भारत में महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं. जानिए भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका क्या असर होगा.
Crude Oil Prices Hike: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है. सोमवार, 9 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गईं. ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) दोनों में भारी उछाल देखा गया है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल
ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का भाव 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू चुका है. यह पिछले तीन वर्षों में तेल की कीमतों में देखा गया सबसे बड़ा उछाल है. यह भी पढ़े: Gold Rate Today, March 07, 2026: सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, जानें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई समेत बड़े शहरों में आज के ताजा रेट
बाजार विशेषज्ञों ने क्या कहा
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं. दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है.
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है.
- पेट्रोल-डीजल की कीमतें: भारत में तेल कंपनियां (OMCs) अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर हर सुबह दाम तय करती हैं. यदि कच्चा तेल 100 डॉलर के ऊपर बना रहता है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 से 8 रुपये तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है.
- महंगाई का खतरा: ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिसका असर फल, सब्जी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है. इससे देश में खुदरा महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है.
सरकार की क्या है तैयारी?
भारतीय पेट्रोलियम मंत्रालय स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है. सरकार रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) का उपयोग करने पर विचार कर सकती है ताकि घरेलू बाजार में तेल की कमी न हो.
साथ ही, भारत अन्य देशों से रियायती दरों पर तेल खरीदने के विकल्पों को भी तलाश रहा है. हालांकि, एलपीजी (LPG) के दामों में पहले ही बढ़ोतरी की जा चुकी है, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ना शुरू हो गया है.
तनाव का कारण
इस संकट की शुरुआत मार्च की शुरुआत में हुई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और ऊर्जा केंद्रों पर हमले किए. जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी और समुद्री रास्तों को ब्लॉक करने का संकेत दिया. ओपेक (OPEC) देशों द्वारा उत्पादन में कटौती की घोषणा ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी का साया मंडराने लगा है.
(The above story first appeared on LatestLY on Mar 09, 2026 08:10 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

