Twisha Sharma Death Case: पूर्व जज की अग्रिम जमानत रद्द करने की याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई, 27 मई को होगी अगली बहस

मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोमवार, 25 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण सुनवाई की. कोर्ट ने राज्य सरकार और मृतका के पिता द्वारा दायर उन याचिकाओं पर विचार किया, जिसमें मुख्य आरोपी समर्थ सिंह की मां और पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरीबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को रद्द करने की मांग की गई है.

ट्विशा शर्मा मौत मामला (Photo Credits: File Image)

जबलपुर/भोपाल, 25 मई: देश भर में चर्चा का विषय बने मॉडल-अभिनेत्री ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) संदिग्ध मौत मामले में कानूनी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (MP High Court) ने सोमवार को राज्य सरकार और पीड़िता के पिता द्वारा दायर उन अपीलों पर सुनवाई की, जिनमें मुख्य आरोपी समर्थ सिंह (Samarth Singh) की मां और सेवानिवृत्त जिला व सत्र न्यायाधीश गिरीबाला सिंह (Giribala Singh) की अग्रिम जमानत रद्द (Cancellation of Anticipatory Bail) करने की मांग की गई है. हाई कोर्ट के जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकल पीठ ने दोनों ही याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए मामले के सभी पक्षों को अपनी दलीलें पूरी करने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई आगामी बुधवार, 27 मई 2026 को तय की है. यह भी पढ़ें: Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश; सीबीआई को सौंपी जांच, मीडिया ट्रायल और बयानबाजी पर रोक लगाने की अपील

जांच में असहयोग और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका का आरोप

सरकार और शिकायतकर्ता (ट्विशा के पिता) की ओर से अदालत में दाखिल की गई याचिकाओं में बेहद गंभीर तर्क दिए गए हैं. अभियोजन पक्ष का कहना है कि आरोपी गिरीबाला सिंह अपनी पूर्व न्यायिक पृष्ठभूमि और रसूख का इस्तेमाल करके इस हाई-प्रोफाइल दहेज हत्या मामले की चल रही विशेष जांच टीम (SIT) की तफ्तीश में बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रही हैं.

याचिका में यह आशंका भी मजबूती से जताई गई है कि यदि आरोपी पूर्व जज लगातार जमानत पर बाहर रहती हैं, तो वे अपनी कानूनी समझ और प्रभाव के चलते केस से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल व फोरेंसिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ (Tampering with evidence) कर सकती हैं.

वरिष्ठ वकीलों की फौज उतरी मैदान में, कॉपी सौंपने के निर्देश

सोमवार को हुई इस तीखी बहस के दौरान दोनों पक्षों की ओर से देश के दिग्गज कानूनी विशेषज्ञों ने पैरवी की. राज्य सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और महाधिवक्ता (Advocate General) प्रशांत सिंह अदालत में उपस्थित हुए, जबकि पीड़िता के पिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कड़ा पक्ष रखा. दूसरी तरफ, आरोपी गिरीबाला सिंह का बचाव करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता सुश्री नित्या रामकृष्णन और एनोश जॉर्ज कार्लो पेश हुए.

सुनवाई के दौरान गिरीबाला सिंह के वकीलों ने दलील दी कि उन्हें शिकायतकर्ता (ट्विशा के पिता) द्वारा दायर मुख्य याचिका की आधिकारिक प्रति (Copy) अभी तक प्राप्त नहीं हुई है. इस पर संज्ञान लेते हुए जस्टिस देवनारायण मिश्रा की पीठ ने शिकायतकर्ता पक्ष को निर्देश दिया कि वे तुरंत याचिका की प्रति प्रतिवादी (आरोपी) को सौंपें, ताकि 27 मई को होने वाली सुनवाई में मामले के सभी कानूनी पहलुओं पर अंतिम बहस की जा सके. यह भी पढ़ें: Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में मुख्य आरोपी समर्थ सिंह जबलपुर से गिरफ्तार, 7 दिनों की रिमांड मांगेगी भोपाल पुलिस

सिर्फ 24 घंटे में मिली थी अग्रिम जमानत, सुप्रीम कोर्ट की भी नजर

इस मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी. शादी के महज पांच महीने बाद, 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित उनके ससुराल में ट्विशा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटकता हुआ मिला था. घटना के तुरंत बाद उनके परिवार ने दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के गंभीर आरोप लगाए थे.

इस मामले में न्यायिक रसूख के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घटना के बाद आरोपी पूर्व जज गिरीबाला सिंह ने 14 मई को अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसे स्थानीय अदालत ने अगले ही दिन 15 मई को अभूतपूर्व तत्परता दिखाते हुए मंजूर कर लिया था। इस त्वरित राहत और पुलिस की शुरुआती ढिलाई को लेकर देश भर में भारी आक्रोश पैदा हुआ, जिसके बाद देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने भी इस मामले में संस्थागत पक्षपात की आशंका को लेकर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है. अब 27 मई को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई और आने वाली दूसरी पोस्टमार्टम व फोरेंसिक रिपोर्ट इस केस का भविष्य तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगी.

Share Now