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Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में एम्स की रिपोर्ट में जिम बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू; गर्दन के जख्मों से हुआ मिलान, CBI को सौंपी रिपोर्ट

अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में दिल्ली एम्स के मेडिकल बोर्ड ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को 11 पन्नों की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट में घटना स्थल से बरामद जिम्नास्टिक बेल्ट पर मानव त्वचा के ऊतक (स्किन टिश्यू) मिलने की पुष्टि हुई है, जो मृतका की गर्दन पर मिले चोट के निशानों से मेल खाते हैं.

Twisha Sharma Death Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में एम्स की रिपोर्ट में जिम बेल्ट पर मिले स्किन टिश्यू; गर्दन के जख्मों से हुआ मिलान, CBI को सौंपी रिपोर्ट
ट्विशा शर्मा (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली/भोपाल: अभिनेत्री व मॉडल ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक वैज्ञानिक मोड़ सामने आया है. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है. एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने पुष्टि की है कि 11 पन्नों की यह विस्तृत रिपोर्ट 10 जुलाई 2026 को जांच एजेंसी को दे दी गई है. सूत्रों के अनुसार, प्रयोगशाला और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच में उस जिम्नास्टिक बेल्ट पर मानव त्वचा के ऊतक (स्किन टिश्यू) पाए गए हैं, जिसे कथित तौर पर फांसी लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया बताया गया था. यह भी पढ़ें: Twisha Sharma Death Case: सीबीआई की FIR में बड़ा खुलासा, 'विदाई' के वक्त पूर्व जज सास गिरीबाला सिंह ने मांगे थे 2 लाख रुपये

गर्दन के निशानों से हुआ बेल्ट का मिलान; फॉरेंसिक जांच में बड़ा खुलासा

अदालत के निर्देशों के कारण रिपोर्ट की सामग्री को अभी पूरी तरह गोपनीय रखा गया है, लेकिन फॉरेंसिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, धातु की अंगूठी (मेटल रिंग) से लैस उस नायलॉन जिम्नास्टिक बेल्ट के विश्लेषण से कई अहम जानकारियां मिली हैं. बेल्ट पर पाए गए जैविक साक्ष्य (स्किन टिश्यू) पूरी तरह से ट्विशा की गर्दन पर बने गहरे घावों और चोट के पैटर्न (लिगेचर मार्क्स) से मेल खाते हैं.

एम्स फॉरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने मीडिया से बात करते हुए बताया:

"मेडिकल बोर्ड ने लगभग एक महीने तक सभी संभावित कोणों से मामले के विवरण पर बहुत बारीकी से विचार-विमर्श किया. सभी उपलब्ध राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक औचित्य के साथ एक विस्तृत राय दी गई है. यह राय सीबीआई और न्यायपालिका के लिए सत्य और न्याय के हित में बिल्कुल स्पष्ट (क्रिस्टल-क्लियर) है."

यद्यपि यह रिपोर्ट अकेले यह तय नहीं करती कि ट्विशा की मृत्यु आत्महत्या थी, उसे ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया था या फिर उसकी हत्या की गई थी, लेकिन इसने इस बुनियादी सवाल का जवाब दे दिया है कि फंदे के रूप में उसी जिम्नास्टिक बेल्ट का उपयोग किया गया था.

पहले पोस्टमॉर्टम में बेल्ट का गायब होना था सबसे बड़ा विवाद

यह जिम्नास्टिक बेल्ट शुरुआत से ही इस पूरे मामले की सबसे बड़ी प्रशासनिक और कानूनी कंट्रोवर्सी (विवाद) का केंद्र रही है. ट्विशा के परिवार और उनके वकीलों ने मध्य प्रदेश पुलिस की शुरुआती जांच पर गंभीर सवाल उठाए थे कि भोपाल में हुए पहले पोस्टमॉर्टम के दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों के सामने इस बेल्ट को पेश क्यों नहीं किया गया था. मुख्य लिगेचर मटेरियल (फंदे की वस्तु) के न होने के कारण पहले डॉक्टर उसकी बनावट, मोटाई और मेटल रिंग का मिलान ट्विशा के गले की चोटों से वैज्ञानिक रूप से नहीं कर पाए थे.

उस समय भोपाल पुलिस ने दलील दी थी कि बेल्ट को फॉरेंसिक टीम ने जब्त तो कर लिया था, लेकिन वह समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकी थी. इस विसंगति और पुलिस की कथित लापरवाही के खिलाफ ट्विशा के परिवार ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद जबलपुर हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली एम्स के डॉक्टरों से दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने और जांच को सीबीआई को सौंपने का ऐतिहासिक आदेश दिया था.

क्या है पूरा मामला और आगे की राह?

ट्विशा शर्मा की लाश 12 मई को भोपाल स्थित उनके वैवाहिक घर में फंदे से लटकी मिली थी. यह घटना उनकी शादी के महज छह महीने के भीतर हुई थी. ट्विशा का विवाह अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुआ था, जो सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के बेटे हैं. ट्विशा के परिवार ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही उसे लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित और क्रूरता का शिकार बनाया जा रहा था, और उसकी मौत सामान्य आत्महत्या नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है.

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले में पुन: प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली थी. आरोपी पति समर्थ सिंह और उसकी मां गिरिबाला सिंह को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था और वर्तमान में वे न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। एम्स की इस 11 पन्नों की वैज्ञानिक रिपोर्ट के बाद, अब सीबीआई क्राइम सीन रिक्रिएशन (घटना स्थल के पुनर्निर्माण) और इन फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अपनी अंतिम चार्जशीट तैयार करेगी, जो अदालत में आरोपियों के भाग्य का फैसला करने में सबसे अहम कड़ी साबित होगी.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 12, 2026 02:57 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).