नई दिल्ली/भोपाल, 26 मई: पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के हाई-प्रोफाइल मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation) यानी सीबीआई (CBI) ने भोपाल पुलिस (Bhopal Police) से तफ्तीश का जिम्मा औपचारिक रूप से संभालते ही एक बेहद चौंकाने वाली प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है. स्थानीय पुलिस की शुरुआती जांच पर उठे गंभीर सवालों, सबूतों से छेड़छाड़ की आशंकाओं और बढ़ते जन-आक्रोश के बीच सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद केंद्रीय एजेंसी की 'स्पेशल क्राइम यूनिट' ने भोपाल पहुंचकर सारे दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं. सीबीआई द्वारा सोमवार को दोबारा दर्ज की गई एफआईआर के मुख्य अंशों के मुताबिक, मृतका ट्विशा की सास और पूर्व जिला जज गिरीबाला सिंह पर विदाई की रस्म के वक्त सीधे तौर पर नगद राशि ऐंठने के गंभीर आरोप लगे हैं. यह भी पढ़ें: Twisha Sharma Death Case: पूर्व जज की अग्रिम जमानत रद्द करने की याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई, 27 मई को होगी अगली बहस
विदाई के समय 2 लाख रुपये की जिद, बीएनएस की धाराओं में केस दर्ज
एनडीआरएफ और एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई की एफआईआर में यह खुलासा हुआ है कि 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को भोपाल के वकील समर्थ सिंह के साथ हुई थी. शादी के तुरंत बाद से ही उसे अतिरिक्त दहेज और अन्य मांगों को लेकर लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था.
एफआईआर में शामिल एक प्रमुख आरोप के मुताबिक, दिसंबर में विवाह के बाद जब 'विदाई' (Vidai Ceremony) की रस्म हो रही थी, ठीक उसी समय समर्थ की मां गिरीबाला सिंह ने लड़की के परिवार से तत्काल 2 लाख रुपये की मांग की थी. पूर्व जज की अड़ियल जिद और दबाव के आगे झुकते हुए ट्विशा के माता-पिता ने उसी वक्त इस राशि का भुगतान किया था. सीबीआई ने अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) (दहेज हत्या), 85 (क्रूरता) और 3(5) (साझा कर्मा/साजिश) के साथ-साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत दोनों नामजद आरोपियों—पति समर्थ सिंह और सास गिरीबाला सिंह—के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच की गति तेज कर दी है.
शव पर मिले चोटों के निशान, एम्स दिल्ली की टीम ने किया दूसरा पोस्टमार्टम
यह दुखद घटना बीती 12 मई की रात को भोपाल के पॉश इलाके कटारा हिल्स स्थित ट्विशा के ससुराल में घटित हुई थी, जहां उनका शव संदिग्ध हालत में फंदे से लटकता मिला था. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण "एंटीमॉर्टम हैंगिंग" (फांसी लगाने से दम घुटना) बताया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मौत के समय वे जीवित थीं.
हालांकि, इस रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर कई बाहरी चोटों के निशान (Injury Marks) भी दर्ज किए गए थे, जो किसी भारी वस्तु के प्रहार या आपसी हाथापाई के कारण उभरने की आशंका जताते हैं. घटना के बाद 10 दिनों तक फरार रहे मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह को पुलिस ने पिछले हफ्ते ही गिरफ्तार किया है. वहीं, स्थानीय डॉक्टरों द्वारा की गई पहली जांच में गंभीर कमियों और प्रशासनिक रसूख के प्रभाव को देखते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दिल्ली एम्स (AIIMS Delhi) के डॉक्टरों के 4 सदस्यीय विशेष पैनल से मृतका का दूसरा पोस्टमार्टम कराया था, जिसके बाद मौत के 12 दिनों बाद उनका अंतिम संस्कार हो सका था. यह भी पढ़ें: Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश; सीबीआई को सौंपी जांच, मीडिया ट्रायल और बयानबाजी पर रोक लगाने की अपील
सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, मीडिया और दोनों पक्षों को दी संयम की सलाह
पूर्व जिला न्यायाधीश गिरीबाला सिंह की पृष्ठभूमि के कारण इस संवेदनशील मामले में शुरुआती स्तर पर संस्थागत पक्षपात और पुलिस की ढिलाई के गंभीर आरोप लगे थे, जिस पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत इस बात को सुनिश्चित करेगी कि इस युवा महिला की मौत की जांच पूरी तरह निष्पक्ष, स्वतंत्र और किसी भी प्रभाव से मुक्त हो. अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों परिवारों को चेतावनी दी कि वे जांच के दौरान मीडिया के सामने गैर-जरूरी बयानबाजी करने और इंटरव्यू देने से पूरी तरह बचें, बल्कि अपने-अपने बयानों और साक्ष्यों को सीधे सीबीआई के समक्ष दर्ज कराएं ताकि चल रही तफ्तीश की गोपनीयता प्रभावित न हो.













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