TCS Performance Rating Change: टीसीएस में परफॉर्मेंस रेटिंग को लेकर बड़ा बदलाव, मैनेजर्स को 5 फीसदी कर्मचारियों को D Band में रखने के निर्देश; रिपोर्ट

भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा निर्यातक कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने अपने प्रबंधकों को कम से कम 5 फीसदी वैश्विक कार्यबल को सबसे निचले प्रदर्शन ग्रेड यानी 'बैंड डी' (Band D) में वर्गीकृत करने का निर्देश दिया है. इस आंतरिक फैसले के बाद कर्मचारियों में नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं.

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TCS Performance Rating Change:  टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में इस साल की अप्रेजल प्रक्रिया के दौरान एक नया विवाद सामने आया है. कंपनी ने अपने मैनेजमेंट और बिजनेस यूनिट प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे अपने कुल वैश्विक कार्यबल के कम से कम 5 प्रतिशत कर्मचारियों को सबसे निचले प्रदर्शन रेटिंग वर्ग यानी 'बैंड डी' (Band D) में डालें. कंपनी के आंतरिक ईमेल और दस्तावेजों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है. यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान अपने कुल कर्मचारियों की संख्या में 23,000 से अधिक की कटौती की है. इस नए फैसले से कर्मचारियों के बीच नौकरी जाने का डर फिर से गहरा गया है.

5 प्रतिशत कम प्रदर्शन का अनिवार्य लक्ष्य

आंतरिक पत्राचार के अनुसार, अप्रैल में टीसीएस के एक मानव संसाधन (HR) कार्यकारी द्वारा बिजनेस यूनिट प्रमुख को भेजे गए ईमेल में इस लक्ष्य का स्पष्ट उल्लेख था. ईमेल में लिखा गया था, "कृपया गंभीर समीक्षा करें और उन सहयोगियों की सूची साझा करें जिन्हें बैंड डी के लिए माना जा सकता है, जिससे तय 5% वितरण के लक्ष्य को पूरा किया जा सके." हालांकि, टीसीएस के बेल-कर्व मूल्यांकन मॉडल में 'बैंड डी' हमेशा से मौजूद रहा है, लेकिन कंपनी के सूत्रों का कहना है कि यह पहला मौका है जब एचआर विभाग ने इसके लिए एक निश्चित प्रतिशत का लक्ष्य तय किया है.  यह भी पढ़े: TCS Salary Hike: टीसीएस कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, कंपनी ने बढ़ाई 5 फीसदी सैलरी

इस निर्देश से पहले, बिजनेस यूनिट प्रमुखों ने अपनी मर्जी से लगभग 17,500 कर्मचारियों (कुल कार्यबल का लगभग 3 प्रतिशत) को कम प्रदर्शन करने वालों की श्रेणी में रखा था. अब 5 प्रतिशत के अनिवार्य लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया है. टीसीएस के वर्तमान कार्यबल (5,84,519 कर्मचारी) के हिसाब से यदि 5 प्रतिशत का लक्ष्य पूरा किया जाता है, तो 29,000 से अधिक कर्मचारी इस सबसे निचले पायदान पर आ जाएंगे.

'बैंड डी' में आने के गंभीर परिणाम

सबसे निचले रेटिंग बैंड में आने वाले कर्मचारियों को तुरंत प्रशासनिक और वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ेगा. 'बैंड डी' में आने वाले कर्मचारियों के वेरिएबल पे (Variable Pay) में भारी कटौती की जाएगी, उन्हें एक्टिव क्लाइंट प्रोजेक्ट्स से हटा दिया जाएगा और अनिवार्य रूप से 'परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान' (PIP) में डाल दिया जाएगा. यदि कोई कर्मचारी पीआईपी के कड़े मानकों को पूरा करने में विफल रहता है, तो उसकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं. यह कदम हाल ही में कंपनी के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों (A और A+ बैंड) को मिले शानदार इंक्रीमेंट के बिल्कुल विपरीत है.

आईटी क्षेत्र में छंटनी

प्रदर्शन मूल्यांकन की यह सख्त रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब टीसीएस ने हाल ही में अपने इतिहास का सबसे बड़ा वर्कफोर्स कंसोलिडेशन (कर्मचारियों के समायोजन का अभ्यास) पूरा किया है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-2026 के अंत में अपने कुल कर्मचारियों की संख्या 5,84,519 दर्ज की, जो पिछले वित्त वर्ष के 6,07,979 की तुलना में काफी कम है. इस गिरावट में लगभग 12,200 पदों की लक्षित कटौती भी शामिल है, जिसने मुख्य रूप से मध्य और वरिष्ठ प्रबंधन स्तरों को प्रभावित किया. अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि प्रभावित होने वाले कई लोग वे थे जो लंबे समय से कम परफॉर्मेंस रेटिंग पा रहे थे.

कंपनी का रणनीतिक रुख और पक्ष

वैश्विक आईटी सेवा प्रदाता कंपनियां इस समय अपने परिचालन खर्चों (Operating Costs) को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठा रही हैं ताकि वैश्विक स्तर पर कम होते आईटी खर्च और सौदों में होने वाली देरी के बीच अपने मार्जिन को सुरक्षित रख सकें. हालांकि, टीसीएस नेतृत्व ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि इंसानों की जगह ऑटोमेशन या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लाने के लिए यह छंटनी की जा रही है.

कर्मचारियों की कटौती पर बात करते हुए टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक के. कृतिवासन ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव तकनीकी कारणों से नहीं बल्कि संरचनात्मक हैं. कृतिवासन ने कहा, "यह इसलिए नहीं है कि एआई (AI) की वजह से 20% उत्पादकता बढ़ गई है." उन्होंने साफ किया कि नौकरी के ये समायोजन केवल कंपनी के नए और सुव्यवस्थित ऑपरेटिंग ढांचे के भीतर विशिष्ट भूमिकाओं को दोबारा व्यवस्थित करने की लॉजिस्टिक्स चुनौतियों से जुड़े हैं.

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