SIP Investment 2025: आजकल म्यूचुअल फंड में निवेश का सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) बन गया है. निवेशकों की बढ़ती रुचि और नियमित निवेश के कारण एसआईपी के ज़रिए जमा हो रही बड़ी राशि ने भारतीय शेयर बाजार को मज़बूती दी है. पिछले एक साल में वैश्विक अस्थिरता, ट्रंप टैरिफ और देशों के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय बाजार ने उतार-चढ़ाव में भी स्थिरता दिखाई है. इसमें खुदरा निवेशकों की बड़ी भूमिका रही है, जिन्होंने लॉन्ग टर्म और समझदारी भरी निवेश रणनीति अपनाई है. मौजूदा वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में एसआईपी निवेश में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है.
5000 रुपये की एसआईपी से बनेगा 4 लाख से ज्यादा का फंड
अगर आप हर महीने 5000 रुपये की एसआईपी शुरू करते हैं और हर साल इसमें 10% की वृद्धि (Step-up) करते हैं, तो इससे लंबी अवधि में अच्छा-खासा फंड बनाया जा सकता है. उदाहरण के लिए, 5000 रुपये प्रति माह की एसआईपी को 12% वार्षिक रिटर्न (CAGR) के साथ 5 साल तक जारी रखने पर आपकी कुल जमा राशि 3 लाख रुपये होगी और इस पर आपको 1,05,518 रुपये का मुनाफा मिलेगा, यानी कुल फंड 4,05,518 रुपये का तैयार होगा.
वहीं, अगर आप हर साल निवेश की राशि में 10% की वृद्धि करते हैं, तो 5 साल में कुल फंड 4,84,590 रुपये बन सकता है, जिसमें आपकी कुल निवेश राशि 3,66,306 रुपये होगी और आपको 1,18,284 रुपये का लाभ मिलेगा.
विशेषज्ञों के अनुसार, एसआईपी में नियमित निवेश और लंबी अवधि तक निवेश करने से कंपाउंडिंग और रुपी कॉस्ट एवरेजिंग (Rupee Cost Averaging) का पूरा लाभ मिलता है, जिससे निवेशक को बेहतर रिटर्न हासिल होता है.
अगस्त 2025 में एसआईपी और म्यूचुअल फंड निवेश का आंकड़ा
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के अनुसार, अगस्त 2025 में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में कुल 33,430 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो जुलाई की तुलना में 22% कम रहा है. इसका मुख्य कारण नई फंड पेशकशों (NFOs) में कमी बताई जा रही है. इसी दौरान एसआईपी इनफ्लो 28,265 करोड़ रुपये रहा, जिसमें सबसे अधिक फ्लेक्सी कैप (Flexi Cap) फंड्स को 7,679 करोड़ रुपये का निवेश मिला है. वहीं, ओपन-एंडेड डेब्ट म्यूचुअल फंड्स (Open-Ended Debt Mutual Funds) से 7,980 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई है.
विशेषज्ञों का कहना है, कि नियमित रूप से एसआईपी में निवेश करना और इसे लंबी अवधि तक जारी रखना निवेशकों के लिए बेहद फायदेमंद होता है. ऐसा करने से उन्हें कंपाउंडिंग का पूरा लाभ मिलता है, और रुपी कॉस्ट एवरेजिंग की मदद से बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेश सुरक्षित रहता है. इस रणनीति से निवेशकों को स्थिर और बेहतर रिटर्न प्राप्त करने में मदद मिलती है.
हालांकि म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश हमेशा जोखिम के अधीन होता है, लेकिन सही जानकारी और रणनीति अपनाने से निवेशकों को फायदा मिल सकता है.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने वित्तीय निर्णय लेने से पहले स्वतंत्र पेशेवर सलाह लें. लेखक और प्रकाशक इस जानकारी के आधार पर किए गए किसी भी निर्णय या कार्य के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे. सभी निवेश जोखिमों के अधीन होते हैं और पाठकों को सावधानी से विचार करने की सलाह दी जाती है.












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