कैंसर का खतरा! बंगाल में हर दूसरा पुरुष और हर दसवीं महिला करती है धूम्रपान, कोलकाता में 56% लोग पीते है सिगरेट
बंगाल में हर दूसरा पुरुष और हर दसवीं महिला धूम्रपान करती है, जिससे फेफड़ों के कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. कोलकाता में यह समस्या और गंभीर है, जहां 56.6% लोग तंबाकू का सेवन कर रहे हैं. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर युवाओं को समय रहते नहीं रोका गया, तो यह एक बड़ी स्वास्थ्य आपदा बन सकती है.
कोलकाता: हाल ही में आई नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने रखी है. सर्वे के अनुसार बंगाल में हर दो में से एक पुरुष और हर दस में से एक महिला धूम्रपान करती है. यह आंकड़ा देश के अन्य राज्यों की तुलना में कहीं ज्यादा है, जिससे बंगाल की आबादी फेफड़ों के कैंसर के खतरे की तरफ तेजी से बढ़ रही है.
कोलकाता की स्थिति और भी चिंताजनक
सर्वे की मानें तो कोलकाता में 56.6% लोग धूम्रपान करते हैं, जिसमें 82% पुरुष और 23.5% महिलाएं शामिल हैं. यह आंकड़ा देश के सभी महानगरों में सबसे अधिक है. सिर्फ सिगरेट या बीड़ी ही नहीं, तंबाकू के अन्य रूपों का इस्तेमाल भी पिछले एक दशक में बंगाल और कोलकाता में बढ़ा है.
किशोरावस्था में शुरू हो रही है लत
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सुभीर गांगुली ने चेतावनी दी कि 14 से 18 साल की उम्र में ही ज़्यादातर बच्चे धूम्रपान की आदत पकड़ लेते हैं. ऐसे में जरूरत है कि स्कूल-कॉलेज के स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि युवा पीढ़ी को इसकी भयानक सच्चाई से रूबरू कराया जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि नाबालिगों को तंबाकू तक पहुंचने से रोकना बेहद जरूरी है.
ग्रामीण छात्रों में ज्यादा है तंबाकू की लत
बंगाल में हाई स्कूल के छात्रों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों के लड़कों में तंबाकू सेवन की दर शहरी छात्रों की तुलना में अधिक है. यह आंकड़ा 36.9% से 52.4% के बीच है.
फेफड़ों का कैंसर: खामोश कातिल
बंगाल ऑन्कोलॉजी का मानना है कि पूरब भारत में फेफड़ों के कैंसर के मरीजों की संख्या करीब 12 लाख हो सकती है, लेकिन कई मामलों में लक्षण स्पष्ट न होने की वजह से यह बीमारी देर से पकड़ में आती है. डॉक्टरों के अनुसार, असल संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई केस रिपोर्ट ही नहीं होते.
#Kolkata | More than one in two (56.6%) residents are smokers, the survey claims, adding that 82% men and 23.5% women indulge in the habit, the highest among all metros in the country.
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— The Times Of India (@timesofindia) May 31, 2025
डॉ. सौम्य सेनगुप्ता, पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़े के रोग विशेषज्ञ), बताते हैं कि लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ, बुखार या अचानक वजन कम होना ऐसे लक्षण हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल धूम्रपान ही नहीं, पर्यावरणीय धुआं और चूल्हे का धुआं भी कैंसर का बड़ा कारण है.
देर से इलाज, कम जीवन बचाव
IPGMER के आंकड़ों के मुताबिक, 55% मरीजों का कैंसर तीसरे या चौथे स्टेज में पकड़ में आता है, और ऐसे मामलों में 5 साल से ज्यादा जीवित रहने की संभावना बहुत कम होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि जनता ही नहीं, कई बार डॉक्टर भी शुरुआती लक्षणों को पहचान नहीं पाते, जिससे समय पर इलाज नहीं हो पाता.
तंबाकू छोड़ने के लिए चाहिए ठोस नीति
डॉ. अर्नब बेरा, मेडिका सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट, कहते हैं कि भारत में करीब 26.7 करोड़ वयस्क तंबाकू का सेवन करते हैं, ऐसे में तंबाकू छोड़ने की नीति को नया रूप देने की जरूरत है. उनका सुझाव है कि जापान, स्वीडन, यूके और अमेरिका जैसे देशों से प्रेरणा लेकर भारत में भी वैकल्पिक उपाय जैसे HTP (हीट-नॉट-बर्न प्रोडक्ट्स) को अपनाया जा सकता है, जिससे धूम्रपान छोड़ने में मदद मिल सके.
बंगाल में बढ़ता धूम्रपान और उससे जुड़ी बीमारियां एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनती जा रही हैं. ज़रूरत है कि सरकार, स्कूल, माता-पिता और समाज मिलकर युवाओं को इस बुरी लत से दूर रखने की पहल करें. समय रहते चेत जाना ही असली समाधान है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 01, 2025 08:56 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

