वोट चोरी कहना संविधान का अपमान: चुनाव आयोग
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारतीय चुनाव आयोग ने नेता विपक्ष राहुल गांधी के "वोट चोरी" के आरोपों पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जवाब दिया.कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वोटर फ्रॉड संबंधी आरोपों पर चुनाव आयोग का जवाब आया है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आयोग ने कहा कि उसके लिए ना कोई पक्ष है, ना विपक्ष, सब समकक्ष हैं.

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि सभी दल मतदाता सूची में सुधार की मांग करते रहे हैं और इसी क्रम में एसआईआर की शुरुआत बिहार से की गई. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि उन्हें जो मतदाता सूची का प्रारूप दिया गया है, अगर उसमें त्रुटियां हों तो उसकी जानकारी दें. उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि आयोग के दरवाजे सबके लिए हमेशा समान रूप से खुले हैं.

"चुनाव आयोग की साख पर कोई प्रश्नचिह्न"

राहुल गांधी और विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि ना तो चुनाव आयोग की साख पर कोई प्रश्नचिह्न खड़ा हो सकता है, ना मतदाताओं की साख पर. उन्होंने आरोप भी लगाया कि वोट चोरी जैसे शब्द इस्तेमाल करके जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है.

ज्ञानेश कुमार उन्होंने कहा, "अगर समय रहते मतदाता सूचियों में त्रुटियां साझा ना की जाएं, मतदाता द्वारा अपना प्रत्याशी चुनने के 45 दिनों के भीतर माननीय उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर ना की जाए, और फिर वोट चोरी जैसे गलत शब्दों का इस्तेमाल करके जनता को गुमराह करने का असफल प्रयास किया जाए, तो यह भारत के संविधान का अपमान नहीं तो और क्या है?" मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह सवाल भी उठाया कि इतनी पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया में वोट चोरी कैसे हो सकती है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में वोटर फ्रॉड के आरोप लगाए थे. अब इसी का जवाब देते हुए आयोग ने कहा कि वह झूठे आरोपों से नहीं डरता है और सभी मतदाताओं के साथ चट्टान की तरह खड़ा है.

आयोग ने यह आपत्ति भी उठाई कि वोटर फ्रॉड के आरोपों के अंतर्गत जिन मतदाताओं की तस्वीर साझा की गई थी, उनके वोटर आईकार्ड मीडिया से साझा किए गए थे, उनकी अनुमति नहीं ली गई थी. इस संदर्भ में उन्होंने कहा, "क्या अपनी माताओं, बहुओं, बेटियों सहित किसी भी मतदाता की सीसीटीवी विडियो चुनाव आयोग को साझा करनी चाहिए क्या?"