Ram Mandir Bhumi Pujan: राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से लेकर भूमिपूजन तक, पढ़े पूरी टाइमलाइन
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अयोध्या (Ayodhya) में 5 अगस्त को भगवान श्री राम के भव्य मंदिर (Ram Temple) के निर्माण का कार्य भूमि पूजन के बाद शुरू हो जाएगा. इस कार्यक्रम की पूरी तैयारी कर ली गई है. राम मंदिर का निर्माण उसी जगह पर हो रहा है जहां पर कभी बाबरी मस्जिद हुआ करता करता था. हिंदुओं का कहना था कि अयोध्या में यह वही जगह है जहां पर भगवान श्री राम का जन्म हुआ था. अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों के बीच सबसे ज्यादा बहस विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर हुई. अयोध्या जमीन विवाद
सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में सबसे लंबी सुनवाई वाला दूसरा मामला था. लेकिन इस मामलें पर सुप्रीम कोर्ट में पिछले साल ऐतिहासिक फैसला सुनाया था.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान का हक है. इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया. सर्वसम्मति से चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की विशेष बेंच ने यह फैसला सुनाया था. वहीं सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मुस्लिम पक्षकार भी अदलात के इस फैसले से सहमत हुई और सबसे बड़े विवाद का अंत हुआ. अब उसी जमीन पर राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो रहा है.
जानें शुरू से लेकर अंत तक की पूरी कहानी:-
साल 1528: मुगल बादशाह बाबर के कमांडर मीर बकी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया.
साल 1885: महंत रघुबीर दास ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर कर विवादित रामजन्मभूमि - बाबरी मस्जिद ढांचे के बाहर टेंट खड़े करने की अनुमति मांगी. लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी.
साल 1949: विवादित ढांचे के बाहर केंद्रीय गुंबद के अंदर रामलला की मूर्तियां लगाई गईं.
साल 1950: रामलला की मूर्तियों की पूजा का अधिकार हासिल करने के लिए गोपाल सिमला विशारद ने फैजाबाद जिला अदालत में याचिका दायर की.
साल 1950 : परमहंस रामचंद्र दास ने पूजा जारी रखने और मूर्तियां रखने के लिए याचिका दायर की.
साल 1959: निर्मोही अखाड़ा ने जमीन पर अधिकार दिए जाने के लिए याचिका दायर की.
साल 1981: उत्तरप्रदेश सुन्नी केंद्रीय वक्फ बोर्ड ने स्थल पर अधिकार के लिए याचिका दायर की.
एक फरवरी 1986: स्थानीय अदालत ने सरकार को हिंदू श्रद्धालुओं के लिए स्थान खोलने का आदेश दिया.
14 अगस्त 1986: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित ढांचे के लिए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया.
6 दिसम्बर 1992: बाबरी मस्जिद ढांचे को ढहाया गया.
तीन अप्रैल 1993 : विवादित स्थल में जमीन अधिग्रहण के लिए केंद्र ने ‘अयोध्या में निश्चित क्षेत्र अधिग्रहण कानून’ पारित किया. अधिनियम के विभिन्न पहलुओं को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कई रिट याचिकाएं दायर की गईं. इनमें इस्माइल फारूकी की याचिका भी शामिल. उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 139ए के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रिट याचिकाओं को स्थानांतरित कर दिया जो उच्च न्यायालय में लंबित थीं.
24 अक्टूबर 1994 : उच्चतम न्यायालय ने ऐतिहासिक इस्माइल फारूकी मामले में कहा कि मस्जिद इस्लाम से जुड़ी हुई नहीं है.
अप्रैल 2002 : उच्च न्यायालय में विवादित स्थल के मालिकाना हक को लेकर सुनवाई शुरू.
13 मार्च 2003 : उच्चतम न्यायालय ने असलम उर्फ भूरे मामले में कहा, अधिग्रहीत स्थल पर किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं है.
30 सितम्बर 2010 : उच्चतम न्यायालय ने 2 : 1 बहुमत से विवादित क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया.
9 मई 2011 : उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या जमीन विवाद में उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाई.
21 मार्च 2017 : सीजेआई जे एस खेहर ने संबंधित पक्षों के बीच अदालत के बाहर समाधान का सुझाव दिया. सात अगस्त : उच्चतम न्यायालय ने तीन सदस्यीय पीठ का गठन किया जो 1994 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.
आठ फरवरी 2018 : सिविल याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई शुरू की. 20 जुलाई : उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा. 27 सितम्बर : उच्चतम न्यायालय ने मामले को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष भेजने से इंकार किया. मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर को तीन सदस्यीय नयी पीठ द्वारा किए जाने की बात कही.
29 अक्टूबर 2018: उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई उचित पीठ के समक्ष जनवरी के पहले हफ्ते में तय की जो सुनवाई के समय पर निर्णय करेगी. 24 दिसंबर : उच्चतम न्यायालय ने सभी मामलों पर चार जनवरी 2019 को सुनवाई करने का फैसला किया.
चार जनवरी 2019 : उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मालिकाना हक मामले में सुनवाई की तारीख तय करने के लिए उसके द्वारा गठित उपयुक्त पीठ दस जनवरी को फैसला सुनाएगी.
आठ जनवरी : उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन किया जिसकी अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई करेंगे और इसमें न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एन वी रमन्ना, न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ शामिल होंगे.
10 जनवरी : न्यायमूर्ति यू यू ललित ने मामले से खुद को अलग किया जिसके बाद उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई 29 जनवरी को नयी पीठ के समक्ष तय की.
25 जनवरी: उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ का पुनर्गठन किया. नयी पीठ में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर शामिल थे.
29 जनवरी : केंद्र ने विवादित स्थल के आसपास 67 एकड़ अधिग्रहीत भूमि मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति मांगने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया.
26 फरवरी: उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता का सुझाव दिया और फैसले के लिए पांच मार्च की तारीख तय की जिसमें मामले को अदालत की तरफ से नियुक्त मध्यस्थ के पास भेजा जाए अथवा नहीं इस पर फैसला लिया जाएगा.
आठ मार्च : उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता के लिए विवाद को एक समिति के पास भेज दिया जिसके अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला बनाए गए.
नौ अप्रैल: निर्मोही अखाड़े ने अयोध्या स्थल के आसपास की अधिग्रहीत जमीन को मालिकों को लौटाने की केन्द्र की याचिका का उच्चतम न्यायालय में विरोध किया.
10 मई: मध्यस्थता प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने 15 अगस्त तक समय बढ़ाई.
11 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने “मध्यस्थता की प्रगति” पर रिपोर्ट मांगी.
18 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति देते हुए एक अगस्त तक परिणाम रिपोर्ट देने के लिये कहा.
एक अगस्त: मध्यस्थता की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत को दी गई.
दो अगस्त : उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता नाकाम होने पर छह अगस्त से रोजाना सुनवाई का फैसला किया.
छह अगस्त: उच्चतम न्यायालय ने रोजाना के आधार पर भूमि विवाद पर सुनवाई शुरू की.
चार अक्टूबर: अदालत ने कहा कि 17 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी कर 17 नवंबर तक फैसला सुनाया जाएगा. उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को सुरक्षा प्रदान करने के लिये कहा.
16 अक्टूबर: उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा.
9 नवंबर : उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन राम लला को दी, जमीन का कब्जा केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगा. सुप्रीम कोर्ट उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को मुस्लिमों को मस्जिद बनाने के लिए एक मुनासिब स्थान पर पांच एकड़ भूमि आवंटित करने का भी निर्देश दिया था.
अयोध्या में भूमि पूजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई बड़े नेता और साधु संत आने वाले हैं. अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमिपूजन बुधवार को दोपहर 12.30 बजे शुरू होगा. इस दौरान पीएम मोदी शिला पूजन, भूमि पूजन और कर्म शिला पूजन करेंगे. उसके बाद मुख्य पूजा दोपहर 12.44 और 12.45 बजे के बीच 32-सेकंड के दौरान अभिजीत मुहूर्त में आयोजित की जाएगी. कहते हैं कि इसी मुहूर्त में भगवान राम का जन्म हुआ था. (भाषा इनपुट)
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 04, 2020 08:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

