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नितिन नवीन को बीजेपी ने क्यों बनाया कार्यकारी अध्यक्ष? जानें पूर्णकालिक अध्यक्ष न बनाने की क्या है वजह

बीजेपी ने बिहार के सड़क निर्माण मंत्री नितिन नवीन (Nitin Nabin) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है. पार्टी मुख्यालय में सोमवार को उन्होंने पदभार संभाला.

नितिन नवीन को बीजेपी ने क्यों बनाया कार्यकारी अध्यक्ष? जानें पूर्णकालिक अध्यक्ष न बनाने की क्या है वजह
Nitin Nabin BJP Working President | PTI

नई दिल्ली: बीजेपी ने बिहार के सड़क निर्माण मंत्री नितिन नवीन (Nitin Nabin) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है. पार्टी मुख्यालय में सोमवार को उन्होंने पदभार संभाला, लेकिन इस फैसले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया जब जेपी नड्डा का कार्यकाल लगभग खत्म हो चुका है, तो फिर बीजेपी ने पूर्णकालिक अध्यक्ष की जगह कार्यकारी अध्यक्ष ही क्यों चुना? दरअसल, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद चुनाव के जरिए तय होता है, न कि महज नोमिनेशन से.

जेपी नड्डा का कार्यकाल पहले ही लोकसभा चुनावों के चलते जून 2024 तक बढ़ाया जा चुका था. पार्टी नेतृत्व चुनावी माहौल में किसी तरह का प्रयोग नहीं करना चाहता था, इसलिए अध्यक्ष पद का चुनाव टाल दिया गया. इसके अलावा, जेपी नड्डा इस समय केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भी हैं. बीजेपी आमतौर पर एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत का पालन करती है, लेकिन चुनावी मजबूरियों के चलते यह अस्थायी व्यवस्था बनी रही.

नितिन नवीन को ही कार्यकारी अध्यक्ष क्यों बनाया गया?

बीजेपी सूत्रों के अनुसार, पार्टी जनवरी के मध्य में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव करा सकती है. तब तक संगठनात्मक कामकाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए नितिन नवीन को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यदि जनवरी में होने वाले चुनाव में नितिन नवीन जीतते हैं, तो वही पार्टी के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं.

दिलचस्प बात यह है कि यह कोई नई परंपरा नहीं है. जेपी नड्डा खुद भी जून 2019 में पहले कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए थे और जनवरी 2020 में सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे.

खरमास भी बना चुनाव टलने की वजह

खबरों के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को टालने की एक वजह खरमास भी है. हिंदू पंचांग के अनुसार, खरमास के दौरान शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है. इस साल खरमास मंगलवार से शुरू होकर 14 जनवरी (मकर संक्रांति) तक रहेगा. इसी वजह से पार्टी ने फिलहाल चुनाव कराने की बजाय कार्यकारी अध्यक्ष की घोषणा की.

बीजेपी के नियमों में पहले भी हो चुके हैं बदलाव

बीजेपी ने 2003 में अपने संविधान में बदलाव कर लगातार दो कार्यकाल की सीमा तय की थी. बाद में 2012 में RSS के दबाव और संगठनात्मक निरंतरता को ध्यान में रखते हुए नियमों में फिर संशोधन किया गया, जिससे कोई भी सक्रिय सदस्य लगातार दो तीन-वर्षीय कार्यकाल तक अध्यक्ष रह सकता है. इसी बदलाव के बाद अमित शाह 2014 से 2020 तक पार्टी अध्यक्ष रहे.

कौन हैं नितिन नवीन?

नितिन नवीन बिहार की राजधानी पटना के बैंकिपुर से पांच बार विधायक रह चुके हैं और 50 साल की उम्र में इस पद पर पहुंचने वाले सबसे युवा नेताओं में से एक माने जा रहे हैं. वह लंबे समय तक बीजेपी की युवा इकाई, भारतीय जनता युवा मोर्चा, से जुड़े रहे हैं और संगठन पर मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं.

वह दिवंगत बीजेपी नेता नवीन किशोर सिन्हा के पुत्र हैं और कायस्थ समाज से आते हैं. उनकी नियुक्ति को पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव और संगठन को नई ऊर्जा देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.

फिलहाल नितिन नवीन की नियुक्ति एक अंतरिम व्यवस्था है. सबकी नजरें अब जनवरी में होने वाले संभावित चुनाव पर टिकी हैं और संभव है कि पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी नितिन नवीन के ही हाथों में जाए.

(The above story first appeared on LatestLY on Dec 15, 2025 07:56 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).