West Bengal Assembly Election 2021: बंगाल में गठबंधन के जरिये कांग्रेस-लेफ्ट लड़ेंगे अपने-अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई
सीताराम येचुरी और राहुल गांधी ( फोटो क्रेडिट- Facebook)

West Bengal Assembly Election 2021: पश्चिम बंगाल में आगामी समय में होने वाले विधानसभा के चुनाव के लिए तमाम पार्टियां अपनी रणनीति बनाने में जुट गई है. तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी, कांग्रेस, वाम दल सभी जीत के ख्वाबों को हकीकत में बुनने की तैयारी में हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में इस बार का चुनाव सीएम ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर आई है. टीएमसी (TMC) का सीधा मुकाबला बीजेपी (BJP) से है. बीजेपी ने जीत के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. लेकिन कांग्रेस और वाम दलों के लिए यह चुनाव भी उनके वर्चस्व की लड़ाई बन गई है. क्योंकि एक दौर था जब बंगाल में एक दौर था लेफ्ट की सरकार हुआ करती थी. लेकिन पिछले दस साल से उन्हें वापसी का मौका नहीं मिला. वहीं, लेफ्ट के बाद किसी तूती बोलती थी तो वो कांग्रेस थी. एक दौर कांग्रेस ने बंगाल में एक छत्र राज था. लेकिन एक बार जब सत्ता की चाभी हाथ से गई तो आज तक नहीं मिली.

कांग्रेस और लेफ्ट अब अपने बंगाल की धरती पर जगह तलाश रही हैं. वैसे देखा जाये तो अगर कांग्रेस लेफ्ट गठबंधन से विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की मुश्किल बढ़ा सकती. क्योंकि, 2016 के विधानसभा चुनाव में लड़ा था. उस समय कांग्रेस विधानसभा में दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. तब कांग्रेस ने 44 सीटो पर जीत दर्ज की थी. जबकि लेफ्ट को सीपीएम को 26 सीटें मिली थी. अब दोनों एक बार फिर से मैदान में उतरते हैं तो इससे ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ सकती है. West Bengal Assembly Election 2021: प्रशांत किशोर का चैलेंज, दहाई अंकों से ज्यादा आई भाजपा की सीटें तो छोड़ दूंगा ट्विटर.

फिलहाल अभी तक यह साफ नहीं पाया है कि कांग्रेस और लेफ्ट के बीच सीटों का बंटवारा किस आधार पर होगा. लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस सीट साझा समझौते में उचित हिस्सेदारी चाहती है. अगले साल 294 सदस्यीय बंगाल विधानसभा का चुनाव है. तृणमूल कांग्रेस के पास जहां सत्ता बरकरार रखने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस को भी राज्य में अपनी जमीन बरकरार रखनी है. कांग्रेस इस बात को लेकर दुविधा में थी कि वह वाम दलों के साथ जाए या तृणमूल के साथ चुने.