VIDEO: अंबरनाथ और अकोट में कांग्रेस और AIMIM के साथ BJP के गठबंधन पर CM फडणवीस भड़के, तुरंत तोड़ने का आदेश
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अंबरनाथ में कांग्रेस और अकोट में AIMIM के साथ स्थानीय बीजेपी इकाइयों द्वारा किए गए गठबंधन पर कड़ी नाराजगी जताई है. फडणवीस ने इन गठबंधनों को अनुशासनहीनता बताते हुए तुरंत तोड़ने के आदेश दिए हैं.
मुंबई, 7 जनवरी 2026: महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब अंबरनाथ और अकोट नगर परिषद चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने वैचारिक प्रतिद्वंद्वियों-कांग्रेस और AIMIM-के साथ हाथ मिला लिया- इस अप्रत्याशित कदम पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्थानीय इकाइयों को इन अप्राकृतिक गठबंधनों को तुरंत खत्म करने का निर्देश दिया है-मुख्यमंत्री ने इसे पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करार देते हुए जांच के आदेश भी दिए हैं.
फडणवीस का एक्शन
मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ किया कि प्रदेश नेतृत्व ने ऐसे किसी भी गठबंधन की अनुमति नहीं दी थी.उन्होंने कहा कांग्रेस और AIMIM के साथ गठबंधन किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है. यह पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है। मैंने इन गठबंधनों को तुरंत तोड़ने के निर्देश दिए हैं और जिम्मेदार स्थानीय नेताओं के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. यह भी पढ़े: BMC चुनाव के 227 सीटों के लिए 2,516 उम्मीदवारों ने दाखिल किया पर्चा, 11,392 फॉर्म वितरित किए गए थे
गठबंधन पर CM फडणवीस भड़के
अंबरनाथ में बीजेपी का कांग्रेस के साथ गठबंधन
अंबरनाथ नगर परिषद की 60 सीटों में से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जो बहुमत से केवल 4 सीटें दूर थी. शिंदे सेना को सत्ता से बाहर रखने के लिए स्थानीय बीजेपी (14 सीटें) ने कांग्रेस (12 सीटें) और अजीत पवार की एनसीपी (4 सीटें) के साथ मिलकर 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' बना ली. इस गठबंधन के चलते बीजेपी की तेजश्री करंजुले पाटिल नगर परिषद की अध्यक्ष निर्वाचित हुईं, जिससे महायुति के दो मुख्य सहयोगियों (बीजेपी और शिंदे सेना) के बीच दरार खुलकर सामने आ गई.
बीजेपी-AIMIM का साथ आना बना चर्चा का विषय
अकोला जिले के अकोट नगर परिषद में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यहाँ बीजेपी ने 'अकोट विकास मंच' के बैनर तले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के पार्षदों और अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन कर सत्ता हासिल की। यहाँ बीजेपी की माया धुले अध्यक्ष चुनी गईं। इस गठबंधन ने 'पार्टी विद डिफरेंस' के दावे पर सवाल खड़े कर दिए, क्योंकि बीजेपी राष्ट्रीय स्तर पर AIMIM की विचारधारा का कड़ा विरोध करती रही है.
विपक्ष का तीखा हमला
इस गठबंधन के बाद विपक्षी खेमे, विशेषकर शिवसेना (UBT) ने बीजेपी को आड़े हाथों लिया। सांसद संजय राउत ने इसे बीजेपी का "दोगलापन" बताया। उन्होंने कहा, "एक तरफ पीएम मोदी 'कांग्रेस मुक्त भारत' का नारा देते हैं और दूसरी तरफ सत्ता के लिए अंबरनाथ में कांग्रेस और अकोट में AIMIM से हाथ मिलाते हैं. यह पूरी तरह से अवसरवादिता है।" राउत ने अजीत पवार के साथ गठबंधन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जो वीर सावरकर की विचारधारा को नहीं मानते, बीजेपी उनके साथ सत्ता भोग रही है.
राजनीतिक प्रभाव और पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र में यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों का दौर चल रहा है। कांग्रेस ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अंबरनाथ के अपने सभी 12 पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर वर्चस्व की लड़ाई ने राज्य स्तरीय गठबंधन (महायुति) के समीकरणों को उलझा दिया है।