शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद गणपत सावंत ने वक्फ संशोधन बिल पर सरकार को घेरते हुए तीखे सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पहले "सौगात-ए-मोदी" चला, अब "सौगात-ए-बिल" चल रहा है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार अचानक मुसलमानों के लिए इतनी चिंतित क्यों हो गई. उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग देश की आजादी के लिए कुछ भी नहीं किए, वे आज सरकार चला रहे हैं. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मुसलमानों ने भी आजादी के लिए कुर्बानियां दी थीं और अंडमान की जेलों में यातनाएं सही थीं.
सावंत ने कहा कि इस संशोधन से वक्फ बोर्ड में मुस्लिम अल्पसंख्यक हो जाएंगे और पहले से मौजूद महिला आरक्षण के बावजूद सरकार गैर-मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में शामिल करना चाहती है. उन्होंने आशंका जताई कि सरकार इस कदम के जरिए हिंदू मंदिरों के बोर्ड में भी गैर-हिंदुओं को शामिल करने का रास्ता खोल सकती है. उन्होंने चेतावनी दी कि शिवसेना इसका कड़ा विरोध करेगी. उन्होंने सवाल किया कि अगर आज वक्फ बोर्ड में गैर-मुसलमानों को जोड़ा जा रहा है, तो क्या कल सिखों के गुरुद्वारों और ईसाइयों के चर्चों में भी ऐसा किया जाएगा?
उन्होंने अनुच्छेद 370 के समर्थन में शिवसेना की भूमिका का जिक्र करते हुए सरकार से पूछा कि कश्मीर में कितने हिंदू वापस बसाए गए. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि हिंदू देवस्थान की जमीनें बेची जा रही हैं, तो क्या सरकार उनके लिए भी कोई कानून लाने जा रही है? सावंत ने भाजपा के 2009 और 2014 के चुनावी घोषणापत्र की याद दिलाते हुए कहा कि पार्टी ने मुस्लिम धर्मगुरुओं से बातचीत कर वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा हटाने की बात कही थी, लेकिन अब वह खुद वक्फ की जमीनों पर नियंत्रण करना चाहती है.
उन्होंने सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि यह बिल लाने का असली मकसद कुछ खास उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि सरकार के होंठों पर सच्चाई नहीं है और उसने "बंटेंगे तो कटेंगे" का नारा दिया था, लेकिन अब खुद देश को बांट रही है. उन्होंने कहा कि सरकार के दिल में नफरत भरी हुई है, जिसे उसे बाहर निकाल देना चाहिए.