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बदलते दौर की नई कूटनीति! एस जयशंकर ने अफगान विदेश मंत्री से की बात, पहलगाम हमले की निंदा पर हुई चर्चा

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहली बार तालिबान सरकार के विदेश मंत्री से आधिकारिक बातचीत की. इसमें भारत-अफगान मित्रता, विकास सहयोग और पहलगाम आतंकी हमले की निंदा जैसे मुद्दे उठाए गए. यह संवाद भारत की रणनीतिक कूटनीति का हिस्सा है, जो अफगान जनता से जुड़ाव और क्षेत्रीय स्थिरता पर केंद्रित है.

बदलते दौर की नई कूटनीति! एस जयशंकर ने अफगान विदेश मंत्री से की बात, पहलगाम हमले की निंदा पर हुई चर्चा

India-Taliban Diplomatic Talks: भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते हमेशा से गहरे और ऐतिहासिक रहे हैं. लेकिन तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता में आने के बाद भारत ने अभी तक उसे औपचारिक मान्यता नहीं दी है. इसके बावजूद हाल ही में एक बड़ी कूटनीतिक पहल देखने को मिली है. भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पहली बार तालिबान सरकार के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी से आधिकारिक बातचीत की है. यह बातचीत कई मायनों में अहम मानी जा रही है.

बातचीत में क्या-क्या हुआ? 

इस बातचीत में तीन अहम मुद्दों पर चर्चा हुई:

भारत-अफगान परंपरागत मित्रता – जयशंकर ने अफगान जनता के साथ भारत की पुरानी दोस्ती को दोहराया और यह भरोसा दिलाया कि भारत अफगान लोगों के विकास में सहयोग करता रहेगा.

विकास सहयोग – भारत ने अफगानिस्तान के विकास में अपनी भूमिका को दोहराया. शिक्षा, स्वास्थ्य, और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत पहले भी मदद करता रहा है और भविष्य में भी इसके लिए तैयार है.

आतंकी हमलों की निंदा – अफगान विदेश मंत्री ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले की निंदा की, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी. जयशंकर ने इस संवेदनशील मुद्दे पर उनके रुख की सराहना की.

क्यों है यह बातचीत खास?

यह पहली बार है जब भारत और तालिबान सरकार के बीच राजनीतिक स्तर पर औपचारिक बातचीत हुई है.

भारत अब भी तालिबान को आधिकारिक मान्यता नहीं देता, फिर भी यह संवाद दर्शाता है कि भारत व्यावहारिक कूटनीति के रास्ते पर चल रहा है.

इससे पहले जनवरी 2025 में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दुबई में मुत्ताकी से मुलाकात की थी, लेकिन वह बातचीत औपचारिक नहीं थी.

क्या है इसका मतलब?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पहल भारत की रणनीतिक सोच को दर्शाती है. भारत समझता है कि अफगानिस्तान की जनता को अकेला छोड़ना ठीक नहीं होगा. तालिबान से सीधा संपर्क बनाकर भारत अफगान समाज में अपनी सकारात्मक भूमिका बनाए रखना चाहता है.

यह कदम न सिर्फ अफगान जनता के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है.

भारत और तालिबान के बीच यह संवाद एक नई शुरुआत है. भले ही अभी मान्यता नहीं दी गई हो, लेकिन यह बातचीत इस ओर संकेत करती है कि भारत भविष्य की चुनौतियों और जरूरतों को ध्यान में रखकर कदम बढ़ा रहा है – शांतिपूर्ण सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और अफगानिस्तान की आम जनता की भलाई को प्राथमिकता देते हुए.

(The above story first appeared on LatestLY on May 16, 2025 08:22 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).