एजेंसी न्यूज

Hemant Soren: झारखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री से लेकर राजनीतिक चुनौतियों से निपटने का सफर

विधायक के तौर पर अयोग्य ठहराए जाने की आशंका का सामना कर रहे झारखंड के मुख्यमंत्री अब तक के राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देख चुके हैं।

Hemant Soren: झारखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री से लेकर राजनीतिक चुनौतियों से निपटने का सफर
Hemant Soren

रांची, 27 अगस्त: विधायक के तौर पर अयोग्य ठहराए जाने की आशंका का सामना कर रहे झारखंड के मुख्यमंत्री अब तक के राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देख चुके हैं. हेमंत सोरेन अपने पिता एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रमुख शिबू सोरेन की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी के तौर पर उनकी पहली पसंद नहीं थे. हालांकि, हेमंत सोरेन को उनके बड़े भाई दुर्गा सोरेन की 2009 में हुई मौत के बाद राजनीति में उतारा गया. Jharkhand में सियासी संकट के बीच पिकनिक मना रहे UPA विधायक, डैम में बोटिंग का उठाया लुत्फ

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को दावा किया था कि ‘‘शैतानी ताकतें’’ उनकी लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही हैं. साथ ही, उन्होंने कहा था कि ‘‘वह अपने खून की आखिरी बूंद तक लड़ेंगे.’’

हेमंत का जन्म 10 अगस्त, 1975 को हजारीबाग के पास नेमरा गांव में शिबू सोरेन के घर में हुआ था और उन्होंने पटना हाई स्कूल से 12वीं करने के बाद रांची में बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा में प्रवेश लिया] लेकिन यहां पढ़ाई पूरी नहीं की. उन्हें बैडमिंटन खेलना, किताबें पढ़ना और साइकिल चलाना पसंद है. हेमंत और उनकी पत्नी कल्पना के दो बच्चे हैं.

हेमंत सोरेन कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के समर्थन से 2013 में झारखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे. इससे पहले वह 2009-2010 में राज्यसभा सदस्य रहे थे. सोरेन ने भाजपा के नेतृत्व वाली अर्जुन मुंडा सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद संभालने के लिए उच्च सदन से इस्तीफा दे दिया था. लेकिन, दो साल बाद ही भाजपा-झामुमो का गठबंधन टूट गया और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया.  हालांकि, मुख्यमंत्री के रूप में उनका पहला कार्यकाल अल्पकालिक रहा, क्योंकि 2014 में भाजपा ने राज्य की सत्ता पर कब्जा जमाया और रघुबर दास मुख्यमंत्री बने थे. साल 2014 में वह झारखंड विधानसभा में जीतकर पहुंचे औ नेता प्रतिपक्ष बने.

भाजपा द्वारा 2014-19 के दौरान सोरेन और उनके परिवार पर छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम का उल्लंघन करने का आरोप लगाये जाने के चलते उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा. हालांकि, बाद में चुनौतियों से निपटते हुए सोरेन ने पुराने दोस्तों - कांग्रेस और राजद - के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया.

अपने सहयोगियों के समर्थन से सोरेन 2019 में सत्ता में आए और उनकी पार्टी झामुमो ने अकेले 30 विधानसभा सीट जीती. सोरेन को ‘आपके अधिकार, आपकी सरकार, आपके द्वार’ जैसी नयी योजनाओं को शुरू करने का श्रेय दिया जाता है.

उन्होंने दोपहिया वाहन इस्तेमाल करने वाले गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग के लोगों के लिए इस साल 26 जनवरी से पेट्रोल पर 25 रुपये प्रति लीटर की राशि देने की भी घोषणा की थी. हाल में मुख्यमंत्री सोरेन ने राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं के विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने के सपनों को पूरा करने के लिए छात्रवृत्ति को विस्तार देने की घोषणा की.

उल्लेखनीय है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने हेमंत सोरेन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए और खनन विभाग का दायित्व भी अपने पास रखते हुए, रांची के अनगड़ा में एक खनन पट्टा अपने नाम आवंटित कराया था, जो सीधे तौर पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9ए के तहत अवैध है.

दास ने दावा किया था कि इस मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ लाभ के पद का मामला बनता है. उन्होंने अपनी पार्टी की ओर से राज्यपाल से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की थी.

 

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 27, 2022 08:16 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).