
पटना: बिहार में राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में आज सात नए मंत्री शपथ ले सकते हैं. यह विस्तार शुक्रवार से शुरू होने वाले बजट सत्र से ठीक पहले किया जा रहा है. हालांकि, अगर बिहार विधानसभा चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार अक्टूबर-नवंबर में होते हैं, तो इन मंत्रियों का कार्यकाल सिर्फ आठ से नौ महीनों का ही रहेगा.
नीतीश कैबिनेट के विस्तार में देरी की वजह मुख्यमंत्री की ‘प्रगति यात्रा’ और एनडीए एकता कार्यक्रम को बताया जा रहा है. इसके अलावा, हिंदू पंचांग के अनुसार ‘खरमास’ के दौरान कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता, इसलिए यह फैसला मकर संक्रांति (14 जनवरी) के बाद लिया गया.
एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने बताया कि कैबिनेट विस्तार पहले भी प्रस्तावित था, लेकिन इसे सही समय का इंतजार था. अब, जब बिहार चुनाव नजदीक आ रहे हैं, बीजेपी इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहती है.
कैबिनेट में कितनी सीटें खाली हैं?
बिहार कैबिनेट में कुल 36 मंत्रियों की क्षमता है, लेकिन फिलहाल इसमें 30 मंत्री ही हैं. हाल ही में भूमि एवं राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल के इस्तीफे के बाद 7 पद खाली हुए हैं. अब इन पदों को भरने के लिए नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है.
बीजेपी को मिलेगा बड़ा फायदा?
कैबिनेट विस्तार में बीजेपी को ज्यादा हिस्सेदारी मिलने की संभावना है. वर्तमान में बीजेपी के 15 मंत्री हैं और वे 4 और मंत्री जोड़ सकती है, जबकि जेडीयू (JDU) को 2 मंत्री पद मिल सकते हैं. बीजेपी इस विस्तार का इस्तेमाल अपने चुनावी अभियान को मजबूत करने के लिए कर रही है. इसके पीछे तीन अहम कारण हैं:
- जिन क्षेत्रों में बीजेपी का मजबूत आधार है, वहां से प्रतिनिधित्व बढ़ाना.
- जहां बीजेपी कमजोर है, वहां संतुलन बनाने के लिए नए नेताओं को शामिल करना.
- जातीय और सामाजिक समीकरण को साधना, ताकि हर वर्ग को संतुष्ट किया जा सके.
दिलीप जायसवाल का इस्तीफा
बीजेपी नेता दिलीप जायसवाल ने हाल ही में अपने मंत्री पद से इस्तीफा दिया. वह बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, और पार्टी की ‘वन मैन, वन पोस्ट’ नीति के तहत उन्हें अपनी एक जिम्मेदारी छोड़नी पड़ी. जायसवाल ने कहा, "मैंने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है. अब मैं पूरी तरह से पार्टी संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दूंगा. भूमि सर्वेक्षण का काम तेजी से चल रहा है और जो भी मेरी जगह मंत्री बनेगा, वह इसे आगे बढ़ाएगा."
नीतीश कुमार की अगली रणनीति?
नीतीश कुमार 9वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं और इस बार वह एनडीए (NDA) के साथ हैं. उन्होंने 28 जनवरी 2024 को शपथ ली थी. इससे पहले मार्च 2024 में पहला कैबिनेट विस्तार हुआ था, जब 21 नए मंत्री शामिल किए गए थे. अब, जब विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, यह दूसरा विस्तार सत्ता संतुलन को और मजबूत करने के लिए किया जा रहा है.
जेडीयू (JDU) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "हमारे पास ज्यादा खाली सीटें नहीं हैं. बीजेपी को ही अपने मंत्री तय करने थे. नीतीश कुमार ने हाल ही में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर इस पर अंतिम फैसला लिया है."
किन चेहरों को मिल सकता है मौका?
इस बार के कैबिनेट विस्तार में कुछ नए और अनुभवी चेहरों को जगह दी जा सकती है. बीजेपी के कई मंत्री एक से अधिक विभाग संभाल रहे हैं, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है. इस विस्तार के बाद विभागों का पुनर्गठन भी हो सकता है. भूगोल और जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए कुछ अल्पसंख्यक, दलित और ओबीसी नेताओं को भी मंत्री पद दिए जा सकते हैं. युवा और पहली बार विधायक बने कुछ नेताओं को भी मौका मिलने की संभावना है.