Bharat Ratna for Dalai Lama: देश की राजधानी दिल्ली में एक खास पहल ने फिर से तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को लेकर सुर्खियां बटोर ली हैं. संसद के भीतर विभिन्न दलों के सांसदों ने एकजुट होकर यह मांग की है कि दलाई लामा को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया जाए. इस अभियान में बीजेपी, जेडीयू, बीजेडी जैसे दलों के सांसदों ने एकमत होकर साथ दिया है. यह पहल "तिब्बत के लिए सर्वदलीय भारतीय संसदीय मंच" के बैनर तले हो रही है, जिसने हाल ही में अपनी दूसरी बैठक आयोजित की थी.
इस मीटिंग में मंच ने यह भी अपील की है कि दलाई लामा को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने का अवसर दिया जाए, जो कूटनीतिक लिहाज से चीन के लिए असहज करने वाला कदम हो सकता है.
80 सांसद कर चुके हस्ताक्षर
इस मुहिम को और प्रभावी बनाने के लिए सांसदों ने एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया है. अब तक करीब 80 सांसद इस मांग पर हस्ताक्षर कर चुके हैं. जैसे ही यह आंकड़ा 100 तक पहुंचेगा, ज्ञापन को प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा.
राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हम सभी दलों के सांसदों का एक साझा समूह बनाकर दलाई लामा के लिए भारत रत्न की मांग कर रहे हैं. इस अभियान को व्यापक समर्थन मिल रहा है. जल्द ही हम संसद के दोनों सदनों के अध्यक्षों को पत्र लिखकर संयुक्त सत्र में दलाई लामा को बुलाने की सिफारिश करेंगे.”
दलाई लामा ने अपना 90वां जन्मदिन मनाया
गौरतलब है कि हाल ही में दलाई लामा ने अपना 90वां जन्मदिन बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया. इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित त्सुगलागखांग मंदिर में हजारों अनुयायी और खास मेहमान शामिल हुए. इनमें केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू, जेडीयू के नेता राजीव रंजन सिंह, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेरे जैसी शख्सियतें भी मौजूद थीं.
दलाई लामा पिछले छह दशकों से भारत में निर्वासन में रह रहे हैं और तिब्बती समुदाय के हक और पहचान के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष कर रहे हैं. हाल ही में उन्होंने एक अहम घोषणा की थी कि उनके उत्तराधिकारी को लेकर केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट को निर्णय लेने का अधिकार होगा, जिससे संस्था के भविष्य को लेकर सभी अटकलों पर विराम लग गया.
भारत-चीन संबंधों में बढ़ सकता है तनाव
यह मांग ऐसे समय आई है जब भारत-चीन संबंधों में पहले से ही तनाव है. ऐसे में दलाई लामा को भारत रत्न देने की यह अपील कूटनीतिक बहस का विषय बन सकती है, लेकिन यह भारत के लोकतांत्रिक और आध्यात्मिक मूल्यों की भी गवाही देती है.













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