Maharashtra Language Row: महाराष्ट्र के पालघर में गुजराती भाषा में ट्रैफिक नोटिस पर बवाल, विपक्ष ने बताया मराठी अस्मिता पर हमला, मामले में फडणवीस सरकार को घेरा

महाराष्ट्र के पालघर जिले में प्रशासन द्वारा गुजराती भाषा में ट्रैफिक अधिसूचना जारी करने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. विपक्षी दलों ने इसे मराठी अस्मिता पर चोट और गुजराती भाषा थोपने की कोशिश बताया है

(Photo Credits ANI)

 Maharashtra Language Row:  महाराष्ट्र के पालघर जिले में प्रशासन द्वारा जारी एक ट्रैफिक अधिसूचना (Notification) ने राज्य की राजनीति में भाषाई विवाद को जन्म दे दिया है. दरअसल, पालघर जिला प्रशासन ने हाईवे पर वाहनों की आवाजाही को लेकर एक नोटिस जारी किया था, जो गुजराती भाषा में था. इस नोटिस की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विपक्षी दलों—शिवसेना (UBT), कांग्रेस और राकांपा (SP)-ने एक सुर में एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस सरकार पर निशाना साधा है. विपक्ष का आरोप है कि यह कदम महाराष्ट्र पर गुजराती भाषा थोपने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है.

क्या है पूरा विवाद?

मामला 19 और 20 जनवरी 2026 को माकपा (CPI-M) द्वारा आयोजित 'लॉन्ग मार्च' से जुड़ा है. इस विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर पालघर कलेक्टर ने मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) पर यातायात प्रतिबंधों के आदेश जारी किए थे. विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्य आदेश के साथ-साथ गुजराती भाषा में भी एक पत्रक जारी किया गया. विपक्षी नेताओं का दावा है कि यह महाराष्ट्र की सीमा के भीतर मराठी भाषा की उपेक्षा है. यह भी पढ़े:  Hindi Language Row: उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे से जुड़े सवाल पर बोलीं आशा भोसले, ‘मैं किसी राजनेता को नहीं जानती’

विपक्ष के तीखे हमले

विपक्ष के नेताओं ने इस मुद्दे को सीधे तौर पर क्षेत्रीय अस्मिता से जोड़ दिया है:

प्रशासन और सरकार का स्पष्टीकरण

विवाद बढ़ने पर पालघर जिला प्रशासन ने स्पष्टीकरण जारी किया है. अधिकारियों के अनुसार, मूल अधिसूचना मराठी भाषा में ही जारी की गई थी. चूंकि मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर गुजरात से आने वाले वाहन चालकों की संख्या अधिक होती है, इसलिए उनकी सुविधा के लिए गुजरात पुलिस (वलसाड) की मदद से इसका अनुवाद किया गया था. प्रशासन का कहना है कि मराठी का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था, बल्कि यह केवल यातायात प्रबंधन के लिए उठाया गया कदम था.

भाषाई विवाद का इतिहास

महाराष्ट्र में मराठी बनाम गुजराती भाषा का मुद्दा काफी पुराना और संवेदनशील रहा है. इससे पहले भी पालघर और ठाणे जिलों में हाईवे पर स्थित होटलों के गुजराती साइनबोर्ड्स को लेकर राज ठाकरे की मनसे (MNS) विरोध प्रदर्शन कर चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए विपक्षी दल इस मुद्दे के जरिए स्थानीय मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश कर रहे हैं..

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