Hindi Language Row: उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे से जुड़े सवाल पर बोलीं आशा भोसले, 'मैं किसी राजनेता को नहीं जानती'
महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को स्कूलों में अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव सुर्खियों में है. वर्षों से मराठी और क्षेत्रीय भाषाओं की प्राथमिकता पर जोर देने वाले नेता अब हिंदी के समर्थन या विरोध में खुलकर सामने आ रहे हैं. 'हिंदी विरोध' के मुद्दे पर ठाकरे बंधु फिर एक मंच पर आने को तैयार हैं. प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले से जब प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने बड़ी सहजता से कहा, 'मैं केवल आशीष शेलार को जानती हूं... बाकी किसी भी राजनेता को नहीं जानती.'
मुंबई, 27 जून : महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को स्कूलों में अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव सुर्खियों में है. वर्षों से मराठी और क्षेत्रीय भाषाओं की प्राथमिकता पर जोर देने वाले नेता अब हिंदी के समर्थन या विरोध में खुलकर सामने आ रहे हैं. 'हिंदी विरोध' के मुद्दे पर ठाकरे बंधु फिर एक मंच पर आने को तैयार हैं. प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले से जब प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने बड़ी सहजता से कहा, 'मैं केवल आशीष शेलार को जानती हूं... बाकी किसी भी राजनेता को नहीं जानती.' आशा भोसले ने जिस आशीष शेलार की बात की, वह महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री हैं और भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) में कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं. वहीं जब हिंदी भाषा अनिवार्य करने के मुद्दे पर आशा भोसले से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मैं राजनीति पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगी.'
बता दें कि राज्य सरकार ने हाल ही में एक संशोधित आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया कि मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक हिंदी को आमतौर पर तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा. हालांकि, बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हिंदी अनिवार्य नहीं होगी, और किसी अन्य भारतीय भाषा को पढ़ने के लिए कम से कम 20 छात्रों की सहमति जरूरी होगी. इस सबके बीच, स्कूलों में हिंदी भाषा को पढ़ाए जाने के फैसले के बाद ठाकरे बंधुओं, यानी उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, ने फडणवीस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दोनों ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए कहा कि वह मराठी अस्मिता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे. यह भी पढ़ें : Hindi Language Row: उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के संयुक्त मोर्चे की तारीख तय; 20 साल बाद साझा करेंगे राजनीतिक मंच
दोनों का साथ आना राजनीतिक समीकरणों में बड़ा संकेत माना जा रहा है. दरअसल, राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच फूट की कहानी शिवसेना के भीतर बढ़ते मतभेदों से शुरू हुई थी. 1989 में राज ठाकरे ने शिवसेना की विद्यार्थी शाखा से राजनीति में कदम रखा और छह वर्षों में महाराष्ट्र में पार्टी का मजबूत जनाधार खड़ा किया. इस दौरान युवाओं में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी.
2003 में महाबलेश्वर अधिवेशन में बालासाहेब ठाकरे ने उद्धव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया, जिससे राज आहत हुए. उन्हें लगा कि पार्टी में उनकी मेहनत की अनदेखी हो रही है. 2005 तक उद्धव का दबदबा पार्टी में स्पष्ट रूप से दिखने लगा. अंततः राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़ दी और कहा कि उनका झगड़ा शिवसेना या बालासाहेब से नहीं, बल्कि उनके आसपास के 'पुजारियों' से है. 9 मार्च 2006 को राज ठाकरे ने मनसे यानि 'महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना' की स्थापना की.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 27, 2025 03:04 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

