Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी ज्यादा हो रहा है. इसमें दावा किया गया है की ये वीडियो टोक्यो का है और कुछ पाकिस्तानी युवक एक युवती को परेशान कर रहे है. इस वीडियो में देखा जा सकता ही की कुछ युवक एक युवती को परेशान कर रहे है, युवक युवती के साथ फोटो खिंचवाने की कोशिश करते है, इसके बाद उसे हाथ भी लगाते है. इस दौरान युवती उनसे अंग्रेजी में दूर रहने के लिए कहती है. इस वीडियो में दावा किया गया है की जो युवती को परेशान कर रहे है वे तीनों युवक पाकिस्तानी है. इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर युवकों को लेकर काफी नाराजगी फैल गई है.
इस वीडियो को सोशल मीडिया X पर @DesiKing_ नाम के हैंडल से शेयर किया गया है. ये भी पढ़े:Fact Check: क्या ट्रंप के 50% टैरिफ ऐलान के बाद NRI छोड़ रहे हैं अपनी अमेरिकी नागरिकता? फर्जी वीडियो के जरिए फैलाई जा रही अफवाह… जानिए सच्चाई
युवती को किया जा रहा है परेशान
Japanese woman sexually harassed by three Pakistani nationals in Tokyo, Japan. pic.twitter.com/bnU1mK1Jin
— Desi king (@DesiKing_) August 11, 2025
क्या है इस वीडियो की सच्चाई
जांच में सामने आया कि यह वीडियो टोक्यो का नहीं है और न ही इसमें शामिल महिला जापानी है.वीडियो में चीनी सबटाइटल्स दिखाई देते हैं.लोकेशन किसी मॉल जैसे स्थान की लगती है, जो जापान के बजाय चीन या एशिया के किसी अन्य देश में हो सकता है.पीड़ित महिला काकेशियन दिखती है, न कि जापानी.इन तथ्यों से यह साफ है कि वीडियो का स्थान और घटना का विवरण गलत तरीके से जोड़ा गया है।
वीडियो की पड़ताल
इस वीडियो में टोक्यो, जापान की कोई घटना नहीं दिखाई दे रही है. तीन पाकिस्तानी युवकों द्वारा जापानी महिला से छेड़छाड़ के दावे की पुष्टि करने वाली कोई विश्वसनीय खबर नहीं है. वीडियो में चीनी सबटाइटल्स, पीड़ित का काकेशियन लुक और मॉल जैसा सेटअप है, जो चीन या एशिया के किसी अन्य हिस्से का हो सकता है. यह संभवतः सनसनी फैलाने के लिए गलत तरीके से जोड़ा गया है.
गलत जानकारी के खतरनाक असर
ऐसे वीडियो अकसर भावनाओं को भड़काने, पूर्वाग्रह को बढ़ावा देने और देशों के बीच तनाव को हवा देने का काम करते हैं. विशेष रूप से भारतीय और पाकिस्तानी सोशल मीडिया यूजर्स के बीच ऐसे कंटेंट से बहस और वैमनस्यता बढ़ती है.
डिजिटल युग में सतर्कता की जरूरत
आज की तेज रफ्तार डिजिटल दुनिया में कोई भी सनसनीखेज वीडियो कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है, लेकिन उसका सच अक्सर पीछे रह जाता है. ऐसे मामलों में
विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि करना जरूरी है.वीडियो के दृश्य संकेतों और लोकेशन की जांच होनी चाहिए.बिना जांचे-परखे शेयर करना भ्रामक कथाओं को मजबूत करता है.












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