31 मार्च 1964 को मुंबई में आखिरी बार चली थी ट्राम

मुंबई में ट्राम (Photo Credits-Facebook)

कोलाबा, फ्लोरा फाउंटेन, फोर्ट, नरीमन प्वाइंट समेत मुंबई में कई ऐसी जगहें हैं, जहां आज भी मीटर गेज जैसी छोटी-छोटी पटरियां नजर आती हैं. ये पटरियां चलती सड़क पर दौड़ने वाली ट्रामों की हैं. जो तेज रफ्तार से भागती मुंबई की कदम से कदम नहीं मिला पाने के कारण 31 मार्च 1964 को आखिरी बार चलकर बंद हो गयीं. हालांकि चर्चा है कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री मुंबई को ट्रैफिक एवं पर्यावरण समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए एक बार फिर नरीमन प्वाइंट से कोलाबा से कांदीवली तक ट्राम शुरू करने की योजना बना रहे हैं.

जब 8 घोड़े खींचते थे ट्राम

फिलहाल हम जानें कि कैसी थी देश की पहली ट्राम सेवा और किन वजहों से इसे बंद करना पड़ा.. भारत में ब्रिटिश हुकूमत के दरम्यान साल 1874 में पहली बार मुंबई में ट्राम के दर्शन हुए थे, जिन्हें यहां लाने का श्रेय अंग्रेजों को जाता है. पर इस ट्राम को लोकोमोटिव नहीं बल्कि 6 से 8 घोड़े खींचते थे. उस समय ट्राम सेवा को सुचारु करने के लिए करीब 900 घोड़ों वाले अस्तबल बहाल किए गए थे।

9 मई 1874 को घोड़े से खींचे जाने वाले ट्राम मुंबई के कई व्यस्त इलाकों में चलाए गए थे. लेकिन ज्यों-ज्यों मुंबई का विकास होता गया, ट्राम की सेवा में भी बदलाव देखने को मिला.

बिजली ने बढ़ाई रफ्तार ट्राम की

7 मई 1907 में ट्राम को तेज रफ्तार देने के लिए घोड़ों की जगह बिजली की मदद ली गयी. उस समय ट्राम की यह सेवा परेल से कोलाबा तक ही थी. तब परेल और दादर के बाद के उपनगर इतने विकसित नहीं थे. बहरहाल यह ट्राम सेवा तकरीबन छह दशक तक सफलतापूर्वक चलाई गयी. मुंबई में चलने वाली ट्राम कोलकाता के ट्राम से थोड़ी अलग किस्म की थी.

इसमें आमतौर पर एक ही डिब्बा हुआ करता था. इसलिए यह दूर से देखने में किसी बस की तरह ही लगती थी. कुछ ट्रामें प्रयोग के तौर पर डबल डेकर वाली भी चलाई गयी. जबकि अधिकांश ट्रामें एक ही मंजिल वाली थीं. मुंबई में चलने वाली इन ट्रामों का रंग अमूमन लाल रंग का ही हुआ करता था. इनके बाहर अलग अलग उत्पादों के विज्ञापन भी लगाये जाते थे. आज मुंबई में चलने वाली ट्राम की तस्वीरें या वीडियो बहुत कम ही दिखाई देती हैं.

द्रुत गति की बसों ने लगाई ट्राम पर लगाम

प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि 1926 में जब पहियों पर दौड़ने वाली द्रुतगामी बसें मुंबई की सड़कों पर उतरीं तो ट्राम की रफ्तार उनका मुकाबला नहीं कर सकीं. लिहाजा 1964 तक आते-आते मुंबई में ट्राम की रफ्तार बसों का मुकाबला नहीं कर सकीं. और इसे बंद करना पड़ा. मुंबई में बिजली से चलने वाली ट्राम ने लगभग 57 साल अपनी सेवाएं दी.

31 मार्च को आखिरी बार बिजली चलित ट्राम सेवा मुंबई में संचालित हुई. उस समय यह बोरी बंदर से दादर के बीच चल रही थी. उस समय कोलाबा जंक्शन कार्नर मुंबई ट्राम का मुख्य केंद्र हुआ करता था. कहा जाता है कि उस समय ट्राम का संचालन बेस्ट कंपनी किया करती थी, जो आज मुंबई की बसों का संचालन करती है. फिलहाल लगातार कम होती सवारियों के कारण ट्राम सेवा को बंद करने का निर्णय लेना पड़ा.

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