UPS छोड़कर NPS में लौटना चाहते हैं? जानिए क्या है नियम और प्रक्रिया
केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को एक बार का मौका दिया है कि वे यूपीएस से वापस एनपीएस में लौट सकते हैं. अब कर्मचारियों को तय करना होगा कि वे निश्चित पेंशन की सुरक्षा चाहते हैं, या मार्केट से जुड़ा ज्यादा रिटर्न चाहते हैं.
केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को एक बड़ा विकल्प दिया है. जो कर्मचारी यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में चले गए थे, अब वे चाहें तो वापस नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में लौट सकते हैं. यह मौका सिर्फ ‘एक बार और एक तरफा’ (one-time, one-way option) दिया गया है.
कौन कर सकता है स्विच?
सरकार की नई अधिसूचना के मुताबिक, सिर्फ वही कर्मचारी वापस एनपीएस में लौट सकते हैं, जो पहले एनपीएस छोड़कर यूपीएस में शामिल हो चुके हैं, लेकिन अब फिर से एनपीएस अपनाना चाहते हैं. हालांकि, यह सुविधा उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगी, जिन पर बर्खास्तगी, जबरन रिटायरमेंट या किसी भी तरह की जांच या कार्रवाई का मामला फिलहाल नहीं चल रहा है.
कब तक कर सकते हैं बदलाव?
कर्मचारी को यह फैसला रिटायरमेंट से कम से कम 1 साल पहले या फिर स्वैच्छिक रिटायरमेंट (VRS) से 3 महीने पहले लेना जरूरी होगा. अगर तय समय सीमा में कर्मचारी ने यह विकल्प नहीं चुना, तो वह अपने आप यूपीएस में ही शामिल माना जाएगा.
स्विच करने के बाद क्या होगा?
जो कर्मचारी दोबारा एनपीएस में लौटेंगे, उन्हें यूपीएस की तय पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा. इसके बजाय सरकार उनके एनपीएस खाते में अतिरिक्त 4% का योगदान जोड़कर जमा करेगी. एनपीएस से जुड़े सभी नियम पीएफआरडीए निकास और निकासी विनियम 2015 (PFRDA Exit & Withdrawal Regulations 2015) के तहत लागू होंगे. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि एक बार लिया गया यह फैसला अंतिम होगा और इसमें बाद में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा.
एनपीएस के फायदे क्या है?
नेशनल पेंशन सिस्टम एक मार्केट से जुड़ी योजना है, जिसमें फिक्स्ड पेंशन नहीं मिलती, लेकिन इसके कई फायदे हैं. इसमें निवेश इक्विटी (Equities), कॉर्पोरेट बॉन्ड (Corporate Bonds) और सरकारी बॉन्ड (Government Bonds) में होता है, जिससे लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है.
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है, कि इसमें निवेशक खुद तय कर सकते हैं कि उनकी राशि का कितना हिस्सा इक्विटी या बॉन्ड में लगाया जाए. साथ ही, अगर कोई नौकरी या जगह बदलता है, तो भी एनपीएस खाता वैध बना रहता है. रिटायरमेंट के समय निवेशक 60% राशि टैक्स-फ्री (Tax Free) निकाल सकते हैं, और बाकी रकम से एन्युटी (Annuity) खरीदकर हर महीने पेंशन प्राप्त कर सकते हैं.
यूपीएस के फायदे क्या है?
यूनिफाइड पेंशन स्कीम 1 अप्रैल 2025 से लागू की गई है. यह एनपीएस के तहत एक विकल्प है, जिसमें कर्मचारियों को निश्चित पेंशन की गारंटी दी जाती है. इस योजना के अनुसार, 25 साल की सेवा पूरी करने पर कर्मचारी को आखिरी 12 महीने के औसत बेसिक पे (Basic Pay) का 50% पेंशन मिलेगी. अगर सेवा अवधि 10 साल है, तो भी कम से कम 10,000 रुपये प्रतिमाह की न्यूनतम पेंशन का प्रावधान है.
कर्मचारी के निधन की स्थिति में उसके जीवनसाथी को फैमिली पेंशन के रूप में 60% राशि दी जाएगी. इसके अलावा, रिटायर होने के बाद भी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA Relief) मिलता रहेगा. साथ ही, हर 6 महीने की सेवा पर वेतन का 10% अतिरिक्त राशि लंप-सम (Lum-Sum) लाभ के रूप में दी जाएगी.
टैक्स लाभ
दोनों पेंशन स्कीमों पर आयकर अधिनियम 1961 (Income Tax Act 1961) के तहत टैक्स लाभ मिलते हैं. एनपीएस में निवेश करने पर धारा 80C और 80CCD(1) के तहत छूट मिलती है, साथ ही धारा 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपये की टैक्स छूट भी उपलब्ध है. सरकार ने स्पष्ट किया है, कि यूपीएस पर भी बिल्कुल वही टैक्स बेनिफिट लागू होंगे, यानी दोनों योजनाओं में निवेश करने वाले कर्मचारियों को टैक्स बचत का समान लाभ मिलेगा.
कितने कर्मचारियों ने चुना यूपीएस?
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय ने लोकसभा में जानकारी दी कि 20 जुलाई 2025 तक कुल 31,555 केंद्रीय कर्मचारियों ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम को चुना है. यह संख्या उन सभी पात्र कर्मचारियों का केवल 1.37% है. सरकार ने कर्मचारियों को और समय देने के लिए यूपीएस में शामिल होने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2025 तक बढ़ा दी है.
क्यों अहम है यह फैसला?
सरकार का यह कदम कर्मचारियों को लचीलापन और सुरक्षित रिटायरमेंट का संतुलन देने की कोशिश है. यूपीएस में गारंटी के साथ निश्चित पेंशन मिलती है, जबकि एनपीएस मार्केट से जुड़ा होने के कारण लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न देने की संभावना रखता है.
अब कर्मचारियों के सामने यह फैसला है, कि वे पक्की पेंशन की सुरक्षा चाहते हैं या निवेश से मिलने वाले ज्यादा मुनाफे का फायदा उठाना चाहते हैं. चूंकि यह फैसला एक बार का और अंतिम (Irreversible) होगा, इसलिए सही विकल्प चुनना बेहद जरूरी है.