दिल्ली में 800 लड़कियों के गायब होने की खबर महज अफवाह, पुलिस ने कहा- 'पैसों के लिए फैलाया जा रहा है डर'

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर '800 लड़कियों के लापता' होने वाली खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है. पुलिस का कहना है कि आर्थिक लाभ के लिए 'पेड प्रमोशन' के जरिए यह डर फैलाया जा रहा है.

दिल्ली पुलिस (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) में लड़कियों और बच्चों के लापता होने की बढ़ती घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया (Social Media) पर फैलाई जा रही खबरों को पूरी तरह भ्रामक और गलत बताया है. शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में पुलिस ने चेतावनी दी कि कुछ लोग आर्थिक लाभ के लिए 'पेड प्रमोशन' (Paid Promotion) के जरिए जनता के बीच डर पैदा कर रहे हैं. पुलिस ने साफ किया कि ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. दिल्ली में 800 लड़कियों के गायब होने की खबर को अफवाह बताते हुए दिल्ली पुलिस ने कहा कि पैसों के लिए डर फैलाया जा रहा है. यह भी पढ़ें: दिल्ली के जनकपुरी में दर्दनाक हादसा: गड्ढे में गिरकर बाइकर की मौत, परिजनों का आरोप- 'मदद के लिए 6 थानों के चक्कर काटे, पर किसी ने नहीं सुनी'

भ्रामक दावों पर पुलिस का कड़ा रुख

दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘जांच में यह सामने आया है कि दिल्ली में लड़कियों के लापता होने के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए 'पेड प्रमोशन' का सहारा लिया जा रहा है. महज पैसों के लिए जनता के बीच दहशत पैदा करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.’

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बिना किसी ठोस आधार के चिंता जताई जा रही थी, जिसे अब आधिकारिक आंकड़ों के जरिए खारिज कर दिया गया है.

क्या वाकई बढ़े हैं गुमशुदगी के मामले?

दिल्ली पुलिस के पीआरओ संजय त्यागी ने स्पष्ट किया कि आंकड़ों में कोई असामान्य उछाल नहीं आया है. पिछले तीन वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि स्थिति स्थिर बनी हुई है:

बच्चों के मामले में भी स्थिति लगभग वैसी ही है. जनवरी 2026 में 430 बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट मिली, जबकि पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 436 था. यानी इस साल आंकड़ों में मामूली गिरावट ही आई है.

किशोरों में घर छोड़ने की प्रवृत्ति अधिक

पुलिस आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि लापता होने वाले बच्चों में सबसे बड़ा हिस्सा 12 से 18 वर्ष के किशोरों का है.

हेड कॉन्स्टेबल सीमा त्यागी और सीनियर कॉन्स्टेबल मोनिका ने बताया कि छोटे बच्चे अक्सर अपना पता भूल जाने के कारण भटक जाते हैं, जबकि किशोर कई बार अजनबियों के प्रभाव में आकर घर छोड़ देते हैं. तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) की मदद से ऐसे बच्चों को सुरक्षित ट्रैक कर लिया जाता है. यह भी पढ़ें: Ghaziabad Triple Suicide Case: गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड केस में चौंकाने वाला खुलासा, नाबालिग बहनों ने सोशल मीडिया पर कोरियन नामों का किया इस्तेमाल, लाखों की थी फॉलोइंग

क्या दिल्ली में सक्रिय है कोई गिरोह?

अक्सर अफवाहें उड़ती हैं कि बच्चों के गायब होने के पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा है. हालांकि, पुलिस ने इस बात का भी खंडन किया है. स्पेशल कमिश्नर (पुलिस) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक दिल्ली में बच्चों के अपहरण या उनके लापता होने के पीछे किसी भी संगठित गैंग या आपराधिक नेटवर्क की संलिप्तता का कोई सुबूत नहीं मिला है.

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर आने वाली अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध सूचना की पुष्टि आधिकारिक सूत्रों से जरूर करें.

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