सैलरी वालों के लिए New Tax Regime या Old Tax Regime, कौन सी है बेहतर?

यह वह समय है, जब सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को अपने एंपलॉयर को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपनी टैक्स रेजीम को बताना होता है. पहले के मुकाबले अब यह निर्णय लेना आसान हो गया है, क्योंकि बजट 2025 में की गई बदलावों ने नई टैक्स व्यवस्था को और भी सरल बना दिया है. हालांकि, कुछ कर्मचारी अभी भी पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था के बीच चयन को लेकर कंफ्यूज हैं.

इसी कंफ्यूजन को सुलझाने के लिए यहां हम पांच अहम कारण बता रहे हैं, जो यह समझने में आपकी मदद करेंगे कि सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए नई टैक्स व्यवस्था क्यों सबसे बेहतर विकल्प हो सकती है:

अधिक सरल है

नई टैक्स व्यवस्था बहुत ही सरल है. इसमें पुरानी व्यवस्था की तरह जटिल डिडक्शन्स (Deductions) और छूट का झंझट नहीं है. इसमें आप सीधे अपनी आय पर टैक्स अदा करते हैं, जो कि कम टैक्स रेट्स और उच्च बेसिक एक्सेम्पशन लिमिट (Higher Basic Exemption Limit) के साथ होता है. यह प्रक्रिया इसे सरल और समझने में आसान बनाती है.

टैक्स एक्सपर्ट्स पर कम निर्भरता

नई व्यवस्था के कारण आपको टैक्स काउंसलर या चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद की जरूरत नहीं पड़ती है. अगर आपकी आय सिर्फ सैलरी से है, तो आप खुद ही अपना आईटीआर फाइल कर सकते हैं. यह आपके लिए समय और पैसे की बचत दोनों ही करता है.

टैक्स बचाने के विकल्प कम

नई टैक्स व्यवस्था में डिडक्शन्स और छूट को हटा दिया गया है, जिससे अब आपको कोई टैक्स बचाने के लिए जुगाड़ करने की जरूरत नहीं है. अब आपको फ्यूल बिल (Fuel Bills), रेंट बिल (Rent Bills) या डोनशन सर्टिफिकेट्स (Donation Certificates) जैसी चीजों की चिंता नहीं करनी होगी. इसका मतलब है, कि आप बिना किसी परेशानी के अपनी आय बढ़ाने पर ध्यान दे सकते हैं.

12.75 लाख रुपय तक की सैलरी टैक्स फ्री

नई टैक्स व्यवस्था अब 12.75 लाख रुपय तक की सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है, क्योंकि कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा. यहां तक कि नई टैक्स व्यवस्था में 25 लाख रुपय तक की सैलरी वालों को भी 1 लाख रुपय से ज्यादा की बचत हो सकती है. इस व्यवस्था में कम सरचार्ज (Surcharge) भी है, जिससे 50 लाख रुपय तक की सैलरी वाले कर्मचारी भी इसका फायदा उठा सकते हैं.

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निवेश और टैक्स को अलग रख सकते हैं

नई टैक्स व्यवस्था में आपको अब टैक्स बचाने के लिए किसी विशेष निवेश योजना में पैसा लगाने की जरूरत नहीं होती है. अब बिना किसी टैक्स बचत की मजबूरी के अपनी मर्जी से निवेश कर सकते हैं. इसका मतलब है, कि आप अपने निवेश पर पूरी तरह से नियंत्रण रख सकते हैं.

नई टैक्स व्यवस्था सैलरी वालों के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित हो रही है. यह सरल है, टैक्स फाइलिंग को आसान बनाती है, और इसमें टैक्स बचाने के लिए जुगाड़ करने की कोई जरूरत नहीं होती है. इसलिए अब सैलरी वालों को टैक्स रिटर्न फाइल करने में कोई परेशानी नहीं होगी.