What is Sengol? क्या है सेंगोल, जिसे नई संसद में स्पीकर की कुर्सी के पास रखा जाएगा, नेहरू से जुड़ा है इतिहास
14 अगस्त 1947 में जब भारत की सत्ता का हस्तांतरण हुआ, तो वो इसी सेंगोल द्वारा हुआ था. एक तरह कहा जाए तो सेंगोल भारत की आजादी का प्रतीक है.
Sengol To Be Placed In New Parliament Building: नए संसद भवन के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नए संसद भवन में ऐतिहासिक व पवित्र "सेंगोल" की स्थापना करेंगे. यह पवित्र "सेंगोल" ही अंग्रेजों से भारत को सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक है. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस ऐतिहासिक ‘‘सेंगोल’’ के लिए संसद भवन ही सबसे अधिक उपयुक्त और पवित्र स्थान है. यह अमृतकाल का प्रतिबिंब होगा, जो नए भारत को विश्व में अपने यथोचित स्थान को ग्रहण करने के गौरवशाली क्षण का साक्षी बनेगा.
सेंगोल संस्कृत शब्द "संकु" से लिया गया है, जिसका अर्थ है "शंख". शंख हिंदू धर्म में एक पवित्र वस्तु थी, और इसे अक्सर संप्रभुता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. आजाद भारत में इसका बड़ा महत्व है. 14 अगस्त 1947 में जब भारत की सत्ता का हस्तांतरण हुआ, तो वो इसी सेंगोल द्वारा हुआ था. एक तरह कहा जाए तो सेंगोल भारत की आजादी का प्रतीक है. ये भी पढ़ें- Boycott Of New Parliament Building: नए संसद भवन के उद्घाटन पर विपक्ष का बवाल, समारोह से दूर रहेगी कांग्रेस, AAP, TMC समेत 19 पार्टियां
रविवार को इतिहास की पुनरावृत्ति होगी, जब नए संसद भवन को राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा. इस दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न्यायपूर्ण और निष्पक्ष शासन के पवित्र प्रतीक सेंगोल को ग्रहण कर उसे नए संसद भवन में स्थापित करेंगे. यह वही सेंगोल है जिसे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 14 अगस्त, 1947 की रात को अपने आवास पर, कई नेताओं की उपस्थिति में स्वीकार किया था.
शाह ने कहा, “आज आजादी के 75 साल बाद भी, अधिकांश भारत को इस घटना के बारे में जानकारी नहीं है. 14 अगस्त, 1947 की रात को वह एक विशेष अवसर था, जब जवाहर लाल नेहरू जी ने तमिलनाडु के थिरुवदुथुराई आधीनम (मठ) से विशेष रूप से पधारे आधीनमों (पुरोहितों) से सेंगोल ग्रहण किया था. पंडित नेहरू के साथ सेंगोल का निहित होना ठीक वही क्षण था, जब अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के हाथों में सत्ता का हस्तांतरण किया गया था. हम जिसे स्वतंत्रता के रूप में मना रहे हैं, वह वास्तव में यही क्षण है.”
पीएम मोदी जी ने अमृत काल के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में सेंगोल को अपनाने का निर्णय लिया है. संसद का नया भवन उसी घटना का साक्षी बनेगा, जिसमें आधीनम उस समारोह की पुनरावृत्ति करेंगे और प्रधानमंत्री मोदी को सेंगोल प्रदान करेंगे.
केन्द्रीय गृह मंत्री ने आगे सेंगोल के बारे में विस्तार से बताया. “सेंगोल का गहरा अर्थ होता है. ‘‘सेंगोल’’ शब्द तमिल शब्द "सेम्मई" से लिया गया है, जिसका अर्थ है "नीतिपरायणता". इसे तमिलनाडु के एक प्रमुख धार्मिक मठ के मुख्य आधीनम (पुरोहितों) का आशीर्वाद प्राप्त है. ‘न्याय’ के प्रेक्षक के रूप में, अपनी अटल दृष्टि के साथ देखते हुए, हाथ से उत्कीर्ण नंदी इसके शीर्ष पर विराजमान हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सेंगोल को ग्रहण करने वाले व्यक्ति को न्यायपूर्ण और निष्पक्ष रूप से शासन करने का ‘आदेश’ (तमिल में‘आणई’) होता है और यह बात सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली है- लोगों की सेवा करने के लिए चुने गए लोगों को इसे कभी नहीं भूलना चाहिए.” 1947 के उसी सेंगोल को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लोकसभा में अध्यक्ष के आसन के पास प्रमुखता से स्थापित किया जाएगा. इसे राष्ट्र के देखने के लिए प्रदर्शित किया जाएगा और विशेष अवसरों पर बाहर ले जाया जाएगा.
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इस ऐतिहासिक ‘‘सेंगोल’ के लिए संसद भवन ही सबसे अधिक उपयुक्त और पवित्र स्थान है. ‘‘सेंगोल’ ’की स्थापना 15 अगस्त, 1947 की भावना को अविस्मरणीय बनाती है. यह असीम आशा, अनंत संभावनाओं और एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण का संकल्प है. यह अमृतकाल का प्रतिबिंब होगा, जो नए भारत को विश्व में अपने यथोचित स्थान को ग्रहण करने के गौरवशाली क्षण का साक्षी बनेगा.
तमिलनाडु सरकार ने 2021-22 के ‘हिन्दू रिलिजियस एंड चैरिटेबल एंडोमेंट डिपार्टमेंट’- हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (एचआर एंड सीई) के पॉलिसी नोट में राज्य के मठों द्वारा निभाई गई भूमिका को गर्व से प्रकाशित किया है. इस दस्तावेज़ के पैरा 24 में मठों द्वारा शाही परामर्शदाता के रूप में निभाई गई भूमिका पर स्पष्ट रूप से प्रकाश डाला गया है.
यह ऐतिहासिक योजना आधीनम के अध्यक्षों से विचार-विमर्श करके बनाई गई है. सभी 20 आधीनम के अध्यक्ष इस शुभ अवसर पर आकर इस पवित्र अनुष्ठान की पुनर्स्मृति में अपना आशीर्वाद भी प्रदान कर रहे हैं. इस पवित्र समारोह में 96 साल के श्री वुम्मिडी बंगारु चेट्टी जी भी सम्मिलित होंगे, जो इसके निर्माण से जुड़े रहे हैं.
केन्द्रीय गृह मंत्री ने सेंगोल के बारे में विवरण और डाउनलोड करने योग्य वीडियो के साथ एक विशेष वेबसाइट https://sengol1947.ignca.gov.in को भी लॉन्च किया. उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि भारत के लोग इसे देखें और इस ऐतिहासिक घटना के बारे में जानें, यह सभी के लिए गर्व की बात है.”
इस प्रेस वार्ता में केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री किशन रेड्डी, केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण और खेल एवं युवा मामलों के मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री गोविन्द मोहन भी उपस्थित थे.
(The above story first appeared on LatestLY on May 24, 2023 03:23 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

