नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में साइबर अपराध और सड़क हादसों में चिंताजनक वृद्धि हुई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि 2023 में साइबर अपराध के मामलों में 31% की भारी बढ़ोतरी हुई, जिनमें से अधिकांश (लगभग 69%) का मकसद ऑनलाइन धोखाधड़ी था. तेलंगाना और कर्नाटक साइबर अपराध दर में सबसे आगे हैं. इसके साथ ही, सड़क हादसों में 1.73 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हुई, जिनमें सबसे अधिक पीड़ित (लगभग 46%) दोपहिया वाहन चालक थे. इन हादसों की मुख्य वजह तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाना पाया गया. यह रिपोर्ट डिजिटल और सड़क सुरक्षा दोनों को लेकर गंभीर चिंताएं प्रस्तुत करती है.
साइबर क्राइम में भारी उछाल
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2023 की ताजा रिपोर्ट ने भारत में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में साइबर क्राइम के मामलों में 31 प्रतिशत की भारी उछाल देखी गई है.
2022 में जहां 65,983 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 86,420 हो गई. अपराध दर (प्रति एक लाख की आबादी पर अपराध) भी 2022 में 4.8 से बढ़कर 2023 में 6.2 हो गई है.
क्यों किए जाते हैं ये साइबर अपराध?
रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर साइबर अपराधों का मकसद लोगों को धोखा देकर पैसे ठगना होता है.
- धोखाधड़ी: लगभग 69% (59,526 मामले) साइबर अपराधों का मकसद ऑनलाइन फ्रॉड करना था.
- यौन शोषण: 4,199 मामले यौन शोषण के इरादे से किए गए.
- जबरन वसूली: 3,326 मामलों में लोगों से पैसे वसूले गए.
- बदला लेना: 2,228 मामले गुस्से या निजी बदला लेने के लिए किए गए.
- राजनीतिक कारण: 205 मामलों के पीछे राजनीतिक मकसद थे.
कौन से राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
अपराध दर के हिसाब से देखें तो,
- तेलंगाना: यहां अपराध दर सबसे ज्यादा (47) है. तेलंगाना में कुल 18,236 मामले दर्ज हुए.
- कर्नाटक: 32.3 की अपराध दर के साथ दूसरे स्थान पर है, यहां 21,889 मामले सामने आए.
- उत्तर प्रदेश: यहां 10,794 मामले दर्ज हुए, लेकिन राज्य की विशाल आबादी के कारण यहां अपराध दर काफी कम (4.6) है.
एक और दिलचस्प बात यह है कि सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने के कुल 209 मामलों में से लगभग आधे (98 मामले) अकेले तेलंगाना में दर्ज हुए.
बड़े शहरों और अन्य अपराधों का हाल
बड़े महानगरों (20 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर) में भी साइबर क्राइम तेजी से बढ़ा है. 2023 में इन शहरों में कुल 33,955 मामले दर्ज हुए, जो 2022 के मुकाबले 39% ज्यादा हैं.
अन्य प्रमुख साइबर अपराधों में शामिल हैं:
- अश्लील सामग्री फैलाना (2,168 मामले).
- बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री के मामले (1,472).
- महिलाओं और बच्चों को ऑनलाइन परेशान करना या पीछा करना (Cyberbullying/Stalking) के 1,305 मामले.
- साइबर ब्लैकमेलिंग और धमकी देने के 689 मामले.
यह रिपोर्ट साफ तौर पर दिखाती है कि जैसे-जैसे हम डिजिटल दुनिया पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं, ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सावधान रहना और भी जरूरी हो गया है.
NCRB रिपोर्ट 2023: सड़क हादसों में 1.73 लाख से ज्यादा मौतें, तेज रफ्तार बनी सबसे बड़ी वजह
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की नई रिपोर्ट ने भारत में सड़क सुरक्षा को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में देशभर में हुए सड़क हादसों में 1.73 लाख से ज्यादा लोगों की जान चली गई और 4.47 लाख लोग घायल हुए.
रिपोर्ट की सबसे बड़ी बात यह है कि जान गंवाने वालों में करीब 46% लोग दोपहिया यानी बाइक या स्कूटर चलाने वाले थे. हादसों की मुख्य वजह ओवर-स्पीडिंग और लापरवाही से गाड़ी चलाना पाई गई.
आंकड़ों में सड़क हादसे
- कुल हादसे: 2023 में देश में 4,64,029 सड़क दुर्घटनाएं हुईं.
- मौतों में बढ़ोतरी: 2022 के मुकाबले 2023 में मौतों का आंकड़ा 1.6% बढ़ा है. 2022 में 1,71,100 मौतें हुई थीं, जो 2023 में बढ़कर 1,73,826 हो गईं.
किस समय होते हैं सबसे ज्यादा हादसे?
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा सड़क हादसे शाम के समय होते हैं.
- शाम 6 बजे से रात 9 बजे: इस दौरान 20.7% (95,984) हादसे हुए.
- दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे: इस समय 17.3% हादसे हुए.
कौन बना सबसे ज्यादा शिकार?
- टू-व्हीलर: सड़क हादसों में सबसे ज्यादा 79,533 मौतें टू-व्हीलर सवारों की हुईं, जो कुल मौतों का 45.8% है.
- पैदल यात्री: 27,586 पैदल चलने वालों की मौत हुई (15.9%).
- कार/जीप/SUV: इन वाहनों में 24,776 लोगों ने अपनी जान गंवाई (14.3%).
राज्यों का क्या है हाल?
- टू-व्हीलर मौतें: टू-व्हीलर हादसों में सबसे ज्यादा मौतें तमिलनाडु (11,490) और उत्तर प्रदेश (8,370) में हुईं.
- उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मौतें: कार/जीप और ट्रक/लॉरी से होने वाले हादसों में भी सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं.
हादसों के मुख्य कारण
- ओवर-स्पीडिंग: 58.6% मौतों का कारण तेज रफ्तार थी.
- लापरवाही से ड्राइविंग: 23.6% मौतों की वजह खतरनाक या लापरवाही से गाड़ी चलाना और गलत तरीके से ओवरटेक करना था.
- अन्य कारण: खराब मौसम, नशे में ड्राइविंग और जानवरों के सड़क पर आ जाने से 2.8% मौतें हुईं.
कहां हुए सबसे ज्यादा घातक हादसे?
- नेशनल हाईवे: सबसे ज्यादा 34.6% मौतें (60,127) नेशनल हाईवे पर हुईं.
- स्टेट हाईवे: 23.4% मौतें (40,611) स्टेट हाईवे पर हुईं.
- अन्य सड़कें: बाकी 42% मौतें (73,088) अन्य सड़कों पर हुईं.
नेशनल हाईवे पर होने वाली मौतों में उत्तर प्रदेश (11.7%) सबसे आगे रहा.
कुछ राज्यों में स्थिति ज्यादा गंभीर
आमतौर पर हादसों में मरने वालों से ज्यादा लोग घायल होते हैं, लेकिन कुछ राज्यों में इसका उलटा है. झारखंड, पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश और अंडमान-निकोबार में हादसों में घायल होने वालों से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है, जो दिखाता है कि यहां होने वाले हादसे कितने गंभीर होते हैं.
भारत में साइबर क्राइम 31% बढ़ा, ऑनलाइन धोखाधड़ी सबसे आम: NCRB रिपोर्ट
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2023 की ताजा रिपोर्ट ने भारत में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में साइबर क्राइम के मामलों में 31 प्रतिशत की भारी उछाल देखी गई है.
2022 में जहां 65,983 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 86,420 हो गई. अपराध दर (प्रति एक लाख की आबादी पर अपराध) भी 2022 में 4.8 से बढ़कर 2023 में 6.2 हो गई है.
क्यों किए जाते हैं ये साइबर अपराध?
रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर साइबर अपराधों का मकसद लोगों को धोखा देकर पैसे ठगना होता है.
- धोखाधड़ी: लगभग 69% (59,526 मामले) साइबर अपराधों का मकसद ऑनलाइन फ्रॉड करना था.
- यौन शोषण: 4,199 मामले यौन शोषण के इरादे से किए गए.
- जबरन वसूली: 3,326 मामलों में लोगों से पैसे वसूले गए.
- बदला लेना: 2,228 मामले गुस्से या निजी बदला लेने के लिए किए गए.
- राजनीतिक कारण: 205 मामलों के पीछे राजनीतिक मकसद थे.
कौन से राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
अपराध दर के हिसाब से देखें तो,
- तेलंगाना: यहां अपराध दर सबसे ज्यादा (47) है. तेलंगाना में कुल 18,236 मामले दर्ज हुए.
- कर्नाटक: 32.3 की अपराध दर के साथ दूसरे स्थान पर है, यहां 21,889 मामले सामने आए.
- उत्तर प्रदेश: यहां 10,794 मामले दर्ज हुए, लेकिन राज्य की विशाल आबादी के कारण यहां अपराध दर काफी कम (4.6) है.
एक और दिलचस्प बात यह है कि सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने के कुल 209 मामलों में से लगभग आधे (98 मामले) अकेले तेलंगाना में दर्ज हुए.
बड़े शहरों और अन्य अपराधों का हाल
बड़े महानगरों (20 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर) में भी साइबर क्राइम तेजी से बढ़ा है. 2023 में इन शहरों में कुल 33,955 मामले दर्ज हुए, जो 2022 के मुकाबले 39% ज्यादा हैं.
अन्य प्रमुख साइबर अपराधों में शामिल हैं:
- अश्लील सामग्री फैलाना (2,168 मामले).
- बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री के मामले (1,472).
- महिलाओं और बच्चों को ऑनलाइन परेशान करना या पीछा करना (Cyberbullying/Stalking) के 1,305 मामले.
- साइबर ब्लैकमेलिंग और धमकी देने के 689 मामले.
यह रिपोर्ट साफ तौर पर दिखाती है कि जैसे-जैसे हम डिजिटल दुनिया पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं, ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सावधान रहना और भी जरूरी हो गया है.
भारत में बढ़ता 'अचानक मौत' का खतरा: हर दिन 100 से ज्यादा जानें ले रहा हार्ट अटैक
भारत में अचानक होने वाली मौतें एक गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की हालिया रिपोर्ट ने कुछ ऐसे आंकड़े पेश किए हैं, जो न सिर्फ डराने वाले हैं, बल्कि हमें अपनी सेहत के प्रति गंभीर होने की चेतावनी भी दे रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में हमारे देश में हर दिन औसतन 175 लोगों की अचानक मौत हुई. और भी चिंता की बात यह है कि इनमें से करीब 100 मौतें सीधे तौर पर दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने से हुईं.
आंकड़े क्या कहते हैं?
NCRB के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर और साफ हो जाती है. साल 2023 में भारत में कुल 63,609 लोगों ने अचानक अपनी जान गंवाई. इनमें से 35,637 मौतें दिल के दौरे के कारण हुईं. इसका मतलब है कि भारत में होने वाली लगभग 60% अचानक मौतों की वजह हमारा दिल बन रहा है.
यह ट्रेंड लगातार बढ़ रहा है. साल 2022 में जहां हार्ट अटैक से 32,410 मौतें हुई थीं, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 35,637 हो गई. यानी सिर्फ एक साल में ही दिल के दौरे से मरने वालों की संख्या में करीब 10% की बढ़ोतरी हुई है.
कौन से राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित?
अचानक मौतों के मामले में महाराष्ट्र सबसे ऊपर है. 2023 में यहां 21,310 अचानक मौतें दर्ज की गईं, जिनमें से 14,165 मौतें हार्ट अटैक से हुईं. महाराष्ट्र के बाद केरल (4,345 मौतें) और कर्नाटक (2,352 मौतें) का नंबर आता है. हैरानी की बात यह है कि देश में हार्ट अटैक से हुई कुल मौतों में से 59% मौतें सिर्फ इन्हीं तीन राज्यों में हुई हैं.
एक और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि ओडिशा, पुडुचेरी और लक्षद्वीप जैसे राज्यों में जितनी भी अचानक मौतें हुईं, उन सभी की वजह सिर्फ और सिर्फ हार्ट अटैक ही थी.
किन लोगों पर है सबसे ज्यादा खतरा?
रिपोर्ट से पता चलता है कि अचानक मौत का सबसे ज्यादा असर 45 से 60 साल की उम्र के लोगों पर पड़ रहा है. इसके अलावा, 30 से 45 साल की उम्र के लोग भी बड़ी संख्या में इसका शिकार हो रहे हैं.
अगर लिंग के आधार पर देखें तो दिल के दौरे से मरने वालों में 30,999 पुरुष, 4,634 महिलाएं और 4 ट्रांसजेंडर शामिल थे. ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि पुरुषों को महिलाओं की तुलना में हार्ट अटैक का खतरा कई गुना ज्यादा है.
क्या है इन मौतों की वजह?
जब से यह ट्रेंड बढ़ा है, कई लोग इसे कोविड-19 वैक्सीन से जोड़कर देख रहे थे. हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय ने जुलाई 2023 में स्पष्ट किया था कि कई अध्ययनों में वैक्सीन और अचानक मौतों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन मौतों के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे:
- खराब लाइफस्टाइल: तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान और गलत खान-पान.
- जेनेटिक्स: परिवार में पहले से किसी को दिल की बीमारी होना.
- पहले से मौजूद बीमारियां: डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा.
- पोस्ट-कोविड जटिलताएं: कोरोना से ठीक होने के बाद शरीर में आई कमजोरियां.
इस गंभीर मुद्दे को समझते हुए ICMR और NCDC जैसी संस्थाएं 18 से 45 साल के युवाओं में अचानक मौतों के कारणों का पता लगाने के लिए अलग-अलग स्टडी भी कर रही हैं.
ये आंकड़े एक बड़ी चेतावनी हैं कि हमें अपनी जीवनशैली और दिल की सेहत को गंभीरता से लेने की जरूरत है.













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