'मेरे बेटे को रूस ने मजबूर कर जंग में भेजा...', मां की गुहार पर दिल्ली HC ने सरकार को दिया छात्र को यूक्रेन से लाने का निर्देश
Delhi High Court | PTI

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में कई भारतीय युवाओं को नौकरी या पढ़ाई का झांसा देकर युद्ध क्षेत्र में भेजे जाने के मामले सामने आ चुके हैं. ताजा मामला गुजरात के मोरबी जिले का है, जहां एक मां अपने बेटे की जिंदगी बचाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी है. 23 वर्षीय माजोती साहिल मोहम्मद हुसैन (Majoti Sahil Mohammed Hussain) पढ़ाई के लिए स्टूडेंट वीजा पर रूस गया था. लेकिन आरोप है कि वहां उसे झूठे केस में फंसाकर पैसे की मांग की गई और फिर उसे जबरन यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में लड़ने भेज दिया गया.

साहिल की मां, हसीनाबेन एक कैंसर की मरीज हैं उन्होंने कहा कि अप्रैल 2024 तक साहिल का संपर्क परिजनों से था. आखिरी बार उसने अपने मामा को पुलिस गिरफ्तारी की जानकारी दी. लेकिन कॉल अचानक कट गई. तब से परिवार उसकी कोई जानकारी हासिल नहीं कर पाया है.

दिल्ली हाई कोर्ट आया परिवार

साहिल की मां ने वकील रॉबिन राजू और दीपा जोसेफ के जरिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की. उन्होंने कहा, साहिल को फंसाकर युद्ध में भेजा गया. केंद्र सरकार को उसकी वापसी के लिए कदम उठाने चाहिए. प्रधानमंत्री और कई अधिकारियों को भी प्रतिनिधित्व किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई परिणाम नहीं मिला.

कोर्ट का आदेश: विदेश मंत्रालय तुरंत कदम उठाए

जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने इस मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए कहा भारत सरकार साहिल की लोकेशन और सुरक्षा की जानकारी तुरंत जुटाए साथ ही उसे जल्द से जल्द भारत लाने के उपाय शुरू किए जाएं. कोर्ट ने अह भी आदेश दिया कि साहिल की उनके बेटे से बात कराने की कोशिश हो और यूक्रेनी दूतावास से संपर्क करने लिए एक लिआज़ॉन ऑफिसर नियुक्त किया जाए.

सरकार के वकील ने क्या कहा?

केंद्र सरकार की वकील निधि रमन का दावा है कि, “साहिल ने खुद से रूसी सेना में शामिल होकर बाद में यूक्रेन में सरेंडर किया है.” मगर साहिल की मां का कहना है कि साहिल को जबरन युद्ध में भेजा गया और वे अपने बेटे की ज़िंदगी को लेकर बेहद चिंतित हैं.

कोर्ट ने कहा कि विदेश मंत्रालय मामले में अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करे. अगली सुनवाई 4 दिसंबर को होगी.