BMC Pink Toilet Row: मुंबई के फोर्ट इलाके में महिलाओं के ‘पिंक टॉयलेट’ में खुला कैफे, स्वच्छता को लेकर बीएमसी पर उठे सवाल
मुंबई के फोर्ट इलाके में महिलाओं के लिए बनाई गई 'पिंक टॉयलेट' बस के पिछले हिस्से में एक कैफे संचालित किया जा रहा है. स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं.
BMC Pink Toilet Row: मुंबई के फोर्ट इलाके में आज़ाद मैदान के पास ‘फैशन स्ट्रीट’ पर महिलाओं की सुविधा के लिए खड़ी की गई बीएमसी की ‘पिंक टॉयलेट’ बस इन दिनों चर्चा में है. मिड-डे की एक रिपोर्ट के अनुसार, चर्चा का कारण इसकी सुविधा नहीं, बल्कि बस के पिछले हिस्से में चल रहा एक कैफे (ईटरी) है. ‘महिलासाथी स्वच्छतागृह’ पहल के तहत पुरानी बेस्ट बसों को मॉडिफाई कर बनाए गए इन शौचालयों का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और साफ-सुथरी जगह उप
राजनीतिक कनेक्शन और दावों का उलझाव
इस दुकान को चलाने वाली महिला, गीता मेहर ने दावा किया है कि वह स्थानीय पूर्व कॉर्पोरेटर मकरंद नार्वेकर के कार्यालय में काम करती हैं. उन्होंने बताया कि उनके पास दुकान चलाने के लिए मकरंद नार्वेकर की मंजूरी है. हालांकि, जब उनके पास जरूरी लाइसेंस और परमिशन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज कॉर्पोरेटर के पास हैं. यह भी पढ़े: Nanded: सरकारी हॉस्पिटल में एडमिट महिला मरीज पर रेंग रहे है चूहे, साफ सफाई को लेकर उठे सवाल, नांदेड का वीडियो आया सामने; VIDEO
इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब 28 मार्च 2026 की तारीख वाला एक पत्र सामने आया. यह पत्र भाजपा विधायक राहुल नार्वेकर के लेटरहेड पर है, जिसमें बीएमसी के 'ए' वार्ड अधिकारी से गीता मेहर की समस्याओं में सहायता करने का अनुरोध किया गया है. पत्र में उल्लेख है कि वह 'पिंक टॉयलेट/कैंटीन' का प्रबंधन कर रही हैं.
विधायक राहुल नार्वेकर की सफाई
जब इस संबंध में विधायक राहुल नार्वेकर से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सिफारिश केवल नियमों के दायरे में आवेदन पर विचार करने के लिए थी. उन्होंने कहा, "इसका मतलब यह नहीं है कि बिना वैध अनुमति के दुकान चलाई जाए. मुझे नहीं पता कि यह दुकान क्यों और किसकी अनुमति से चल रही है. यह देखना बीएमसी का काम है. हम कानून के दायरे से बाहर किसी भी गतिविधि को बढ़ावा नहीं देते हैं."
स्वच्छता और सुरक्षा पर उठते सवाल
फैशन स्ट्रीट पर खरीदारी करने आने वाली महिलाओं और पर्यटकों ने इस सेटअप पर कड़ी आपत्ति जताई है. लोगों का तर्क है कि एक ही बस में आगे शौचालय और पीछे खाने की दुकान होना पूरी तरह से अस्वास्थ्यकर (Unhygienic) है.
बीएमसी की चुप्पी
इस पूरे विवाद पर बीएमसी के 'ए' वार्ड के सहायक आयुक्त और पूर्व कॉर्पोरेटर मकरंद नार्वेकर की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. ईमेल और संदेशों के बावजूद अधिकारियों ने इस दुकान की वैधता पर चुप्पी साध रखी है.
क्या है 'टॉयलेट ऑन व्हील्स' पहल?
बीएमसी ने पुरानी स्क्रैप बसों को रिसाइकिल करके 'पिंक टॉयलेट' बनाने की शुरुआत की थी. इन बसों में टॉयलेट सीट, चेंजिंग रूम, सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन और स्तनपान के लिए समर्पित स्थान (Breastfeeding space) जैसी सुविधाएं दी गई हैं. फैशन स्ट्रीट और मंत्रालय जैसे व्यस्त इलाकों में ये बसें काफी उपयोगी साबित हुई हैं, लेकिन कैफे विवाद ने अब इस पूरी योजना की छवि पर सवालिया निशान लगा दिया है.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 03, 2026 10:23 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

