मुंबई में घर खरीदना सपना ही रह जाएगा? दुबई जितनी हो गई कीमतें, अब 109 साल की बचत से मिलेगा एक फ्लैट
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मुंबई: सपनों का शहर कहलाने वाली मुंबई में अब घर खरीदना औसत भारतीय परिवार के लिए लगभग असंभव होता जा रहा है. ताजा रिपोर्टों के अनुसार, यहां एक आम फ्लैट खरीदने के लिए भारत के टॉप 5 फीसदी कमाने वाले लोगों को भी 109 साल तक पैसे बचाने पड़ सकते हैं, वो भी तब जब वो अपनी आय का 30 फीसदी हर साल बचाएं. नेशनल हाउसिंग बोर्ड (NHB) की रिपोर्ट बताती है कि मुंबई में जमीन और घर की कीमतें अब दुबई से होड़ लेने लगी हैं. मुंबई में औसतन घर की कीमत 26,975 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई है. दुबई में रेट (2024) 27,884 रुपये प्रति वर्ग फुट है.

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टॉप 5 फीसदी परिवार भी नहीं खरीद सकते घर

महाराष्ट्र में शहरी इलाकों के शीर्ष 5 फीसदी परिवारों की मासिक आय लगभग 22,352 रुपये है. इसका मतलब सालाना लगभग 10.7 लाख. अगर ये परिवार हर साल अपनी आय का 30.2 फीसदी (लगभग 3.2 लाख) बचाएं, तो भी एक 1,184 वर्ग फुट का घर खरीदने के लिए 3.5 करोड़ रुपये की जरूरत होगी. तो, गणित के मुताबिक एक घर यानी 109 साल की लगातार बचत.

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बाकी शहरों की क्या स्थिति है?

  • गुड़गांव (हरियाणा): 50 साल से अधिक की बचत लगेगी.
  • भुवनेश्वर: 50 साल से अधिक.
  • चंडीगढ़: सबसे सस्ता, सिर्फ 15 साल की बचत में घर संभव.
  • जयपुर: लगभग 20 साल में घर खरीदना संभव.
  • 21 राज्य की राजधानियों में से 10 शहरों में घर खरीदने के लिए 30 साल से ज्यादा की बचत जरूरी मानी गई है.

आम आदमी के लिए क्या है इसका मतलब?

महंगाई और रियल एस्टेट की कीमतों का फर्क इतना ज्यादा है कि घर अब एक ‘लक्जरी’ बनते जा रहे हैं. मिडल क्लास और लोअर इनकम ग्रुप के लिए घर खरीदने का सपना दूर होता जा रहा है. रेंट पर रहना मजबूरी बनता जा रहा है, और इससे लॉन्ग टर्म में संपत्ति निर्माण की संभावना घट रही है.