Mumbai Gas Crisis: मुंबई में गैस का गहराया संकट, 20 फीसदी से ज्यादा होटल बंद, कारोबारियों को हर दिन हो रहा है लाखों का नुकसान

मुंबई में कमर्शियल एलपीजी (LPG) और पीएनजी (PNG) की भारी किल्लत के चलते होटल और रेस्टोरेंट कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कई रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर हैं और कारोबारियों को रोजाना लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है.

(Photo Credits Pixabay)

Mumbai Gas Crisis:  देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इन दिनों गैस की भारी किल्लत ने होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की कमर तोड़ दी है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की आपूर्ति में आई भारी गिरावट से शहर के लगभग 20% छोटे और मध्यम दर्जे के रेस्टोरेंट अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं. वहीं, जो रेस्टोरेंट खुले हैं, वे सीमित मेनू और बढ़े हुए खर्च के कारण रोजाना लाखों रुपये का घाटा झेल रहे हैं.

बंद होने की कगार पर आधे से ज्यादा रेस्टोरेंट

मुंबई के प्रमुख होटल संगठन 'आहार' (AHAR) और फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FHRAI) ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो शहर के 50% से अधिक होटल बंद हो सकते हैं. संगठन के अनुसार, कई होटलों के पास केवल एक या दो दिन का स्टॉक बचा है. गैस की कमी के कारण विशेष रूप से तवा और हाई-फ्लेम पर बनने वाले व्यंजनों (जैसे तंदूरी और चाइनीज) की सर्विस बंद करनी पड़ी है. यह भी पढ़े:  Mumbai-Bengaluru Gas Crisis: मिडिल ईस्ट तनाव का असर, मुंबई और बेंगलुरु में गैस संकट गहरा, सैकड़ों होटलों में लगे ताले

कालाबाजारी और बढ़ती लागत की मार

गैस की किल्लत का फायदा उठाकर बाजार में सिलेंडरों की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है. कारोबारियों का आरोप है कि जो कमर्शियल सिलेंडर पहले लगभग 1,840 रुपये में मिलता था, वह अब ग्रे मार्केट में 3,000 रुपये तक में बेचा जा रहा है.

लागत में इस भारी बढ़ोतरी और ग्राहकों की कमी के कारण होटल मालिकों को हर दिन लाखों रुपये का शुद्ध नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसके अलावा, पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) की आपूर्ति में भी 20% तक की कटौती की गई है, जिससे संकट और गहरा गया है.

संकट के पीछे मुख्य कारण

गैस की इस किल्लत के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:

वैकल्पिक ऊर्जा के सीमित साधन

होटल कारोबारियों का कहना है कि कमर्शियल किचन में इलेक्ट्रिक इंडक्शन या कोयले का इस्तेमाल करना हर किसी के लिए संभव नहीं है. भारतीय व्यंजनों को तैयार करने के लिए जिस आंच और गति की आवश्यकता होती है, वह बिजली के उपकरणों से पूरी नहीं हो पाती. साथ ही, नए इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनाने में भारी निवेश की जरूरत है, जो इस मंदी के दौर में कारोबारियों के लिए मुमकिन नहीं लग रहा.

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