प्राकृतिक आपदाओं पर मायावती की प्रतिक्रिया, केंद्र और राज्य सरकारों से मानवीय रुख अपनाने की अपील
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से उत्पन्न हालात पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि इन आपदाओं के कारण पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, असम सहित कई राज्यों में ग्रामीण क्षेत्रों में जान-माल और पशुधन की भारी क्षति हो रही है.
लखनऊ, 4 सितंबर : बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati) ने देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से उत्पन्न हालात पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि इन आपदाओं के कारण पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, असम सहित कई राज्यों में ग्रामीण क्षेत्रों में जान-माल और पशुधन की भारी क्षति हो रही है. साथ ही गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहरी इलाकों में जलभराव की समस्या ने करोड़ों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है.
बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि इन कठिन हालातों में जनता को भारी परेशानियों और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि पीड़ितों की मदद के लिए आम लोगों की तरफ से स्वयं आगे आने की खबरें और तस्वीरें संतोषजनक हैं और यह मानवता की भावना को दर्शाता है. यह भी पढ़े : Asia Cup 2025: एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान क्या टूटेगा 13 साल पुराना रिकॉर्ड?
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे इस आपदा के समय अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएं और पीड़ितों की हर संभव सहायता करें. मायावती ने कहा कि सरकारों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तत्काल राहत पहुंचाने के लिए कदम उठाने चाहिए. इसके साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने सुझाव दिया कि भविष्य में इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए बुनियादी जनसुविधाओं और ढांचे पर लगातार ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि हर साल आम जनजीवन, खासकर किसानों, गरीबों, मजदूरों और मेहनतकश लोगों की रोजी-रोटी पर इस तरह का विपरीत असर न पड़े.
गौरतलब है कि इस बार मानसून में पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों में भारी बारिश हुई है. पहाड़ों में बारिश के साथ भूस्खलन और बादल फटने जैसे घटनाएं भी हुईं. पहाड़ों पर भारी बारिश और बादल फटने जैसे घटनाओं के कारण मैदानी इलाकों में हालात और गंभीर हुए हैं. नदियां उफान पर हैं. पिछले दो महीने में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की इन घटनाओं में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है.