MP News: मध्य प्रदेश के मंडला में ऑटो रिक्शा में महिला ने चार बच्चों को दिया जन्म, चारों नवजातों की मौत; परिजनों ने एम्बुलेंस न मिलने का लगाया आरोप

मध्य प्रदेश के मंडला जिले में अस्पताल ले जाते समय एक महिला ने ऑटो रिक्शा में चार बच्चों को जन्म दिया. समय से पहले पैदा हुए चारों नवजातों की मौत हो गई, जिसके बाद परिवार ने एम्बुलेंस सेवा न मिलने का आरोप लगाया है.

MP News:  मध्य प्रदेश के मंडला जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है. यहां अस्पताल ले जाते समय एक महिला ने ऑटो रिक्शा में एक साथ चार बच्चों (क्वाड्रुपलेट्स) को जन्म दिया. हालांकि, जन्म के कुछ ही समय बाद चारों नवजातों की मौत हो गई. स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार (7 जुलाई) को इस घटना की पुष्टि की. पीड़ित परिवार का आरोप है कि समय पर सरकारी एम्बुलेंस न मिलने के कारण इलाज में देरी हुई, जिससे बच्चों की जान चली गई. वहीं, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बच्चों का जन्म सातवें महीने में ही हो गया था और वे पूरी तरह विकसित नहीं थे.

फिलहाल बच्चों की मां, रजनी सिंगाराम, का इलाज बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में चल रहा है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है.  यह भी पढ़े:  Andhra Pradesh: एम्बुलेंस न मिलने पर बीमार छात्रा को पीठ पर लादकर 6 किमी पैदल चली स्कूल वार्डन, बचाई जान (Watch Video)

रास्ते में ऑटो के भीतर हुई डिलीवरी

जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. डी. जे. मोहंती के अनुसार, नैगांव गांव की रहने वाली रजनी सिंगाराम को गर्भावस्था के सातवें महीने में ही प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी. परिजन उन्हें शुरुआत में एक निजी वाहन से घुघस स्थित सरकारी स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए थे.

वहां महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेफर कर दिया. परिजन उन्हें ऑटो रिक्शा से बिछिया ले जा रहे थे, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने वाहन के अंदर ही चार बच्चों को जन्म दे दिया. डॉ. मोहंती ने बताया कि मृत बच्चों में तीन लड़कियां और एक लड़का शामिल है. समय से पहले जन्म (प्रीमेच्योर डिलीवरी) होने के कारण बच्चों का वजन काफी कम, लगभग 1.5 किलोग्राम के आसपास था, जिसके कारण वे जीवित नहीं रह सके.

परिवार का आरोप: नहीं मिली एम्बुलेंस सेवा

मृत बच्चों के पिता गणेश सिंगाराम और अन्य परिजनों का आरोप है कि प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद उन्होंने तुरंत आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा (108) से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन वहां से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. एम्बुलेंस न मिलने पर मजबूरन उन्हें मरीज को ऑटो रिक्शा से ले जाना पड़ा. परिजनों का दावा है कि अगर समय पर एम्बुलेंस मिल जाती, तो बच्चों को सही मेडिकल सपोर्ट मिलता और उनकी जान बचाई जा सकती थी.

प्रशासन का रुख और जांच का आश्वासन

इस पूरे मामले पर मंडला के जिलाधिकारी (डीएम) राहुल नामदेव धोते ने कहा कि प्रशासन को अभी तक इस संबंध में परिजनों की तरफ से कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि परिवार द्वारा लिखित शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग की टीम मां के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है, और उनकी स्थिति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है.

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