Madhya Pradesh: एम्बुलेंस न मिलने पर ऑटो रिक्शा में हुआ प्रसव, महिला ने एक साथ 4 बच्चों को दिया जन्म, सभी नवजातों की मौत

मण्डला: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मण्डला जिले (Mandla District) से स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और लाचारी की एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है. जिले के नैगांव गांव की रहने वाली एक गर्भवती महिला (Pregnant Woman) को प्रसव पीड़ा होने के बाद समय पर सरकारी आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा नहीं मिल सकी. परिजनों का आरोप है कि एम्बुलेंस के लिए बार-बार कॉल करने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसके बाद वे महिला को ऑटो रिक्शा से अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर हुए। अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला ने ऑटो रिक्शा के भीतर ही एक साथ चार बच्चों (क्वाड्रपलेट्स) को जन्म दे दिया। हालांकि, कुछ ही समय बाद चारों नवजात शिशुओं की मौत हो गई. यह भी पढ़ें: Mumbai: कुर्ला में लुका छुपी खेलते समय दर्दनाक हादसा, लिफ्ट के शाफ्ट में गिरने से 12 वर्षीय बच्चे की मौत; सोसायटी पर लापरवाही का आरोप

रास्ते में ऑटो रिक्शा के भीतर हुआ प्रसव

मण्डला जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. डी.जे. मोहंती ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि नैगांव निवासी रजनी सिंगराम को गर्भावस्था के सातवें महीने में ही अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी. परिजन उन्हें शुरुआत में एक निजी वाहन की मदद से घुघस स्थित सरकारी स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए थे.

स्वास्थ्य केंद्र में महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत बिछिया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के लिए रेफर कर दिया. गंभीर हालत में महिला को बिछिया ले जाने के लिए जब कोई एम्बुलेंस नहीं मिली, तो परिजनों ने आनंद-फानन में एक ऑटो रिक्शा का इंतजाम किया, लेकिन अस्पताल के गेट तक पहुंचने से पहले ही महिला ने वाहन के अंदर ही चारों बच्चों को जन्म दे दिया.

सातवें महीने में हुआ था जन्म, बेहद कम था वजन

डॉ. मोहंती के अनुसार, महिला ने तीन लड़कियों और एक लड़के को जन्म दिया था. उन्होंने बताया, "चारों बच्चों की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले या तुरंत बाद हो गई, क्योंकि उनका जन्म गर्भावस्था के सातवें महीने में ही हो गया था. समय से पहले (प्रीमैच्योर) पैदा होने के कारण बच्चों के अंग पूरी तरह विकसित नहीं थे और उनमें से प्रत्येक का वजन केवल 1.5 किलोग्राम के आसपास था." चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि अत्यधिक प्रीमैच्योरिटी और कम वजन के चलते ऐसे मामलों में बच्चों को बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है वर्तमान. में मां रजनी सिंगराम को बिछिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है और वे खतरे से बाहर हैं.

परिजनों का आरोप- एम्बुलेंस मिलती तो बच जाती जान

दूसरी ओर, पीड़ित महिला के पति गणेश सिंगराम और अन्य परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग के दावों पर कड़ा आक्रोश जताया है. गणेश का कहना है कि जैसे ही रजनी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई, उन्होंने तुरंत सरकारी आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा को फोन किया था, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला.

घंटों इंतजार करने के बाद जब रजनी की हालत बिगड़ने लगी, तब उन्होंने मजबूरी में ऑटो रिक्शा किराए पर लिया. पति का आरोप है कि अगर स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय पर एम्बुलेंस मिल जाती और रास्ते में ही ऑक्सीजन व प्राथमिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध होती, तो उनके चारों बच्चों को बचाया जा सकता था.

जिला कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

इस संवेदनशील मामले के सामने आने और मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद प्रशासनिक अमला भी हरकत में आया है. मण्डला के जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) राहुल नामदेव धोते ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रशासन को अभी तक इस घटना के संबंध में परिजनों की ओर से कोई औपचारिक या लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है.

कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि जैसे ही परिवार की ओर से आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी, एम्बुलेंस सेवा में देरी और लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष व विस्तृत जांच कराई जाएगी. यदि जांच में एम्बुलेंस ऑपरेटर या स्वास्थ्य केंद्र के अधिकारियों की ओर से कोई ढिलाई या आपराधिक लापरवाही पाई जाती है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.