लद्दाख में हिंसा के बाद ताबड़तोड़ एक्शन, छापेमारी में 50 लोग गिरफ्तार, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात

लद्दाख में राज्य का दर्जा मांगने को लेकर हुई हिंसक झड़पों के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 50 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. केंद्र सरकार ने इस हिंसा के लिए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के भड़काऊ भाषणों को जिम्मेदार ठहराया है. इस हिंसा में 4 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी, जिसके बाद लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया है.

(Photo Credit: X)

लद्दाख में बुधवार को हुई हिंसा और आगजनी के बाद पुलिस ने बहुत बड़ी कार्रवाई की है. लेह में सुबह होने से पहले ही कई जगहों पर छापेमारी की गई और करीब 50 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. यह एक्शन उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता के उस वादे के बाद हुआ, जिसमें उन्होंने हिंसा में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी.

पुलिस ने इस मामले में कांग्रेस पार्षद फुंटसोग स्टैनज़िन त्सेपाग के खिलाफ भी FIR दर्ज की है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि लेह हिल काउंसिल के पार्षद को गिरफ्तार किए गए 50 लोगों में शामिल किया गया है या नहीं.

केंद्र ने सोनम वांगचुक को ठहराया जिम्मेदार

इस बीच, केंद्र सरकार ने इस पूरी हिंसा के लिए जाने-माने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक और उनके "भड़काऊ भाषणों" को जिम्मेदार ठहराया है. बुधवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़प और फायरिंग में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 90 अन्य घायल हो गए थे.

हिंसा के बाद लेह जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है और हालात को काबू में रखने के लिए स्थानीय पुलिस और CRPF के साथ-साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) को भी तैनात किया गया है.

क्या हुआ था बुधवार को?

बुधवार को गुस्साई भीड़ ने लद्दाख में बीजेपी ऑफिस और लद्दाख हिल काउंसिल सचिवालय में आग लगा दी थी. बीजेपी ने इस हिंसा के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराया और पार्षद त्सेपाग की तस्वीरें जारी करते हुए दावा किया कि वह हिंसक भीड़ का हिस्सा थे.

गृह मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि सोनम वांगचुक ने अपने भाषणों से भीड़ को उकसाया. वांगचुक पिछले 15 दिनों से लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर थे. हिंसा भड़कने के तुरंत बाद उन्होंने अपनी हड़ताल खत्म कर दी. सरकार का कहना है कि वांगचुक ने लोगों को भड़काने के लिए नेपाल में हुए 'जेन Z' विरोध और 'अरब स्प्रिंग' जैसी बातों का जिक्र किया.

क्यों हो रहा है लद्दाख में प्रदर्शन?

पिछले तीन सालों से लद्दाख में केंद्र के सीधे शासन को लेकर असंतोष बढ़ रहा है. स्थानीय लोग अपनी जमीन, संस्कृति और संसाधनों की रक्षा के लिए राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.

अगस्त 2019 में जब अनुच्छेद 370 हटाकर लद्दाख को एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था, तब सोनम वांगचुक सहित कई लोगों ने इसका स्वागत किया था. लेकिन एक साल के अंदर ही लोगों को लगने लगा कि उपराज्यपाल के शासन में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है.

इसी वजह से बौद्ध बहुल लेह और मुस्लिम बहुल कारगिल के लोग पहली बार एक साथ आए और अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. इस साल मार्च में जब लद्दाखी नेताओं ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, तो वह बातचीत भी विफल हो गई. नेताओं का कहना है कि गृह मंत्री ने उनकी मुख्य मांगों को मानने से इनकार कर दिया.

Share Now

\