बेंगलुरु, 5 अगस्त: कर्नाटक में एक 22 साल के लिंगायत संत (Lingayat Saint) को अपनी गद्दी छोड़नी पड़ी. वजह ये थी कि भक्तों को पता चल गया कि वह जन्म से मुस्लिम थे. इस खुलासे के बाद स्थानीय समुदाय में विरोध शुरू हो गया और संत को पद से हटने के लिए मजबूर किया गया.
क्या है पूरा मामला?
इन संत का नाम निजलिंग स्वामी (Nijalinga Swamy) है. उन्होंने सिर्फ छह हफ़्तों पहले ही कर्नाटक के चामराजनगर ज़िले में मौजूद गुरुमल्लेश्वर शाखा मठ की ज़िम्मेदारी संभाली थी. उनका जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था और उनका पुराना नाम मोहम्मद निसार (Mohammed Nisar) था.
12वीं सदी के महान समाज सुधारक बसवन्ना के विचारों से वह इतने प्रभावित हुए कि 17 साल की उम्र में उन्होंने लिंगायत धर्म अपना लिया और 'बसव दीक्षा' ले ली.
कैसे सामने आई सच्चाई?
विवाद तब शुरू हुआ, जब मठ के एक कर्मचारी के हाथ स्वामी का पुराना मोबाइल फ़ोन लग गया. उस फ़ोन में उन्हें स्वामी का आधार कार्ड मिला, जिसमें उनका जन्म का नाम और धर्म (मुस्लिम) लिखा था.
इसके अलावा, उनकी कुछ पुरानी तस्वीरें भी मिलीं, जिनमें वह मुस्लिम टोपी पहने और बीयर की बोतल के साथ दिख रहे थे. इन तस्वीरों ने विवाद को और हवा दे दी. हालांकि, स्वामी ने साफ़ किया कि ये तस्वीरें दीक्षा लेने से पहले की हैं, जब वह आम जीवन जी रहे थे.
स्वामी ने क्या कहा?
निजलिंग स्वामी ने पत्रकारों से कहा, "मैंने बसवन्ना की शिक्षाओं को अपनी मर्ज़ी और विश्वास से अपनाया है. दीक्षा लेने के बाद मैंने कोई भी गलत काम नहीं किया है और मैं आज भी आध्यात्मिक रास्ते पर चल रहा हूं."
भक्तों के भारी दबाव के बाद उन्होंने अपना पद छोड़ दिया. अब उन्होंने हावेरी ज़िले के एक दूसरे लिंगायत मठ में शरण ली है. उन्होंने कहा है कि आलोचना के बावजूद वह बसवन्ना की विचारधारा का प्रचार करना जारी रखेंगे.
स्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि अब उन्हें बदनाम करने के लिए उन पर पैसों के गबन के झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं.
क्या ऐसा पहली बार हुआ है?
नहीं, यह कोई पहला मामला नहीं है. साल 2020 में, दीवान शरीफ रहीमसाब मुल्ला नाम के एक व्यक्ति भी लिंगायत मठ के प्रमुख बने थे, जो पहले एक ऑटो-रिक्शा ड्राइवर थे.
इस बीच, लिंगायत समुदाय के कुछ लोगों और आध्यात्मिक गुरुओं ने निजलिंग स्वामी का समर्थन किया है. उनका कहना है कि बसवन्ना की शिक्षाएं किसी भी जाति और धर्म की सीमाओं से परे हैं और सभी के लिए खुली हैं.












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