Karnataka Bandh Today: सरकारी और प्राइवेट नौकरियों में कन्नड़ भाषी लोगों को आरक्षण देने की मांग, कर्नाटक आज रहेगा बंद

राज्य में कन्नड भाषियों को रोजगार मुहैया और सरोजनी महिषी रिपोर्ट लागू करने की मांग को लेकर कई संगठनों ने गुरुवार को राज्य को बंद बुलाया है. इस बंद से प्रदेश में जनजीवन प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है.

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credits: PTI)

बेंगलुरु: कर्नाटक में सरोजनी महिषी रिपोर्ट (Sarojini Mahishi Report) को लागू करने की मांग को लेकर कर्नाटक संगठनेगला ओक्कुटा (Karnataka Sanghatanegala Okkoota) समेत कई अन्य संगठनों ने गुरुवार को प्रदेश में राज्यव्यापी बंद बुलाया है. उनकी मांग है कि सरकार इस रिपोर्ट को लागू कर कन्नड भाषियों को सरकारी और निजी क्षेत्र में नौकरी दे. उनके द्वारा बुलाए गए इस बंद से शहर में जनजीवन प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है. क्योंकि इस बंद में कैब के साथ ही ट्रेड यूनियन ने भी समर्थन दिया है. हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) ने लोगों से बंद को वापस लेने की अपील की है.

बीएस येदियुरप्पा ने बंद बुलाने वाले संगठनों से अनुरोध करते हुए कहा कि उनकी सरकार पहले ही जहां तक संभव था इस रिपोर्ट को लागू करने के लिए कई कदम उठाए हैं. रिपोर्ट को लेकर और क्या किया जा सकता है. यदि लोग उनसे बातचीत करना चाहते हैं तो वे तैयार हैं. लेकिन उनका अपील है कि बंद बुलाकर लोगों को परेशानी में ना डाला जाए. वहीं कन्नड एवं संस्कृति मंत्री सीटी रवि ने कहा कि सरकार इस रिपोर्ट को लागू करने को लेकर प्रतिबद्ध है तो फिर बंद बुलकर कोई मतलब नहीं है. इससे लोगों को सिर्फ परेशान होना पड़ेगा. यह भी पढ़े: आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने 23 फरवरी को बुलाया भारत बंद

ओक्कुटा के अध्यक्ष एचबी नागे ने कहा कि उनकी तरफ से सरोजनी महिषी रिपोर्ट को लागू करने को लेकर पिछले कुछ समय मांग की जा रही है. लेकिन सरकार उनकी बातें नहीं सुन रही है. इसलिए राज्यव्यापी बंद बुलाना पड़ा. ओक्कुटा अध्यक्ष ने कहा कि उनके इस बंद में किसान संगठन, ट्रेड यूनियन संगठन और प्रो कन्नड़ संगठन समेत प्रदेश के करीब 700 से अधिक संगठनों का समर्थन प्राप्त है. जो बंद में वे भी शामिल होने वाले हैं.

बता दें कि प्रदेश में कन्नड भाषी लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के विषय पर विचार करने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री सरोजनी महिषी के नेतृत्व में 1984 एक समिति गठित की गई थी जिन्होंने 2 साल बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी. लेकिन संगठन के लोगों की तरफ से कहा जा रहा है जिस रिपोर्ट को सरकार लागू नहीं कर रही है.

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