Rules Changing From June 1, 2026: आगामी 1 जून, 2026 से देश के भीतर कई बड़े विनियामक और वित्तीय बदलाव लागू होने जा रहे हैं. इन नए नियमों का सीधा असर करदाताओं, नौकरीपेशा कर्मचारियों, डिजिटल पेमेंट करने वाले उपभोक्ताओं, बैंक ग्राहकों और प्रॉपर्टी खरीदारों पर पड़ेगा. नए बदलावों के तहत एडवांस टैक्स की समयसीमा, सैलरी अलाउंस में छूट, पैन (PAN) रिपोर्टिंग के कड़े नियम, यूपीआई (UPI) सुरक्षा फीचर्स और सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए नए अनुपालन दिशानिर्देश शामिल हैं.
इन कदमों का उद्देश्य जहां एक तरफ पारदर्शिता और वित्तीय सुरक्षा को बढ़ाना है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है. किसी भी तरह के वित्तीय नुकसान या जुर्माने से बचने के लिए आम नागरिकों और कारोबारियों को इन अपडेटेड नियमों को समझना जरूरी है. यह भी पढ़े: PF Withdrawal: पीएफ का पैसा कब निकालें? जानिए कब मिलता है सबसे ज्यादा फायदा
15 जून तक एडवांस टैक्स की पहली किस्त जरूरी
करदाताओं के लिए इस महीने की सबसे महत्वपूर्ण तारीख 15 जून, 2026 है. इस दिन वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स की पहली किस्त जमा करने की अंतिम तिथि है. जिन व्यक्तियों की अनुमानित शुद्ध टैक्स देनदारी 10,000 रुपये से अधिक है, उन्हें नियत तारीख तक अपने एडवांस टैक्स का 15 प्रतिशत भुगतान करना होगा.
यह नया एडवांस टैक्स चक्र पूरी तरह से नए आयकर अधिनियम 2025 और आयकर नियम 2026 के तहत संचालित हो रहा है. समयसीमा से चूकने वाले करदाताओं पर प्रति माह 1 प्रतिशत की दर से ब्याज जुर्माना लगाया जा सकता है.
पुरानी टैक्स व्यवस्था वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत
पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) का विकल्प चुनने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों को कई भत्तों (Allowances) पर संशोधित छूट सीमा का लाभ मिलेगा. इसके तहत चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस को बढ़ाकर अब 3,000 रुपये प्रति बच्चा प्रति माह कर दिया गया है. इसके अलावा हॉस्टल अलाउंस को संशोधित कर 9,000 रुपये प्रति माह किया गया है.
एक और बड़ा बदलाव करते हुए 50 प्रतिशत हाउस रेंट अलाउंस (HRA) छूट के दायरे को बढ़ा दिया गया है. पहले यह सुविधा केवल चुनिंदा मेट्रो शहरों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद शहरों के लिए भी लागू कर दिया गया है.
डिजिटल सुरक्षा के लिए UPI और बैंकिंग चार्ज में बदलाव
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक बड़ा सुरक्षा अपडेट ला रहा है. नए सिस्टम के तहत जब भी कोई यूजर क्यूआर (QR) कोड स्कैन करेगा या मोबाइल नंबर दर्ज करेगा, तो यूपीआई ऐप पर प्राप्तकर्ता का बैंक में पंजीकृत सत्यापित नाम दिखाई देगा. इससे पैसे भेजने से पहले सामने वाले की सही पहचान सुनिश्चित हो सकेगी. दूसरी तरफ, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) यूपीआई के माध्यम से सीधे पीएफ निकासी का अंतिम परीक्षण कर रहा है.
बैंकिंग क्षेत्र की बात करें तो कई वाणिज्यिक बैंक इस महीने से एटीएम (ATM) से जुड़े सेवा शुल्कों में संशोधन कर रहे हैं. ग्राहकों को मुफ्त लेनदेन की सीमा समाप्त होने के बाद नकद निकासी, बैलेंस पूछताछ और मिनी-स्टेटमेंट के लिए अधिक शुल्क देना पड़ सकता है.
हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए पैन (PAN) नियम हुए कड़े
संशोधित टैक्स ढांचे के तहत अलग-अलग लेनदेन के लिए पैन (PAN) की आवश्यकताओं में बदलाव किया गया है. अब 50,000 रुपये से अधिक के दैनिक नकद जमा के लिए पैन की अनिवार्य प्रस्तुति की आवश्यकता को हटा दिया गया है. साथ ही 20 लाख रुपये तक के संपत्ति लेनदेन के लिए भी पैन विवरण अनिवार्य नहीं होगा.
हालांकि, 45 लाख रुपये से अधिक के संपत्ति लेनदेन, गिफ्ट डीड और संयुक्त विकास समझौतों के लिए पैन देना पूरी तरह अनिवार्य होगा. इसके अतिरिक्त, 10 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक नकद निकासी स्वचालित रूप से पैन-आधारित रिपोर्टिंग के दायरे में आ जाएगी.
LPG कीमतें और नए सोलर प्रोजेक्ट्स के नियम
तेल विपणन कंपनियां 1 जून से एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की कीमतों की समीक्षा करेंगी. पिछले महीने कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई थी, इसलिए इस बार उपभोक्ताओं की नजरें नई दरों पर टिकी हैं. दूसरी ओर, पीपीएफ (7.1%) और सुकन्या समृद्धि योजना (8.2%) जैसी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें इस तिमाही के लिए अपरिवर्तित रहेंगी.
ऊर्जा क्षेत्र में 1 जून, 2026 से सभी सरकारी सहायता प्राप्त और सब्सिडी वाले सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए स्वीकृत मॉडल और निर्माताओं की सूची (ALMM) के तहत पंजीकृत सोलर मॉड्यूल का उपयोग करना अनिवार्य होगा. सरकार ने साफ किया है कि इसके लिए अब आगे कोई समय विस्तार नहीं दिया जाएगा. इसका उद्देश्य घरेलू सौर विनिर्माण को बढ़ावा देना है.













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