8th Pay Commission News: 8वें वेतन आयोग में देरी से सरकारी कर्मचारी-पेंशनधारी नाराज, यूनियन नेताओं ने दी चेतावनी; 'सिर्फ तारीखें बढ़ाने से नहीं चलेगा काम'
8वें वेतन आयोग के गठन और सुझावों की प्रक्रिया में हो रही देरी ने केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच नाराजगी पैदा कर दी है. कर्मचारी यूनियनों ने 31 मार्च 2026 की नई डेडलाइन को 'वक्त बर्बाद करने वाली' रणनीति बताते हुए जल्द से जल्द वेतन वृद्धि लागू करने की चेतावनी दी है.
8th Pay Commission News: केंद्र सरकार के लगभग 48 लाख कर्मचारियों और 67 लाख पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सब्र का बांध अब टूटता नजर आ रहा है. आयोग द्वारा सुझाव जमा करने की समय सीमा को बढ़ाकर 31 मार्च 2026 करने के फैसले पर कर्मचारी संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है. यूनियन नेताओं का कहना है कि 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल दिसंबर 2025 में ही समाप्त हो चुका है और अब तक नई सिफारिशें लागू हो जानी चाहिए थीं.
'सिर्फ आश्वासन से नहीं भरेगा पेट'
नेशनल काउंसिल (JCM) और विभिन्न रेलवे व रक्षा कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने सरकार के ढुलमुल रवैये को आड़े हाथों लिया है. कर्मचारी नेताओं का तर्क है कि 1 जनवरी 2026 की प्रभावी तारीख निकल जाने के बावजूद अभी तक केवल 'प्रश्नावली और फीडबैक' का खेल चल रहा है. यह भी पढ़े: 8th Pay Commission News: 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा अपडेट, सिर्फ सैलरी ही नहीं, काम के आधार पर इन्क्रीमेंट और DA मर्जर की तैयारी में सरकार
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नाराजगी की वजह: कर्मचारियों का मानना है कि बार-बार तारीखें बढ़ाकर सरकार केवल वक्त काट रही है, जबकि महंगाई आसमान छू रही है.
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चेतावनी: यूनियन नेताओं ने साफ किया है कि अगर 31 मार्च के बाद भी कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी, तो वे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की राह पकड़ सकते हैं.
न्यूनतम वेतन ₹54,000 की मांग पर अड़े कर्मचारी
देरी के बीच कर्मचारियों ने अपनी मांगों को और भी स्पष्ट और कड़ा कर दिया है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 10 वर्षों में जीवन यापन की लागत कई गुना बढ़ गई है, इसलिए ₹18,000 की मौजूदा न्यूनतम सैलरी अब प्रासंगिक नहीं है.
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वेतन में तीन गुना वृद्धि: कर्मचारी यूनियनों ने न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) को सीधे ₹54,000 करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.00 या उससे अधिक करने की मांग दोहराई है.
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वेतन विसंगति: कर्मचारियों का आरोप है कि पिछली बार की तरह इस बार भी अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के वेतन में बड़ा अंतर रखने की कोशिश की जा रही है, जो उन्हें मंजूर नहीं है.
पेंशनभोगियों में भी गहरा रोष
केवल सेवारत कर्मचारी ही नहीं, बल्कि लाखों बुजुर्ग पेंशनभोगी भी इस सुस्त प्रक्रिया से खासे परेशान हैं. पेंशनभोगी संगठनों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत के बीच पेंशन संशोधन में देरी उनके साथ अन्याय है.
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मेडिकल अलाउंस: फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹3,000 करने में हो रही देरी पर भी पेंशनभोगियों ने नाराजगी जाहिर की है.
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एरियर का इंतजार: हालांकि नियम के अनुसार एरियर 1 जनवरी 2026 से ही मिलेगा, लेकिन बुजुर्गों का कहना है कि उन्हें 'भविष्य के वादों' से ज्यादा 'वर्तमान की आर्थिक सुरक्षा' की जरूरत है.
सोशल मीडिया पर छिड़ा अभियान
असंतोष का आलम यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #8thPayCommissionNow और #NoMoreDelay जैसे कैंपेन तेजी से वायरल हो रहे हैं. कर्मचारी संगठनों ने संकेत दिया है कि यदि अप्रैल के पहले सप्ताह तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक घोषणा नहीं होती है, तो वे 'काम रोको' जैसे सख्त कदम उठाने पर विचार कर सकते हैं. अब देखना यह है कि क्या सरकार कर्मचारियों की इस नाराजगी को भांपकर अपनी गति तेज करती है या नहीं.