7th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों को 7वीं सीपीसी के तहत मिलने वाले इन भत्तों को शायद ही जानते होंगे आप

देशभर के सरकारी महकमों में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू किए जाने के बाद से लाखों कर्मचारियों की सैलरी और भत्ते में बड़ा इजाफा हुआ. इसी के तहत केंद्र सरकार ने सभी श्रेणियों को भुगतान किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण भत्तों में भी संशोधन किया. केंद्रीय वित्त मंत्रालय के मुताबिक बाल शिक्षा भत्ते को 1500 रुपये प्रति माह प्रति बच्चे (अधिकतम 2 बच्चे) से बढ़ाकर 2250 रुपये प्रति बच्चे और हॉस्टल सब्सिडी को 4500 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 6750 रुपये प्रति माह कर दिया गया है. जबकि दिव्यांग महिलाओं के लिए बच्चों की देखभाल हेतु विशेष भत्ते को 1500 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है.

रुपया (Photo Credits: IANS)

7th Pay Commission: देशभर के सरकारी महकमों में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू किए जाने के बाद से लाखों कर्मचारियों की सैलरी और भत्ते में बड़ा इजाफा हुआ. इसी के तहत केंद्र सरकार ने सभी श्रेणियों को भुगतान किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण भत्तों में भी संशोधन किया.

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के मुताबिक कर्मचारियों को मिलने वाले बाल शिक्षा भत्ते को 1500 रुपये प्रति माह प्रति बच्चे (अधिकतम 2 बच्चे) से बढ़ाकर 2250 रुपये प्रति बच्चे और हॉस्टल सब्सिडी को 4500 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 6750 रुपये प्रति माह कर दिया गया है. जबकि दिव्यांग महिलाओं के लिए बच्चों की देखभाल हेतु विशेष भत्ते को 1500 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है.

वहीं, असैन्य लोगों के लिए उच्च योग्यता प्रोत्साहन को 2000–10000 रुपये (अनुदान) से बढ़ाकर 10000-30000 रुपये (अनुदान) कर दिया गया है. जबकि सातवें सीपीसी ने सिफारिश की थी कि एसडीए के साथ दुर्गम स्थल भत्ता (टीएलए) नहीं दिया जाए, लेकिन सरकार ने एसडीए की संशोधित दरों के साथ पूर्व संशोधित दरों पर एससीएलआरए का विकल्प देने का निर्णय लिया है. यह भी पढ़ें:- 7th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों को इसलिए दिया जाता है महंगाई भत्ता, हजारों करोड़ों रुपये का लगता है बजट.

ज्ञात हो कि मोदी सरकार द्वारा तब कुल 34 भत्तों में संशोधनों को मंजूरी दी गई थी, जो कि 1 जुलाई, 2017 से प्रभावी हुआ. भत्तों पर सातवीं सीपीसी की सिफारिशों को केंद्र सरकार ने 6 जुलाई, 2017 को भारत के राजपत्र पर प्रकाशित किया.

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