नई दिल्ली: फरवरी 2026 तक केंद्र सरकार (Central Government) ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) (8th Central Pay Commission) को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दे दी है. इस फैसले के साथ ही 1.1 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के वेतन, भत्तों और पेंशन की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) है, जिसकी मदद से मूल वेतन की गणना की जाती है. माना जा रहा है कि नया वेतन ढांचा 1 जनवरी 2026 से पूर्वव्यापी (Retroactive) प्रभाव से लागू होगा, जो पिछले एक दशक की सबसे बड़ी वेतन वृद्धि साबित हो सकती है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Update: बजट 2026 से सरकारी कर्मचारियों को बड़ी उम्मीदें, क्या कल होगा वेतन वृद्धि का ऐलान?
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर एक समान गुणक (Multiplier) है जिसका उपयोग किसी कर्मचारी के मौजूदा मूल वेतन (Basic Pay) को नए वेतन मैट्रिक्स में बदलने के लिए किया जाता है. यह एक मानक 'ब्रिज' के रूप में कार्य करता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि वेतन में वृद्धि सभी रैंकों—प्रवेश स्तर के कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक—पर समान रूप से लागू हो.
चूंकि महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और भविष्य की पेंशन जैसी सुविधाएं मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में तय की जाती हैं, इसलिए फिटमेंट फैक्टर में वृद्धि होने से कर्मचारी की कुल 'टेक-होम' सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी होती है.
7वें वेतन आयोग की वर्तमान स्थिति
साल 2016 से लागू 7वें वेतन आयोग के ढांचे के तहत वर्तमान में फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय है. इस गुणक के आधार पर ही न्यूनतम मूल वेतन (Level 1) ₹18,000 निर्धारित किया गया था. कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि वर्तमान महंगाई दर और जीवन स्तर को देखते हुए 2.57 की दर अब अपर्याप्त है. वर्तमान में महंगाई भत्ता (DA) 60 प्रतिशत की सीमा को पार कर चुका है, जो आधार वेतन और बढ़ती लागत के बीच के अंतर को दर्शाता है.
8वें वेतन आयोग के लिए संभावित दरें
हालांकि सरकार ने अभी तक आधिकारिक आंकड़ा घोषित नहीं किया है, लेकिन ऐतिहासिक रुझानों और यूनियनों की मांगों के आधार पर निम्नलिखित संभावनाएं जताई जा रही हैं:
- मध्यम अनुमान (86x): इसे सबसे संतुलित विकल्प माना जा रहा है. यदि 2.86 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर ₹51,480 हो जाएगी.
- यूनियन की मांग (00x से 3.68x): प्रमुख कर्मचारी संगठन 3.00 से 3.68 के बीच गुणक की मांग कर रहे हैं। 3.00 का फैक्टर अपनाने पर न्यूनतम वेतन ₹54,000 तक पहुँच सकता है.
- रूढ़िवादी अनुमान (92x से 2.15x): कुछ विश्लेषकों का मानना है कि राजकोषीय स्थिति को देखते हुए सरकार इसे कम भी रख सकती है। 1.92 फैक्टर होने पर न्यूनतम वेतन लगभग ₹34,560 होगा.
समय सीमा और वित्तीय प्रभाव
भारत में वेतन आयोग का गठन आमतौर पर हर दस साल में किया जाता है। 8वें वेतन आयोग को 2025 की शुरुआत में मंजूरी दी गई थी और केंद्रीय बजट 2026 की चर्चाओं के अनुसार, सरकार पर इसका वित्तीय भार ₹2.4 लाख करोड़ से ₹3.2 लाख करोड़ के बीच रहने का अनुमान है.
विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट 2027 के मध्य तक सौंपे, लेकिन वेतन संशोधन 1 जनवरी 2026 से ही लागू माना जाएगा. इसका अर्थ है कि देरी की स्थिति में कर्मचारियों को पिछले समय का भारी एरियर (Arrears) भी मिलेगा.












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