7th Pay Commission: रक्षा पेंशन से जुड़ी ये बातें शायद ही जानते होंगे आप, खर्च होता है बजट का बड़ा हिस्सा
रुपया (Photo Credits: PTI)

7th Pay Commission: रक्षा पेंशन (Defense Pension) का भुगतान एक जटिल प्रक्रिया होती है. इस प्रक्रिया में कई एजेंसियों को शामिल किया जाता है. मोदी सरकार ने लंबे समय से चली आ रही ‘वन रैंक वन पेंशन’ की मांग को कुछ साल पहले ही पूरा किया है. जिसका फायदा देशभर में लाखों रक्षा पेंशनरों को मिल रहा हैं. जबकि रक्षा पेंशन से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए रक्षा पेंशन अदालत बनाया गया है. सैन्य बलों के पूर्व कर्मियों और उनके आश्रितों की पेंशन से संबंधित शिकायतों को दूर करने का काम रक्षा पेंशन अदालत के जरिए होता है.

केंद्र सरकार ने पेंशन से संबंधित सभी शिकायतों का एक मंच पर निपटान करने के लिए एक व्यापक पेंशन पोर्टल भी बनाया हुआ है. रक्षा पेंशन के लिए बजट अनुमान 2019-20 में 1,12,079.57 करोड़ रुपये की राशि उपलब्‍ध कराई गई है. जबकि रक्षा पेंशन सहित कुल रक्षा आवंटन (4,31,010.79 करोड़ रुपए), वित्त वर्ष 2019-20 के लिए केंद्र सरकार के कुल व्यय का 15.47 प्रतिशत है. 7th Pay Commission: कोरोना संकट से अधर में लटकी सरकारी कर्मचारियों की यह मांग, जल्द फैसले की उम्मीद नहीं

उल्लेखनीय है कि सरकार ने 5 सितंबर, 2015 को वन रैंक वन पेंशन लागू किया. इसके तहत पिछले पेंशन भोगियों की पेंशन का पुन:नियतन कलेंडर वर्ष 2013 में सेवानिवृत्‍त होने वाले सैनिकों की पेंशन के आधार पर किया जाएगा. यह 1 जुलाई, 2014 से प्रभावी माना जायेगा.

जबकि सभी पेंशन भोगियों के लिए पेंशन का पुन: नियतन समान रैंक पर तथा सेवा की समान अवधि तक सेवा के बाद 2013 में सेवानिवृत्‍त होने वाले सैन्‍य कर्मियों की अधिकतम तथा न्‍यूनतम पेंशन के औसत के आधार पर किया जाएगा. हालांकि औसत से अधिक पेंशन प्राप्‍त करने वाले कर्मियों की पेंशन में कोई बदलाव नहीं हुआ.