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भारत करेगा बड़ी हथियार खरीद, रूस अब भी बड़ा रक्षा साझीदार

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच भारत ने करीब 25 अरब डॉलर के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है.

भारत करेगा बड़ी हथियार खरीद, रूस अब भी बड़ा रक्षा साझीदार
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच भारत ने करीब 25 अरब डॉलर के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है. भारत हथियारों की बड़ी खरीद करने जा रहा है. इन नए सौदों में भी रूस भारत का बड़ा रक्षा साझीदार बनकर सामने आया है.भारत ने रक्षा उपकरणों की खरीद का एक बड़ा कदम उठाया है और करीब 25 अरब डॉलर के सौदों को मंजूरी दी है. रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात जारी बयान में बताया कि इन प्रस्तावों को रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हरी झंडी दी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं. दुनिया में बढ़ती अस्थिरता और दो बड़े युद्धों के बीच भारत भी अपनी सैन्य क्षमताओं को तेजी से आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

भारत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 6.73 लाख करोड़ रुपये के 55 प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है. इसके साथ ही 2.28 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खरीद अनुबंध भी साइन किए गए हैं, जो किसी भी एक वित्त वर्ष में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.

रुस अब भी बड़ा रक्षा साझीदार

वायुसेना के लिए जिन प्रमुख प्रणालियों को मंजूरी मिली है, उनमें नए मीडियम ट्रांसपोर्ट विमान शामिल हैं, जो पुराने एएन-32 और आईएल-76 बेड़े की जगह लेंगे. इसके अलावा अतिरिक्त एस-400 लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली, उन्नत ड्रोन और सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के इंजन अपग्रेड भी इस सूची में शामिल हैं. एस-400 प्रणाली को दुश्मन की लंबी दूरी की हवाई क्षमताओं का मुकाबला करने में अहम माना जाता है, जबकि नए सशस्त्र ड्रोन निगरानी और हमले दोनों भूमिकाओं में काम करेंगे.

हालांकि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका, फ्रांस और इस्राएल से रक्षा खरीद बढ़ाई है, लेकिन एस-400 की नई खेप और सुखोई-30 का अपग्रेड यह दिखाते हैं कि रूस अभी भी भारत का एक अहम रक्षा साझेदार बना हुआ है. यह रणनीतिक संतुलन भारत की बहु-आयामी विदेश और सुरक्षा नीति को भी दर्शाता है.

पिछले साल पाकिस्तान से हुई थी झड़प

थलसेना के लिए भी कई अहम प्रणालियों को मंजूरी मिली है. इनमें वायु रक्षा ट्रैकिंग सिस्टम, आर्मर-पियर्सिंग टैंक गोला-बारूद, आधुनिक रेडियो, तोपखाना और युद्धक्षेत्र निगरानी के लिए एरियल सर्विलांस सिस्टम शामिल हैं. ये सभी उपकरण सेना की जमीनी क्षमताओं को मजबूत करेंगे और भविष्य के संघर्षों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

इन मंजूरियों के साथ भारत अपनी रक्षा तैयारियों को नई गति दे रहा है. अगस्त, 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच कुछ दिन झड़प चली थी. इसके बाद भारत ने अपनी रक्षा कंपनियों और उनके उत्पादों पर भी नए सिरे से ध्यान देना शुरू किया है. बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत का यह कदम देश की सुरक्षा रणनीति को और मजबूत बनाने का प्रयास है.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 28, 2026 01:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).