भारत को जल्द मिलने वाले हैं नए PM? इस वरिष्ठ नेता ने किया दावा, क्या US की रिपोर्ट से खुलने वाला है कोई बड़ा राज
PM Narendra Modi | PTI

नई दिल्ली: देश को जल्द ही नया प्रधानमंत्री मिलने वाला है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण (Prithviraj Chavan) के इस बयान ने भारतीय राजनीति में अचानक नई चर्चा छेड़ दी है. उन्होंने दावा किया है कि आने वाले समय में भारत को नया प्रधानमंत्री मिल सकता है. इस बयान को उन्होंने अमेरिका में 19 दिसंबर को जारी होने वाली जेफ्री एपस्टीन फाइल्स (Epstein Files) से जोड़ा है. चव्हाण का कहना है कि इन फाइल्स के खुलासे का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है.

हाल ही में पृथ्वीराज चव्हाण ने सोशल मीडिया पर इशारों-इशारों में लिखा था कि एक महीने के भीतर कोई मराठी मानूस (मराठी व्यक्ति) देश का प्रधानमंत्री बन सकता है. इस पोस्ट के बाद कई लोगों ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा. पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ में आयोजित एक कार्यक्रम में चव्हाण ने कहा कि उनका बयान किसी पुख्ता भविष्यवाणी पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संभावना पर आधारित था. उन्होंने साफ किया कि अगर महाराष्ट्र से कोई प्रधानमंत्री बनता है, तो मौजूदा प्रधानमंत्री को पद छोड़ना होगा, और उन्होंने सिर्फ इस संभावित बदलाव की ओर इशारा किया था.

एपस्टीन फाइल्स से क्यों जोड़ा गया बयान

चव्हाण ने अपने बयान को 19 दिसंबर से इसलिए जोड़ा क्योंकि इसी दिन अमेरिका में एपस्टीन फाइल्स सार्वजनिक होने वाली हैं. उनका दावा है कि इन दस्तावेजों में कई बड़े वैश्विक नेताओं से जुड़े गंभीर खुलासे हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पहले ही कुछ नाम और जानकारियां घूम रही हैं और कुछ फोटो भी सामने आ चुकी हैं. अगर इन खुलासों का असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ा, तो भारत की राजनीति भी इससे अछूती नहीं रह सकती.

क्या महाराष्ट्र से आ सकता है नया प्रधानमंत्री?

जब “मराठी मानूस” वाले बयान पर सवाल उठे, तो चव्हाण ने कहा कि अगर देश में प्रधानमंत्री बदला जाता है, तो नया चेहरा बीजेपी के भीतर से ही आएगा. उनके अनुसार, बीजेपी में अगर विकल्पों की बात की जाए, तो महाराष्ट्र से जुड़े कुछ नाम सामने आ सकते हैं. हालांकि, उन्होंने किसी भी संभावित नेता का नाम लेने से परहेज किया.

पृथ्वीराज चव्हाण ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके बयान को सनसनीखेज तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने इसे एक राजनीतिक विश्लेषण बताया और कहा कि वैश्विक घटनाएं कई बार देश की राजनीति में बड़े बदलावों की वजह बनती हैं.